बिहार में मधुबनी की झंझारपुर कोर्ट ने एक महिला और उसके प्रेमी को फांसी की सजा सुनाई. झंझारपुर की रहने वाली अनीता देवी (23) ने प्रेमी प्रकाश मंडल (35) के साथ मिलकर 4 साल के बेटे और डेढ़ साल के बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी थी. महिला घर से भाग गई थी और उसने बच्चों को रास्ते से हटाने के लिए हत्याकांड को अंजाम दिया. इस डबल मर्डर केस को कोर्ट ने "दुर्लभ मामला" मानते हुए मृत्युदंड का फैसला सुनाया. झंझारपुर सिविल कोर्ट के इतिहास में मौत की सज़ा का पहला मामला बताया जा रहा है.
करीब 3 साल पहले घर छोड़कर चली गई थी महिला
अनीता देवी की शादी साल 2018 में अंधरामठ थाना क्षेत्र के नरही गांव के प्रमोद से हुई थी. इसके बाद प्रमोद कोलकाता में काम कर रहा था. जुलाई-2023 में उसे पता चला कि अनीता बच्चों के साथ घर छोड़कर चली गई है. जब वह वापस नहीं लौटी, तो उसके परिवार ने उनकी तलाश शुरू की. एक हफ्ते की काफी खोजबीन के बाद पता चला कि अनीता और उसके प्रेमी ने उसके बच्चे प्रिंस और सृष्टि की हत्या कर दी है.
बेटे का शव बरामद हुआ, बेटी नदी में बह गई
महिला और उसका प्रेमी साथ रहना चाहते थे और यही वजह थी कि उन्होंने बच्चों को रास्ते से हटाने की योजना बनाी. बच्चों को बालन नदी के पास ले गए, उनका गला घोंट दिया और उनके शव नदी में फेंक दिए. प्रिंस का शव तो मिल गया, लेकिन सृष्टि नदी की तेज लहरों में बह गई और उसका पता नहीं चल सका. जिस वक्त प्रेमी जोड़ा वारदात को अंजाम दे रहा था, तब वहां मौजूद कुछ ग्रामीणों को शक हुआ. गांववालों ने उनका पीछा किया, उन्हें पकड़ा और बाद में उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया.
साल 2023 से हिरासत में दोनों आरोपी
बच्चों के पिता प्रमोद कुमार ने 10 जुलाई, 2023 को घोगरडीहा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवाई. अगले ही दिन, 11 जुलाई को दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लिया गया. अदालत ने दोनों दोषियों को मौत की सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. सबूत मिटाने के लिए 7 साल की कठोर सज़ा और 10-10 हज़ार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.
28 पेज का फैसला, कोर्ट ने बताया बेहद क्रूर अपराध
तीन साल तक चले मुकदमे के फैसले के दौरान कोर्ट ने 28 पन्नों के फैसले में अपराध को 'बेहद क्रूर और अमानवीय' करार दिया. अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों के बयानों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और दस्तावेज़ी सबूतों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया. विशेष सरकारी वकील के सहयोगी जगदीश प्रसाद यादव ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताया. हरियाणा में रह रहे प्रमोद कुमार को भी जब इस फैसले की जानकारी मिली तो वे भावुक हो गए.
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