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खेती का शुद्ध देसी जुगाड़, मात्र 10 फीट में बिना मिट्टी के 27 प्रकार की सब्जी उगा रहे बिहार के किसान

अरुण इस तकनीक के संबंध में किसानों को जानकारी देकर इस विधि से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. खासकर शहरी लोगों को अपने छत पर इस तकनीक से खेती कर ताजी सब्जी उगा सकते हैं.

खेती का शुद्ध देसी जुगाड़, मात्र 10 फीट में बिना मिट्टी के 27 प्रकार की सब्जी उगा रहे बिहार के किसान
छत पर बिना मिट्टी के खेती.
  • बिहार के वैशाली जिले के किसान अरुण ने बिना मिट्टी के हाइड्रोपोनिक्स खेती की अनूठी तकनीक अपनाई है.
  • अरुण ने प्लास्टिक पाइप, नारियल के छिलके और जैविक खाद का उपयोग कर छत पर विभिन्न सब्जियां उगाई हैं.
  • इस खेती में पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी में रखा जाता है, जिससे उत्पादन तेजी से होता है.
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वैशाली:

खेती के लिए सबसे बुनियादी जरूरत मिट्टी की होती है. लेकिन तेजी से बदलती तकनीक ने इस जरूरत का विकल्प भी तैयार कर दिया है. आज के समय में कई मेट्रो शहरों में बिना मिट्टी की हाइड्रोपोनिक्स खेती है. लेकिन अब यह तकनीक दुनिया के बड़े देशों के बड़े शहरों से निकलकर बिहार तक भी पहुंच चुका है. बिहार के वैशाली जिले में एक किसान अरुण ने खेती की ऐसी तकनीक अपनाई है, जिसे देखकर लोग हैरान हो रहे हैं. मोटे तौर पर अरुण की खेती हाइड्रोपोनिक्स टेक्निक पर आधारित है. लेकिन उन्होंने बिहार में इस खेती के लिए शुद्ध देसी जुगाड़ अपनाया है.

अरुण प्लास्टिक की पाइप, प्लास्टिक का डिस्पोजल ग्लास, पुराने कपड़े की बत्ती और मिट्टी की जगह नारियल का छिलका आदि का उपयोग कर छत पर कई प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं. अरुण बताते है कि उनकी खेती में पानी का नाममात्र इस्तेमाल होता है. हानिकारक रसायनिक खाद की जगह सरसों की पेराई के बाद निकली खल्ली का उपयोग किया जाता है.

छत पर मामूली जगह में अरुण कई प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं.

छत पर मामूली जगह में अरुण कई प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं.

जमीन की अपेक्षा कम समय में बेहतर उत्पादन

अरुण बिहार के वैशाली जिले के चेहराकलां प्रखंड के सुमेरगंज गांव के रहने वाले हैं. बगैर मिट्टी के पौधे उगाने की तकनीक को अरुण अब दूसरे किसानों को भी सीखा रहे हैं. पौधे पोषक तत्वों से युक्त पानी के घोल में उगाए जाते हैं. पौधों की जड़ों को सीधे पानी में रखा जाता है, जिससे उन्हेंआवश्यक पोषक तत्व और ऑक्सीजन मिलता रहता है.

मनी प्लांट से मिली सीख

खेती की इस तकनीक में किसान बिना मिट्टी के फसल उगाकर जीरो लागत में बेहतर उत्पादन कर सकतेहैं. सुमेरगंज के अरुण कुमार ने दो साल पहले मोबाइल पर वीडियो देखने के दौरान मनी प्लांट से इस तरह के पौधे लगाने की प्रेरणा ली. सोचा कि मनी प्लांट पानी से पोषक तत्त्व लेकर विकसित हो सकता तो अन्य पौधे क्यों नहीं.

पीवीसी पाइप में उगा रहे कई तरह की सब्जियां

अरुण ने बतया उसने पीवीसी पाइप के एक छोटे टुकड़े को लेकर उसमें कई छेद बनाकर चार-पांच सब्जी के पौधे को लगाया. पानी के माध्यम से उसमें प्रकृतिक खाद आदि दिया. पौधे का विकास काफी तेजी से हुआ. कम समय में ही पौधे में पूरे साल उगा सकते हैं. हरि सब्जी एवं अन्य फसलें घरेलू विधि से अरुण कुमार ने छत पर बैंगन, पालक, मिर्ची, खीरा, गोभी, राजमा, सेम, टमाटर, चना, मटर, धनिया आदि की फसल लगा रखी है.

खेती की तकनीक के बारे में बताते अरुण.

खेती की तकनीक के बारे में बताते अरुण.

अब इजरायली बागवानी तकनीक का भी कर रहे इस्तेमाल

अरुण इस तकनीक के संबंध में किसानों को जानकारी देकर इस विधि से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. खासकर शहरी लोगों को अपने छत पर इस तकनीक से खेती कर ताजी सब्जी उगा सकते हैं. जनसंख्या बढ़ने के साथ ही कम होती कृषि भूमि के लिए विकल्प के तौर पर इस तकनीक को अपनाया जा सकता है. इस तकनीक में गूगल के माध्यम से इजरायल में होने वाली बागवानी की तकनीक को भी शामिल किया है.

अरुण ने खुद बताया- इस अनोखे खेती की तकनीक

अरुण ने बताया कि 8-10 इंच मोटा पीवीसी पाइप लेते हैं. इसमें दो इंच व्यास का छेदकर सभी पाइप को एक दूसरे से कनेक्ट करते हैं. इनमें छोटे मोटर की मदद से पानी की सप्लाई की जाती है. पाइप में बने छेद में प्लास्टिक के छोटे-छोटे ग्लास में कोकपीट (नारियल छिलका का डस्ट) डालकर शिशु पौधे लगाए जाते हैं.

पौधों की जड़ तक पानी पहुंचाने के लिए ग्लास के नीचे सूती कपड़े की बत्ती लगाई जाती है, इसमें रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद के रूप में हल्दी पाउडर व सरसों की खल्ली का प्रयोग कर रहे हैं.

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