- बिहार के टेंडर घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष मल्ल से पूछताछ की है
- इस मामले में पांच IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने की जानकारी मिली है और उनसे पूछताछ जारी है
- ठेकेदार रिशु श्री और उसकी कंपनियों पर सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितता और मिलीभगत के आरोप हैं
IAS Santosh Mall Bihar: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच तेज हो गई है. इसी सिलसिले में ED की टीम आज वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष मल्ल से पूछताछ कर रही है. संतोष मल्ल आज दोपहर करीब 1 बजे पटना स्थित ED कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितताओं और ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े मामले में सवाल-जवाब किए जा रहे हैं. सरकारी ठेकों में कथित गड़बड़ियों की जांच अब बिहार के कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों तक पहुंच गई है. ED इस मामले में एक के बाद एक अधिकारियों को तलब कर पूछताछ कर रही है. इससे पहले बुधवार को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष IAS अधिकारी धर्मेंद्र कुमार से कई घंटों तक पूछताछ की गई थी.

रिशु श्री और उसकी कंपनियां जांच के केंद्र में
टेंडर घोटाले की जांच का प्रमुख केंद्र ठेकेदार रिशु श्री और उससे जुड़ी कंपनियां हैं. आरोप है कि सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कथित मिलीभगत हुई. जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ टेंडरों की शर्तें इस तरह तैयार की गईं, जिससे चुनिंदा कंपनियों को फायदा मिल सके. ED इन आरोपों की पड़ताल कर रही है कि क्या सरकारी ठेकों की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया और क्या इसके बदले किसी तरह का अवैध लेन-देन हुआ. जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही.
मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड से अहम सुराग मिलने की जांच
इस मामले में रिशु श्री के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को अहम माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड में कुछ अधिकारियों के साथ कथित बातचीत और चैट से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं. अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठेकेदार और अधिकारियों के बीच संपर्क किस सिलसिले में हुआ था. क्या ये बातचीत सामान्य प्रशासनिक कामकाज तक सीमित थीं या किसी खास टेंडर में लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थीं? ED इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
बिहार पुलिस की SVU भी कर रही है जांच
टेंडर घोटाला मामले की जांच बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई भी कर रही है. जून 2026 में SVU ने रिशु श्री समेत सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इस मामले में राज्य सरकार पहले ही IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर को निलंबित कर चुकी है. हालांकि, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और आरोपों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होनी है.
जेल में बंद है रिशु श्री, जमानत याचिका हो चुकी है खारिज
इस मामले में आरोपी ठेकेदार रिशु श्री फिलहाल जेल में बंद है. हाल ही में उसकी जमानत याचिका खारिज होने के दौरान पटना हाईकोर्ट की टिप्पणियां भी चर्चा में रही थीं. बताया जा रहा है कि अदालत ने मामले में कथित तौर पर शामिल बड़े अधिकारियों की भूमिका और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए थे. अदालत की टिप्पणी के संदर्भ में यह सवाल भी उठा कि यदि मामले में ठेकेदार की भूमिका सामने आई है, तो कथित अनियमितताओं में शामिल अन्य प्रभावशाली लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है.
अब ED की ओर से वरिष्ठ IAS अधिकारियों से लगातार पूछताछ किए जाने को इसी मामले की जांच के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, हाईकोर्ट की टिप्पणी और ED की पूछताछ के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि के बिना यह कहना उचित नहीं होगा कि पूछताछ केवल अदालत की टिप्पणी के बाद ही तेज हुई है. फिलहाल जांच एजेंसियों का फोकस सरकारी टेंडरों की प्रक्रिया, ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े संपर्कों, डिजिटल साक्ष्यों और संभावित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने पर है. आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजों की जांच से मामले में अन्य अधिकारियों की भूमिका को लेकर स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकती है.
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