- बिहार में लंबे समय बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद संभाला और सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री बने हैं
- सम्राट चौधरी के पास गृह विभाग समेत कुल 29 महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार है जो सरकार की असली ताकत दर्शाता है
- जेडीयू के दोनों डिप्टी सीएम को कुल 18 विभाग मिले हैं जो सत्ता नियंत्रण से अधिक प्रशासनिक कार्यों से जुड़े हैं
बिहार की सियासत का केंद्र बदल गया है. लगभग ढाई दशकों बाद. अब तक 'छोटा भाई' की भूमिका में रही बीजेपी अब 'बड़ा भाई' बन गई है. ज्यादा सीटें लाने के बाद भी मुख्यमंत्री पद छोड़ देने वाली बीजेपी के पास अब मुख्यमंत्री का पद भी आ गया है और असली ताकत भी.
सम्राट चौधरी अब बिहार के मुख्यमंत्री हैं. बुधवार को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ थी. उनके साथ-साथ जेडीयू के विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव डिप्टी सीएम बने हैं.
शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी ने भले ही यह कहा हो कि बिहार में 'नरेंद्र मोदी और नीतीश मॉडल' ही चलेगा. लेकिन शपथ के कुछ घंटे बाद जो विभागों का बंटवारा हुआ, वह काफी कुछ कहता है. विभागों का बंटवारा जिस तरह से हुआ है, उससे लग रहा है कि बीजेपी ही अब बिहार में 'सबकुछ' है और जेडीयू सिर्फ सरकार में सहयोगी.
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सम्राट चौधरी और गृह विभाग
बिहार में शपथ ग्रहण के कुछ घंटों बाद विभागों का बंटवारा हो गया. अभी बिहार सरकार में सिर्फ मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम हैं. विभागों का बंटवारा भी इन्हीं तीनों में हुआ है. लेकिन बंटवारा जिस तरह से हुआ है, वह दिखाता है कि बिहार में सम्राट चौधरी को 'सरकार के भीतर सरकार' वाली ताकत दी गई है.
सम्राट चौधरी के पास गृह समेत 29 विभाग हैं. वहीं, जेडीयू के दोनों डिप्टी सीएम को 18 विभाग ही मिले हैं. विजय चौधरी को 10 और बिजेंद्र यादव को 8.

सरकार में सबसे ताकतवर गृह विभाग माना जाता है. पिछले साल नवंबर में जब विधानसभा चुनाव हुए तब जाकर गृह विभाग बीजेपी के पास आया था. मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने कभी भी गृह मंत्रालय किसी और को नहीं दिया. चुनाव के बाद सम्राट चौधरी को गृह विभाग दिया गया. दो दशकों में यह पहली बार था जब नीतीश कुमार के पास गृह विभाग नहीं था.
2025 में हुए इस बंटवारे के बाद सम्राट चौधरी को जिस तरह से गृह विभाग मिला था, उससे ही लगने लगा था कि बिहार में बीजेपी अब जेडीयू का बड़ा भाई बन गई है. इस बात का अंदाजा इसे भी लगा सकते हैं कि जब 2020 के चुनाव में जेडीयू ने 43 सीटें जीती थीं, तब भी नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास ही रखा था. महागठबंधन के साथ सरकार में भी नीतीश पर गृह विभाग छोड़ने का दबाव पड़ा था लेकिन उन्होंने इसे अपने हाथ से जाने नहीं दिया. नीतीश कुमार जानते थे कि गृह विभाग पर पकड़ होना कितना मायने रखता है.
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विभागों का बंटवारा क्या कहता है?
नवंबर 2025 में जब सम्राट चौधरी के हाथ में गृह विभाग आया था, तभी से अटकलें लगनी शुरू हो गई थीं कि नीतीश कुमार ज्यादा लंबे समय तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे. चुनाव नतीजे आने के 6 महीने के भीतर ही ऐसा हो भी गया.
अब बुधवार को शपथ ग्रहण के बाद विभागों का बंटवारा हुआ है. उसमें सम्राट चौधरी के पास ताकतवर विभाग हैं. उनके पास गृह विभाग तो है ही लेकिन इसके साथ-साथ सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय, निगरानी, राजस्व और भूमि सुधार, खनन, नगर विकास और आवास, स्वास्थ्य, विधि, उद्योग, पथ निर्माण, कृषि, जल संसाधन, युवा, रोजगार, पर्यटन, कला संस्कृति, पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण, खेल, सहकारिता और पंचायती राज जैसे विभाग भी हैं.
दूसरी ओर, जेडीयू को डिप्टी सीएम के साथ-साथ कई अहम विभाग जरूर मिले हैं, लेकिन वह इतने ताकतवर नहीं हैं. विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव के पास संसदीय कार्य, सूचना प्रौद्योगिकी, ग्रामीण विकास, परिवहन, वित्त, वाणिज्य कर, समाज कल्याण, खाद्य जैसे 18 विभाग हैं. यह विभाग सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने और सदन के कामकाज को सुचारु रखने के लिए बेहद जरूरी हैं लेकिन सत्ता पर कंट्रोल वाली 'पावर' नहीं है.

वित्त विभाग भले ही जेडीयू के पास है लेकिन जब नीति-निर्धारण, प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी मुख्यमंत्री के हाथ में हों तब वित्त विभाग की शक्तियां अपने आप सीमित हो जाती हैं.
कुल मिलाकर सम्राट चौधरी के पास बिहार की पुलिस और कानून व्यवस्था के साथ-साथ कई सारे अहम विभाग हैं. उनके पास ऐसे विभाग हैं जो किसी भी सरकार को अपना काम 'दिखाने' के लिए चाहिए. इसके साथ बीजेपी ने न सिर्फ मुख्यमंत्री पद अपने पास रख लिया है, बल्कि अब इस सरकार के भीतर उसकी 'अपनी सरकार' भी बन गई है. विभागों का बंटवारा दिखाता है कि सरकार भले ही गठबंधन की हो लेकिन इसकी 'असली ताकत' अब बीजेपी के पास है.
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