विज्ञापन

बिहार का खजाना खाली हुआ, दिल्ली के भरोसे चल रहा राज्य? तेजस्वी के दावे में कितना दम

बिहार के नए मुख्यमंत्री को एक ऐसा राज्य मिलेगा, जिस पर भारी-भरकम कर्ज होगा. सरकार का हर दिन 132 करोड़ रुपये सिर्फ इसे भरने में ही खर्च होगा.

बिहार का खजाना खाली हुआ, दिल्ली के भरोसे चल रहा राज्य? तेजस्वी के दावे में कितना दम
नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव.
IANS
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को इस्तीफा दे देंगे और उनके बाद नया मुख्यमंत्री नियुक्त होगा
  • तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने बिहार के सरकारी खजाने को खाली कर दिया है
  • बिहार सरकार के बजट का अधिकांश हिस्सा केंद्र सरकार की सहायता और कर्ज पर निर्भर है, जो चिंता का विषय है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

बिहार को मंगलवार को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा. नीतीश कुमार मंगलवार को इस्तीफा दे देंगे. इसके साथ ही बिहार में नीतीश युग खत्म हो जाएगा. इसे लेकर बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने सरकारी खजाना खाली कर दिया है और अब सरकार 'दिल्ली' से चलेगी. 

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि 'जहां एक तरफ नीतीश कुमार बिहार छोड़ने वाले हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने राज्य के खजाने को पहले ही खाली कर दिया है.'

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, 'एनडीए के 20 साल के शासन के बाद भी बिहार सबसे गरीब राज्य बना हुआ है, जहां प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है, प्रति व्यक्ति निवेश सबसे कम है और शिक्षा-स्वास्थ्य की सुविधाएं भी खराब हैं.'

यह भी पढ़ेंः MP के 'मामा' चुनेंगे बिहार का CM... शिवराज को पर्यवेक्षक बनाकर BJP ने साधे एक तीर से कई निशाने!

तेजस्वी के दावे में कितना दम है?

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर सरकारी खजाना खाली कर देने का आरोप लगाया है. क्या उनके इस दावे में वाकई दम है? आंकड़े बताते हैं कि बिहार देश का सबसे कर्जदार राज्य है. यह भी सच है कि बिहार आज केंद्र सरकार पर पूरी तरह से निर्भर है.

बिहार सरकार का 2026-27 का बजट 3.47 लाख करोड़ रुपये का है. किसी भी सरकार के पास कमाई के दो हिस्से होते हैं, जिसे रेवेन्यू रिसीट और कैपिटल रिसीट कहा जाता है. रेवेन्यू रिसीट वह होती है जो सरकार की नियमित कमाई होती है, जैसे- टैक्स. वहीं, कैपिटल रिसीट सरकार को एक बार में मिलने वाला बड़ा पैसा होता है, जैसे- कर्ज या उधारी.

Latest and Breaking News on NDTV

बिहार सरकार के बजट दस्तावेज के मुताबिक, 3.47 लाख करोड़ रुपये के बजट में 2.85 लाख करोड़ रुपये रेवेन्यू रिसीट और 62,475 करोड़ रुपये कैपिटल रिसीट है. अब चिंता वाली बात यह है कि रेवेन्यू रिसीट का 74% केंद्र सरकार से आता है. इसी तरह कैपिटल रिसीट से जो 64,475 करोड़ रुपये मिलने हैं, उनमें से 99% से ज्यादा उधार का है.

यह भी पढ़ेंः बिहार में किस जाति के सीएम ने किया सबसे लंबा शासन, मुख्यमंत्री के चुनाव में इसका रखा जाएगा ख्याल?

रोज 132 करोड़ कर्ज और ब्याज चुकाने में खर्च

बिहार सरकार पर 2025-26 तक 3.50 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था. 2026-27 में यह बढ़कर 3.88 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है. इसका मतलब हुआ कि बिहार की GSDP का 29% से ज्यादा तो सिर्फ कर्ज है.

बजट दस्तावेज बताता है कि 2026-27 में बिहार सरकार 25,364 करोड़ रुपये का तो सिर्फ ब्याज चुकाएगी. इसके अलावा 22,665 करोड़ रुपये का लोन भरेगी. इस हिसाब से देखा जाए तो बिहार सरकार रोजाना लगभग 132 करोड़ रुपये सिर्फ कर्ज और उसका ब्याज चुकाने में खर्च कर रही है.

इतना ही नहीं, सरकार का 1.31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा तो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन देने में चला जा रहा है. लगभग 18 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दे दी रही है. इस कारण सरकार के पास विकास योजनाओं पर खर्च करने के लिए कुछ बच ही नहीं रहा है. बिहार सरकार के पास अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, सड़क जैसी चीजों पर खर्च के लिए सिर्फ 18% बजट है.

यह भी पढ़ेंः ​14 को नीतीश कैबिनेट की आखिरी बैठक, 14 को ही BJP विधायक दल की बैठक, क्या 14 को मिलेगा नया बिहार CM?

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com