विज्ञापन

बिहार में जमीन सर्वे पर एक्शन में CM सम्राट चौधरी, लंबित फाइलों पर अफसरों को 30 दिन का अल्टीमेटम

सर्वे के काम को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (AI) टूल्स का सहारा ले रहा है. सभी जिलों के बंदोबस्त कार्यालयों में एक विशेष AI सेल का गठन किया गया है. ​इस सेल की कमान बंदोबस्त पदाधिकारी के हाथ में है.

बिहार में जमीन सर्वे पर एक्शन में CM सम्राट चौधरी, लंबित फाइलों पर अफसरों को 30 दिन का अल्टीमेटम
बिहार में जमीन सर्वे पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा एक्शन

बिहार में जमीन सर्वे (विशेष भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्य) को लेकर सरकार बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है. हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल की उच्च स्तरीय बैठक में इस अभियान को और तेज करने के लिए स्पेशल ड्राइव (विशेष अभियान) चलाने का सख्त निर्देश दिया गया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमीन सर्वे की गति और पारदर्शिता को लेकर अधिकारियों को बेहद कड़े निर्देश दिए हैं. उन्होंने साफ किया है कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

पूरे राज्य में 'स्पेशल ड्राइव' चलाने का निर्देश 

​मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि पूरे बिहार में स्पेशल ड्राइव चलाकर जमीन सर्वे के काम की रफ्तार बढ़ाई जाए. उन्होंने निर्देश दिया कि इस काम के लिए जितने भी अतिरिक्त अधिकारियों और तकनीकी कर्मियों (अमीन, कानूनगो) की आवश्यकता हो, उन्हें तुरंत तैनात किया जाए ताकि प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए. 

​समय-सीमा में विस्तार

​शुरुआत में जमीन सर्वे के काम को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन ज़मीनी स्तर पर आ रही दिक्कतों और लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इसकी अंतिम तिथि को 1 साल बढ़ाकर दिसंबर 2027 कर दिया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि तय समय के भीतर हर हाल में सर्वे का काम पूरा कर लिया जाए.

​सर्वे के काम को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (AI) टूल्स का सहारा ले रहा है. सभी जिलों के बंदोबस्त कार्यालयों में एक विशेष AI सेल का गठन किया गया है. ​इस सेल की कमान बंदोबस्त पदाधिकारी के हाथ में है, जिनके साथ आईटी मैनेजर, विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, कानूनगो और अमीन मिलकर काम कर रहे हैं. 

​भूमि परिमार्जन और ई-मापी के लिए सख्त अल्टीमेटम

​मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि लंबित पड़े आवेदनों का निपटारा तुरंत किया जाए. इसके तहत ​30 जून तक ई-मापी, जमाबंदी सुधार (परिमार्जन) और सभी लंबित मामलों को हर हाल में निष्पादित करने का आदेश दिया गया है. जमीन मापी की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और ऑनलाइन कर दिया गया है. अब ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं. 

​जियो-टैगिंग और टाइम-बाउंड रीमार्क

​रैयतों (जमीन मालिकों) की परेशानी कम करने के लिए अब अमीन के लिए जियो-टैग्ड (Geo-tagged) तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके लिए कड़े नियम बनाए गए हैं. ​आवेदन के 3 दिनों के भीतर अमीन का चयन होगा. इसके बाद ​अधिकतम 7 दिनों के भीतर जमीन की मापी की जाएगी और ​मापी के 14 दिनों के भीतर रिपोर्ट को पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य है.

​इस स्पेशल ड्राइव के तहत गांवों में कैंप लगाकर कागजातों (खतियान, जमाबंदी रसीद, केवाला/रजिस्ट्री पेपर या पैतृक जमीन के लिए वंशावली) का सत्यापन किया जा रहा है, अधिकारियों को निर्देश है कि वे रोज़ाना शाम को अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपें ताकि 'माइक्रो मॉनिटरिंग' की जा सके.

​मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि ब्लॉक और अंचल (सर्किल) स्तर पर भ्रष्टाचार या आम जनता को परेशान करने की प्रवृत्ति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ​अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया गया है. ​मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) खुद ब्लॉक कार्यालयों, राजस्व अंचलों और पुलिस थानों के कामकाज की सीधी मॉनिटरिंग कर रहा है. 

​लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर मुख्यमंत्री ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अंचल या बंदोबस्त कार्यालयों में जो भी फाइलें 30 दिनों से अधिक समय से बिना वजह लंबित हैं, उनके जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. प्रक्रियाओं का सरलीकरण और डिजिटल ट्रैकिंग,​चूंकि बिहार में 60 से 70% विवाद जमीन से जुड़े होते हैं, इसलिए मुख्यमंत्री ने नियमों को सरल बनाने को कहा है. 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com