- बिहार में खरमास के बाद मकर संक्रांति तक कोई शुभ काम नहीं किया जाता इसलिए सभी बड़े काम टाले जाते हैं
- नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में अभी नौ खाली पद हैं जिनमें छह JDU और तीन BJP के लिए आरक्षित हैं
- कैबिनेट विस्तार में जाति, समूह और क्षेत्र के संतुलन को लेकर पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी.
मकर संक्रांति यानि चूड़ा-दही के बाद बिहार की राजनीति में कई नए काम आपको देखने को मिलेंगे. दरअसल 14 जनवरी तक खरमास का महीना माना जाता है और इस वक्त कोई शुभ काम नहीं किया जाता है, इसलिए सभी महत्वपूर्ण कामों को मकर संक्रांति तक टाल दिया जाता है. बिहार में खरमास यानि मकर संक्रांति के बाद सबसे बड़ा काम नीतीश कुमार मंत्रिमंडल का विस्तार होना है. नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में अभी JDU से 9 और BJP से 14 मंत्री हैं. जबकि नीतिन नबीन के BJP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के एक जगह खाली हुई है. नीतिन नबीन के पास दो विभाग थे. जबकि चिराग पासवान की पार्टी से दो, जीतन राम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी से एक एक मंत्री हैं.
अभी बिहार मंत्रिमंडल में 9 मंत्रियों के लिए जगह
इस लिहाज से अभी बिहार मंत्रिमंडल में 9 मंत्रियों के लिए जगह हैं. जिसमें JDU के कोटे से 6 मंत्री और BJP के कोटे से 3 मंत्री शपथ ले सकते हैं. बिहार मंत्रिमंडल में अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं. बिहार के लिए नीतीश कुमार का यह मंत्रिमंडल विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि किस जाति, समूह और क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाती है.
मंत्रिमडल विस्तार में इन चीजों पर रहेगी नजर
नीतीश कुमार के परंपरागत अति पिछड़े वोट बैंक से किन नेताओं को तरजीह मिलेगी. पिछड़ा, अति पिछड़ा और सवर्णों का मंत्रिमंडल में क्या अनुपात होगा. कुशवाहा समाज से किनको जगह मिलेगी, क्योंकि जिस तरह RJD का परंपरागत वोट बैंक मुस्लिम और यादव समुदाय को माना जाता है, उसी तरह कुर्मी और कोईरी या कुशवाहा को जदयू का माना जा रहा है. नीतीश कुमार जदयू कोटे से नए चेहरों को तरजीह देंगे.
16 जनवरी से समृद्धि यात्रा पर नीतीश कुमार
दूसरी महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधि जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करने जा रहे हैं वो है समृद्ध यात्रा. नीतीश कुमार खरमास यानि 14 जनवरी के बाद 16 जनवरी से 24 जनवरी तक समृद्धि यात्रा पर होंगे. इस यात्रा में मुख्यमंत्री पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिले का दौरा करेंगे.
तेजस्वी भी पटना में, फरवरी में शुरू करेंगे दौरा
दूसरी तरफ विपक्षी नेता तेजस्वी यादव भी लंबी छुट्टी के बाद पटना लौट चुके हैं. तेजस्वी चुनावी नतीजों के बाद से लगातार बिहार से बाहर थे. लेकिन अब वो पटना आ चुके हैं. चूड़ा-दही के बाद तेजस्वी यादव भी सक्रिय होंगे. फरवरी से तेजस्वी यादव भी बिहार के दौरे पर निकलने वाले हैं. ऐसे में खरमास की समाप्ति के बाद बिहार में सरकार से लेकर सड़क पर कई बदलाव दिखेंगे.
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