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This Article is From Jun 15, 2020

पटना में आर्थिक तंगी के कारण ऑटो ड्राइवर ने की खुदकुशी, प्रशासन ने परिवार को दिया 25 किलो चावल और गेहूं

देश में जारी कोरोना संकट के कारण कई लोगों का रोजगार छिन गया है. हजारों की कमाई करने वाले आज भूखे मरने को मजबूर हैं. इसी कड़ी में आर्थिक तंगी के शिकार एक ऑटो ड्राइवर ने बिहार की राजधानी पटना में खुदकुशी कर ली.

ऑटो चालक की मौत के बाद उसके पिता को प्रशासन ने 25 किलो चावल और गेहूं दिया.
पटना:

देश में जारी कोरोना संकट के कारण कई लोगों का रोजगार छिन गया है. हजारों की कमाई करने वाले आज भूखे मरने को मजबूर हैं. इसी कड़ी में आर्थिक तंगी के शिकार एक ऑटो ड्राइवर ने बिहार की राजधानी पटना में खुदकुशी कर ली. शहर के बाहरी इलाके शाहपुर में रहने वाले ऑटो ड्राइवर के परिवार वालों ने बताया कि, 'उसने अपने ऑटो को चलाकर पैसे जुटाने के लिए संघर्ष किया, लेकिन वह विफल रहा. इसके अलावा वह दिहाड़ी का काम ढूंढने में भी असमर्थ रहा. उन्होंने बताया कि उसने लोन लेकर ऑटो खरीदा था और लॉकडाउन के कारण बीते तीन महीनों से उसकी किस्त चुकाना भी मुश्किल हो गया था. 

जब NDTV ने उनके पिता से मुलाकात की और उनसे उन कठिनाइयों के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि लाख कोशिशों के बावजूद आज तक हमलोगों का राशन कार्ड भी नहीं बना. हालांकि ऑटो ड्राइवर की खुदकुशी की खबर अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पटना जिला मजिस्ट्रेट कुमार रवि 25 किलो चावल और गेहूं के साथ आज पीड़ित परिवार के घर पहुंचे. मृतक ने अपने पीछे तीन बच्चों को छोड़ा है.

25 साल के इस ऑटो ड्राइवर की मौत ने एक बार फिर बिहार में बेरोजगारी को फोकस में ला दिया है. इस सप्ताह विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर 'बेरोजगारी जैसे वास्तविक मुद्दों' पर ध्यान केंद्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए हमला बोला था. तेजस्वी यादव ने कहा था, 'नीतीश कुमार और भाजपा को वास्तविक जमीनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. इससे बिहार को मदद मिलेगी. वहीं, थिंक-टैंक CMIE (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) के अनुसार बिहार में बेरोजगारी दर मई 2020 तक 46.2 प्रतिशत है.

पिछले महीने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्योगपतियों से राज्य में इकाइयां स्थापित करने और वहां पहले से रह रहे लाखों बेरोजगार पुरुषों और महिलाओं के साथ-साथ लॉकडाउन के दौरान घर लौटने वाले लाखों प्रवासियों को रोजगार देने  का आग्रह किया था. बता दें बिहार में कोरोनावायरस के कहर से अब तक 39 लोगों की जान जा चुकी है और अब तक 6400 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं. 

केंद्र सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई फैसले किए गए हैं और उसी कड़ी में बिहार में भी देश के बाकी हिस्सों की तरह वाणिज्यिक गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से खोला जा रहा है.

बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से 8 जून से पूजा स्थलों, होटल-रेस्तरां और शॉपिंग मॉल्स को शर्तों के साथ फिर से खोलने की अनुमति दी गई है. ऑटो और ई-रिक्शा को भी संचालित करने की अनुमति दी गई है, लेकिन यात्रियों की संख्या तय की गई है. हालांकि उन्हें कन्टेन्मेंट जोन में चलने की इजाजत नहीं दी गई है. 


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