Gaya News: बिहार के गया में शनिवार की सुबह एक अलग ही नजारा देखने को मिला. मोक्षदायिनी फल्गु नदी, जो आमतौर पर अपनी शांत लहरों और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती है, आज अचानक मछली पकड़ने के उत्सव का केंद्र बन गई. रबर डैम से पानी छोड़े जाने के बाद नदी में मछलियों की ऐसी भरमार हुई कि लोग अपनी जान की परवाह किए बिना पानी के बीचों-बीच कूद पड़े.
आधी रात को खुला डैम और सुबह लग गई भीड़
दरअसल, जिला प्रशासन ने रबर डैम की सफाई और रखरखाव को देखते हुए शुक्रवार (3 अप्रैल) की रात को डाउनस्ट्रीम की तरफ पानी छोड़ने का फैसला लिया था. जैसे ही शनिवार की सुबह सूरज की किरणें फल्गु पर पड़ीं, लोगों ने देखा कि पानी के तेज बहाव के साथ बड़ी संख्या में मछलियां भी बहकर नीचे आ गई हैं. फिर क्या था, यह खबर आग की तरह पूरे शहर में फैल गई. जाल, टोकरी और जो हाथ लगा, उसे लेकर बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक नदी की ओर दौड़ पड़े.
सफाई के लिए लिया गया था साहसिक फैसला
फल्गु एक बरसाती नदी है, जहां रबर डैम के कारण सालों भर पानी जमा रहता है. लेकिन मार्च का महीना बीतते ही यहां जलस्तर कम होने लगता है. पिंडदान और तर्पण के लिए आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई सामग्री के कारण देवघाट और आसपास के इलाकों में पानी दूषित होने लगा था. पानी से आने वाली दुर्गंध न केवल श्रद्धालुओं को परेशान कर रही थी, बल्कि शहर की छवि पर भी असर डाल रही थी. इसी गंदगी को साफ करने और मानसून 2026 से पहले डैम को दुरुस्त करने के लिए जल संसाधन विभाग ने पानी निकालने का निर्णय लिया.
प्रशासन की सख्ती पर भारी पड़ी 'मछली की चाहत'
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जिला प्रशासन ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था। संगत घाट और ब्राह्मणी घाट जैसे इलाकों में लोगों को नदी के तल में न उतरने की सख्त हिदायत दी गई थी. अधिकारियों का डर था कि पानी के बहाव या फिसलन की वजह से कोई बड़ा हादसा न हो जाए. लेकिन जमीन पर नजारा इसके उलट दिखा. पुलिस और प्रशासन की चेतावनियों को दरकिनार कर लोग घंटों तक पानी में जमे रहे. जिसे जितनी मछलियां मिल रही थीं, वह उतनी ही खुशी से उन्हें बटोरने में मशगूल था.
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