कटिहार के डंडखोरा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय सिहला में पिछले पांच दिनों से छात्र-छात्राएं विद्यालय नहीं आ रहे हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में मिड-डे मील में गड़बड़ी की जा रही है. इसी वजह से अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है. ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष का आरोप है कि प्रधानाध्यापिका की ओर से कम मात्रा में और झूठा भोजन दिया जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रधानाध्यापिका को नहीं हटाया जाएगा, तब तक वे अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे.

Katihar School News
152 बच्चों वाले इस विद्यालय में फिलहाल केवल तीन छात्राएं ही स्कूल आ रही हैं. वहीं दूसरी तरफ प्रधानाध्यापिका इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कुछ ग्रामीणों पर ही संगीन आरोप लगा रही हैं.
नमक दिखाने का पैसा नहीं देती सरकार- अभिभावक
नीरा देवी, अभिभावक ने कहा, "हम अपने बच्चों को स्कूल कैसे भेजें? यहां बच्चों को खाना नहीं मिलता है. दो किलो आलू और आधा किलो दाल में इतने बच्चों को कैसे खिलाया जाएगा? बच्चे जब सब्जी मांगते हैं तो उन्हें सिर्फ सब्जी का पानी दे दिया जाता है और कहा जाता है कि नमक ले लो. क्या सरकार सिर्फ नमक दिखाने के लिए पैसा देती है? हमने शिकायत की तो प्रधानाध्यापिका कहने लगीं कि फंसा देंगे. हम वहां कुछ कहने जाते हैं तो उल्टा हमें ही धमकी मिलती है. पिछले पांच दिनों से स्कूल बंद है. हम सरकार से निवेदन करते हैं कि इन्हें यहां से हटाया जाए, क्योंकि हमारे बच्चे नमक खाने नहीं आते. पढ़ाई भी ठीक से नहीं होती है. जब तक यह मैडम यहां रहेंगी, हम अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे."

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मैनेजमेंट कमेटी ने क्या कहा?
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शिवधारी केवट ने कहा, "यह प्राथमिक विद्यालय सिहला है. यहां 152 बच्चों का नामांकन है और पहले सभी बच्चे अच्छी संख्या में आते थे. लेकिन 18 तारीख से बच्चे स्कूल आना बंद कर दिए हैं. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल में झूठा भोजन खिलाया जाता है और आधा पेट ही खाना दिया जाता है. शिकायत के बाद हम स्वयं निरीक्षण करने गए और वही स्थिति पाई. प्रधानाध्यापिका को जब इस बारे में बताया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि हम वही करेंगे जो हमें करना है, आप लोग इसमें हस्तक्षेप न करें. महिला होने का लाभ उठाकर कहती हैं कि यदि आप कुछ करेंगे तो हम आपको फंसा देंगे. इसी डर से हम लोग भी विद्यालय आना उचित नहीं समझते. पांच दिनों से स्कूल बंद है."
क्या बोलीं प्रधानाध्यापिका?
प्रधानाध्यापिका प्रेम लता कुमारी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "ऐसा कुछ भी नहीं है. हम स्वयं पूरी कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों को उत्तम गुणवत्ता का भोजन मिले. आप चाहें तो मीडिया के लोग आकर स्वयं निरीक्षण कर सकते हैं. जब से मैं यहाँ आई हूं, विद्यालय को सुधारने का प्रयास कर रही हूं. राजनीति के कारण मुझसे पैसा मांगा जा रहा है. मैंने पैसा नहीं दिया, इसलिए अध्यक्ष महोदय और कुछ ग्रामीण मिलकर बच्चों को स्कूल आने से रोक रहे हैं. हमने इसकी जानकारी सभी वरीय अधिकारियों और मीडिया को दे दी है. मेरा कहना है कि आप लोग आकर जांच करें. यदि कोई त्रुटि मिले, तो आप जो निर्देश देंगे, हम पालन करने में सक्षम हैं. हम चाहते हैं कि बच्चे विद्यालय आएं. अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और उत्तम गुणवत्ता का भोजन पाएं. ग्रामीण यदि स्वयं भोजन बनवाने की प्रक्रिया देखना चाहें तो हमें कोई आपत्ति नहीं है."
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