भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव में 17 जून को भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में हर दिन नया घटनाक्रम हो रहा है. आज बेलौटी गांव में महापंचायत बुलाई है. इस महापंचायत को लेकर ना केवल भोजपुर बल्कि पूरे बिहार के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. ग्रामीणों का दावा है कि यह महापंचायत केवल भरत भूषण तिवारी को न्याय दिलाने की मांग तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पुलिस कार्रवाई, प्रशासनिक जवाबदेही और आम लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी. प्रशांत किशोर के भी इस महापंचायत में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है.
निष्पक्ष जांच की मांग
भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद से बेलौटी गांव लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है. घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए थे. उनका आरोप था कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.
पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा
लगातार 6 दिनों तक चले विरोध, जन-दबाव और न्याय की मांग के बाद मृतक की मां आशा देवी के आवेदन पर तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार सहित कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. कार्रवाई को परिजनों ने न्याय की दिशा में पहला कदम बताया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि केवल FIR दर्ज होने से उनकी लड़ाई खत्म नहीं हो जाती. गांव के लोगों का कहना है कि वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार, कार्रवाई की जाए. यही कारण है कि FIR दर्ज होने के बाद भी गांव में आंदोलन का माहौल बना हुआ है.
महापंचायत क्यों बुलानी पड़ी?
बेलौटी गांव के लोगों का कहना है कि भरत भूषण तिवारी की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है. ग्रामीणों के अनुसार, यदि इस मामले में सच्चाई सामने नहीं आई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है. ग्रामीणों का कहना है कि महापंचायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ माहौल बनाना नहीं, बल्कि न्याय की मांग को लोकतांत्रिक तरीके से मजबूत करना है. पंचायत में यह भी चर्चा होगी कि आगे की कानूनी लड़ाई किस प्रकार लड़ी जाए, और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए किन-किन कदमों की आवश्यकता है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, पंचायत में जिले के विभिन्न गांवों से लोग पहुंचेंगे. कई सामाजिक संगठन, छात्र संगठन और जनप्रतिनिधि भी इसमें भाग ले सकते हैं. गांव में पिछले दो दिनों से महापंचायत की तैयारियां चल रही हैं और लोगों के बीच इसको लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है.
परिजनों के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता
मृतक की मां आशा देवी ने घटना के बाद कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि भरत भूषण तिवारी का मोबाइल फोन अब भी पुलिस के कब्जे में है और परिवार को वापस नहीं किया गया है. आशा देवी का आरोप है कि उन्होंने कई बार मोबाइल वापस करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. उनका कहना है कि मोबाइल में घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और जानकारियां हो सकती हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा और जांच अत्यंत आवश्यक है.
मोबाइल की फोरेंसिक जांच की मांग
परिजनों का कहना है कि उन्हें इस बात की चिंता है कि यदि मोबाइल की फोरेंसिक जांच नहीं हुई या उसमें मौजूद सामग्री सुरक्षित नहीं रखी गई, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने से पहले ही प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. प्रशासन का कहना है कि जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है.
गांव और पुलिस के बीच बढ़ी दूरी
ग्रामीणों का दावा है कि घटना के बाद गांव और पुलिस के बीच विश्वास का संकट पैदा हो गया है. कई ग्रामीणों का कहना है कि एनकाउंटर के बाद से गांव के लोग पुलिस से दूरी बनाए हुए हैं. कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के बाद जो लोग जानकारी लेने या बातचीत करने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें उचित जवाब नहीं मिला. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन और जनता के बीच संवाद बेहद जरूरी होता है. यदि संवाद बना रहे तो कई तरह की आशंकाओं और भ्रमों को दूर किया जा सकता है.
बड़ी हस्तियों के पहुंचने से बढ़ी चर्चा
घटना के बाद बेलौटी गांव में लगातार बड़ी हस्तियों का आगमन हो रहा है. पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव गांव पहुंचे और उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया. उन्होंने कहा कि वे इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े हैं, और न्याय के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. उनके दौरे के बाद यह मामला राज्य स्तर पर और अधिक चर्चा में आ गया. भोजपुरी फिल्म जगत के लोकप्रिय अभिनेता और गायक खेसारीलाल यादव भी गांव पहुंचे. उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि न्याय की लड़ाई में वे परिवार के साथ हैं. इन दोनों हस्तियों के गांव पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर भी मामले की चर्चा और तेज हो गई. बड़ी संख्या में लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई.
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