- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 वर्षों में पहली बार ईद की नमाज में पटना के गांधी मैदान नहीं गए
- निशांत कुमार ने जेडीयू ज्वाइन कर राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई है और उन्होंने ईद पर नमाजियों से मुलाकात की
- निशांत के बढ़ते राजनीतिक कद को लेकर जेडीयू में नई जान आने और बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति बन रही है
देश के बाकी हिस्सों की ही तरह बिहार की राजधानी पटना में भी हर साल की तरह ईद के मौके पर हजारों नमाजी ने ईद की नमाज अदा की, लेकिन उनके बीच में बिहार का सबसे बड़ा चेहरा आज मौजूद नहीं था. वह चेहरा और कोई नहीं बल्कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे जो पहली बार सीएम के तौर पर इस कार्यक्रम में नहीं शामिल हुए.ऐसा नीतीश कुमार के बतौर सीएम रहते उनके काल के 20 साल में पहली बार हुआ है
नीतीश की जगह पहुंचे निशांत
मुख्यमंत्री की जगह उनके बेटे निशांत कुमार गांधी मैदान पहुंचे और नमाजियों से मुलाकात कर ईद की मुबारकबाद दी. यह पहली बार है जब किसी बड़े सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने अपने बेटे को प्रतिनिधि के रूप में आगे किया. निशांत कुमार ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत अपने पिता की पार्टी जेडीयू जॉइन करके कर ली है.पिछले कुछ समय से निशांत राजनीतिक तौर पर काफी ऐक्टिव नजर आ रहे हैं.
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पिछले कुछ दिनों से चल रही अलग अलग इफ्तार पार्टी की तस्वीर सोशल मीडिया में काफी वायरल है जिसमें नीतीश कुमार के साथ साथ उनके बेटे निशांत भी इस तरह के हर कार्यक्रम में शामिल होते नजर आ रहे हैं. बीते दिनों हज भवन में आयोजित इफ्तार में तो निशांत अपने पिता के पुराने दिनों की याद दिला दी, निशांत इफ्तार में वैसे ही पारंपरिक तरीके से शामिल हुए जैसे पहले इनके पिता शामिल होते थे. इस मौके पर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी निशांत के साथ नजर आए. साथ ही गांधी मैदान में मौजूद मुस्लिम समुदाय के लोग उनका वहां स्वागत भी किया.
क्या कहते हैं जानकार?
इस घटना के बाद बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है, कई जानकार मान रहे हैं कि यह अब एक रणनीति के तहत हो रहा है. निशांत के चेहरे को राजनीति में आगे किया जाए,जिससे JDU में एक नई जान आएगी, पार्टी मजबूती रहेगी.ऐसे में निशांत के चेहरे को आगे करके बीजेपी पर दवाब भी बनाया जा सकता है.
बिहार के मुखिया नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हो गए हैं, ऐसे में बहुत जल्द उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा.उनके इस्तीफा देने के साथ ही बिहार का अगले मुख्यमंत्री की खोज तेज हो जाएगी.हालांकि अभी जो स्थिति बनेगी उसमे बीजेपी अपना सीएम बनाना चाहेगी, लेकिन जेडीयू के कई नेता इस बात से खुश नहीं है कि उनके नेता नीतीश कुमार 20 साल के बाद मुख्यमंत्री पद से हट जाएंगे. अगर ऐसा होगा तो पार्टी में विरोधाभास हो सकता है और पार्टी के कई नेता पार्टी छोड़ सकते हैं.
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विपक्ष को मिल गया मौका
इस घटना पर आरजेडी और कांग्रेस ने नीतीश कुमार भाजपा पर हमला बोला है.राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि नीतीश कुमार कहीं न कहीं भाजपा और RSS के विचारों से प्रभावित हो गए हैं.भूंजा पार्टी के लोगों ने जिस तरीके से स्थिति और परिस्थितियों का निर्माण किया है, और अब मुख्यमंत्री हैंनीतीश कुमार कुछ ही दिनों के हैं.
नीतीश कुमार हर वर्ष ईदगाह के समय गांधी मैदान में मुस्लिम भाइयों से मिलने के लिए जाते थे, लेकिन इस बार क्यों नहीं गए? क्या कारण है जदयू के नेता को स्पष्ट करना चाहिए. क्या नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के विचारों से इतने प्रभावित हो गए हैं, अब वो मुसलमान के पीछे जाने से भी परहेज करने लगे हैं. अपने राजनीतिक पार्टी का अंत भारतीय जनता पार्टी को समर्पित करके अब पता चल रहा है कि मुस्लिम भाइयों के प्रति दिखावा करते थे.
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इस घटना पर कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा की 20 सालों से लोगों को टोपी पहना ही रहे हैं, अब कितना टोपी पहनाएंगे. अब उनकी पोल खुल चुकी है.इस बार शर्मिंदगी महसूस हुई हो, इसलिए गांधी मैदान नहीं गए हो? वहीं इस घटना पर बीजेपी ने नीतीश कुमार का बचवा किया है और एनडीए को एक जुट बताया है.
गांधी मैदान में ईद के मौके पर नीतीश कुमार नहीं शामिल होने पर बीजेपी ने नीतीश कुमार का बचाव किया है.बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि नीतीश कुमार अपने व्यस्त कार्यक्रम के चलते गांधी मैदान में ईद की नमाज पर नहीं शामिल हुए लेकिन उनके बेटे निशांत शामिल होते है और टोपी भी पहनते हैं. इससे सामाजिक सदभाव दिखता है साथ ही उन्होंने एनडीए को एकजुट और मजबूत बताया है.

अब आगे क्या हो सकता है?
नीतीश कुमार का ईद की नमाज में शामिल न होना सिर्फ एक वयक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि बिहार की राजनीति में संभावित बदलवा का संकेत माना जा रहा है.अब सबकी नजर इस बार पर है कि क्या निशांत कुमार को औपचारिक रूप से बड़ा रोल मिलेगा और क्या यह सत्ता के ट्रांजीशन की शुरुआत है? अब देखना होगा की बिहार के नई सरकार में निशांत की क्या भूमिका होगी?
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