जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 18 सितंबर को अपने सभी विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई है. यह बैठक ऐसे समय में होने जा रही है जब पार्टी फरक्का जल समझौते को लेकर खुलकर बिहार के हितों की बात कर रही है. इसी वजह से इस बैठक को महज एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
फरक्का मुद्दे पर पार्टी ने दिखाए सख्त तेवर
JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा हाल के दिनों में फरक्का समझौते को लेकर लगातार सक्रिय नजर आए हैं. उनका कहना है कि बिहार के हितों को नजरअंदाज करके इस समझौते को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए. पार्टी का तर्क है कि गंगा में बढ़ती गाद, जल प्रवाह में बदलाव और हर साल आने वाली बाढ़ से बिहार लंबे समय से प्रभावित होता रहा है. ऐसे में राज्य के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
क्या बैठक में तय होगी आगे की रणनीति?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बैठक में सिर्फ फरक्का मुद्दे पर ही नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति पर भी विचार हो सकता है. विधायक और एमएलसी अपने-अपने क्षेत्रों की रिपोर्ट रख सकते हैं. जनता का मूड क्या है, कार्यकर्ताओं की स्थिति कैसी है और किन इलाकों में पार्टी को ज्यादा मेहनत की जरूरत है, इन मुद्दों पर भी चर्चा संभव है.
बदले राजनीतिक समीकरण
बिहार की राजनीति में हाल के समय में बड़ा बदलाव आया है. अब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं हैं और सम्राट चौधरी राज्य की कमान संभाल रहे हैं. JDU NDA का हिस्सा है, लेकिन उसके सामने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने की चुनौती भी है. पार्टी चाहती है कि उसके समर्थकों को यह संदेश जाए कि बिहार के मुद्दों पर उसकी अपनी मजबूत आवाज है.
NDA की राजनीति पर भी रहेगी नजर
यह बैठक NDA की राजनीति के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है. BJP के साथ सरकार में रहते हुए JDU को अपने राजनीतिक आधार को मजबूत बनाए रखना है. ऐसे में 18 सितंबर की बैठक से निकलने वाले संदेश पर सहयोगी दलों और राजनीतिक विरोधियों दोनों की नजर रहेगी. माना जा रहा है कि बैठक के बाद पार्टी के अगले कदम और बिहार की राजनीति में उसकी दिशा काफी हद तक साफ हो सकती है.
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