विज्ञापन

दिल्ली में ट्री सेंसस पर बड़ा खुलासा, 3 दशक की देरी के कारण नहीं पता किस पेड़ से कहां होगा हादसा

दिल्ली में यह सेंसस 30 साल पहले हो जाना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि अभी तक इसपर विचार-विमर्श ही हो रहा है. दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्री एक्ट, 1994 के तहत ट्री अथॉरिटी को शहर में मौजूद पेड़ों की गणना करने और उसका रिकॉर्ड बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई थी.

दिल्ली में ट्री सेंसस पर बड़ा खुलासा, 3 दशक की देरी के कारण नहीं पता किस पेड़ से कहां होगा हादसा
दिल्ली में पेड़ों की सुरक्षा के लिए जरूरी सेंसस 30 साल पहले होना था, लेकिन अभी तक नहीं हो सका है.
NDTV
  • बीते दिनों मुंबई में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 साल के एक छात्र की मौत हो गई थी.
  • पिछले साल दिल्ली में एक बाइक सवार की पेड़ की जद में आने से मौत हुई थी.
  • आंधी-बारिश के बीच पेड़ों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है. लेकिन फिर भी दिल्ली में ट्री सेंसस 30 साल से अटका है.
नई दिल्ली:

मुंबई में हो रही लगातार बारिश के बीच 30 जून को पेड़ गिरने से 11 साल के स्कूली बच्चे की मौत हो गई. बच्चा जिस स्कूल बस में बैठा था, उसी पर एक विशालकाय पीपल का पेड़ गिर गया. जिसमें उसकी दर्दनाक मौत हो गई. विहान श्रीवास्तव नामक इस बच्चे की मौत ने एक बार फिर शहरों में मौजूद पेड़ और आंधी-बारिश के समय में होने वाले हादसों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. विहान की मौत भले मुंबई में हुई हो, लेकिन पेड़ तो हर शहर में हैं. आंधी-बारिश भी हर शहर में आती ही है. ऐसे में शहरों में खड़े पेड़ कब जानलेवा हादसे की वजह बन जाए, कोई कह नहीं सकता. 

Latest and Breaking News on NDTV

दिल्ली में पिछले साल बाइक सवार की हुई मौत

मुंबई में जो कुछ हुआ वैसा पिछले साल दिल्ली में भी हुआ था. पिछले साल अगस्त में दिल्ली के कालकाजी इलाके में एक भारी बारिश के बाद एक पेड़ गिर गया था. जिसकी जद में आने से बाइक सवार युवक की मौत हो गई थी. यही नहीं इसी साल मार्च में आई भीषण आंधी में दिल्ली में एक ही दिन में 100 से अधिक पेड़ अलग-अलग जगहों पर गिर गए थे. जिससे न केवल ट्रैफिक और लाइट की स्थिति खराब हुई बल्कि कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए थे. 

Latest and Breaking News on NDTV

दिल्ली में मानसून दे चुका दस्तक, बारिश के बीच पेड़ गिरने का डर

अब मानसून दिल्ली पहुंच चुका है. आंधी-बारिश का अलर्ट है. ऐसे में दिल्ली में मौजूद पेड़ों के पास बारिश के समय रुकने या वहां से गुजरते समय हादसे का डर बना रहेगा. इन हादसे के बीच पेड़ों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी दिल्ली ट्री सेंसस (Delhi Tree Census) का काम शुरू नहीं हो सका है. जबकि इसके लिए करीब तीन दशक पहले से कानूनी प्रावधान लागू है. 

ट्री सेंसस के लिए वन विभाग और FRI में चल रही बात

बताया जाता है कि यह प्रक्रिया अब भी विचार-विमर्श के चरण में है. दिल्ली वन विभाग और देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) अब तक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं. पेड़ों के स्वास्थ्य का आकलन कैसे होगा, खतरनाक पेड़ों की पहचान कैसे की जाएगी और फील्ड सर्वेक्षण किस तरह संचालित होगा जैसे मुद्दों पर अब भी चर्चा जारी है.

पहले चरण के लिए सरकार 2.9 करोड़ रुपए दे चुका फंड

केंद्र सरकार ने इस चार वर्षीय परियोजना के पहले चरण के लिए 2.9 करोड़ रुपए मंजूर थे, यह काम 3 चरणों में होना है. इससे दिल्ली के गैर-वन शहरी क्षेत्रों में पेड़ों की गिनती होनी है. इस कवायद के जरिए दिल्ली के पेड़ों का वैज्ञानिक डेटाबेस तैयार होगा, जिसमें पेड़ों की प्रजाति के साथ-साथ उनके आयु, ऊंचाई, तने का घेरा, जियो-लोकेशन और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी.

आंधी-बारिश के बीच जब दिल्ली में पेड़ गिरते हैं तो कुछ ऐसा नजारा होता है.

आंधी-बारिश के बीच जब दिल्ली में पेड़ गिरते हैं तो कुछ ऐसा नजारा होता है.
Photo Credit: IANS

दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्री एक्ट, 1994 से पेड़ गिनने की बात

दिल्ली में यह सेंसस 30 साल पहले हो जाना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि अभी तक इसपर विचार-विमर्श ही हो रहा है. दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्री एक्ट, 1994 के तहत ट्री अथॉरिटी को शहर में मौजूद पेड़ों की गणना करने और उनका अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने की कानूनी जिम्मेदारी दी गई थी.

लेकिन कानून लागू होने के तीन दशक से अधिक समय बाद भी दिल्ली में कभी वैज्ञानिक स्तर पर शहरव्यापी ट्री सेंसस नहीं कराया गया, बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. फिर दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली ट्री अथॉरिटी को अधिनियम की धारा 7 के तहत लंबे समय से लंबित ट्री सेंसस तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया. लेकिन फिर भी यह शुरू नहीं हो सका है. 

ट्री सेंसस क्यों महत्वपूर्ण है?

फिलहाल दिल्ली के पास ऐसा कोई डेटाबेस नहीं है जो यह बताए कि शहर में कुल कितने पेड़ हैं, वे कहां स्थित हैं या उनमें से कितने बीमार, कमजोर, कंक्रीट से घिरे हुए या गिरने के जोखिम में हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह सेंसस दिल्ली के शहरी पेड़ों के लिए एक वैज्ञानिक आधार तैयार करेगा, जिससे पेड़ों के स्वास्थ्य की निगरानी, अवैध कटाई की पहचान, वृक्षारोपण योजनाओं की बेहतर योजना और संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलेगी.

Latest and Breaking News on NDTV

'केवल पेड़ों की काउंटिंग नहीं, हादसों को रोकने वाला उपकरण होना जरूरी'

हालांकि पर्यावरणविदों का मानना है कि यह अभ्यास तभी उपयोगी होगा जब इसका उद्देश्य केवल पेड़ों की गिनती तक सीमित न रहे. 10 साल पहले दिल्ली के सर्वोदय एन्क्लेव में छोटे पैमाने पर ट्री सेंसस करने वाली पर्यावरणविद् पद्मावती द्विवेदी ने कहा कि इस सर्वेक्षण को हादसों को रोकने का उपकरण बनना चाहिए, न कि केवल पेड़ों की सूची तैयार करने का माध्यम.

उन्होंने कहा, “यदि स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ पेड़ों के स्वास्थ्य का सही आकलन किया जाए, तभी यह सार्थक होगा. इसे केवल गिनती का अभ्यास नहीं बनाया जा सकता.” उनका कहना है कि सरकारें अक्सर पेड़ों की संख्या पर ध्यान देती हैं, जबकि उनके स्वास्थ्य की अनदेखी कर देती हैं.

एक्सपर्ट के अनुसार, पेड़ों की प्रजाति, परिपक्वता, जड़ों की स्थिति, उपलब्ध मिट्टी और उनके आसपास के कंक्रीट अतिक्रमण का रिकॉर्ड रखना भी उतना ही जरूरी है जितना उनकी संख्या दर्ज करना.

उन्होंने कहा, “किसी कॉलोनी में 300 पेड़ हैं, यह सिर्फ बुनियादी जानकारी है. लेकिन जब आप हर पेड़ की प्रजाति, परिपक्वता और स्वास्थ्य का रिकॉर्ड रखते हैं, तभी यह डेटा उपयोगी बनता है.” द्विवेदी ने बताया कि उनके सर्वेक्षण की मदद से कई पेड़ों की जड़ों को कंक्रीट के कब्जे से मुक्त कराया गया था.

लोग GPS टैगिंग की बात करते हैं, लेकिन अनुभव से कह सकती हूं कि यह इतना आसान नहीं है. यदि दो पेड़ बहुत पास हों, तो दोनों को एक ही GPS टैग मिल सकता है.

पद्मावती द्विवेदी

पर्यावरणविद्

एक्सपर्ट ने GPS टैगिंग की बात को बताया बेमानी

अपना अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि सेंसस के बाद हम कई पेड़ों की जड़ों के आसपास का कंक्रीट हटवाने में सफल हुए. डेटा का कोई उद्देश्य होना चाहिए. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि केवल तकनीक के भरोसे समस्या का समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि ट्री सेंसस समय लेने वाली प्रक्रिया है. किसी को डेटा इकट्ठा करना होगा और किसी को उसकी पुष्टि करनी होगी. यह एक दिन में पूरा होने वाला काम नहीं है.

आंधी-बारिश के समय बड़े-बड़े जड़ से उखड़ कर गिर जाते हैं.

आंधी-बारिश के समय बड़े-बड़े जड़ से उखड़ कर गिर जाते हैं.
Photo Credit: IANS

दिल्ली ट्री सेंसस की चुनौतियां क्या-क्या?

दिल्ली ट्री सेंसस की चुनौतियां पर पद्मावती द्विवेदी ने बजट व अन्य चीजों की ओर ध्यान दिलाया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या परियोजना के लिए आवंटित बजट पर्याप्त होगा. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि 2-3 करोड़ रुपये इतने बड़े स्तर के अभ्यास के लिए पर्याप्त हैं.” उन्होंने बताया केवल अपने इलाके के 700-800 पेड़ों को चिह्नित करने के लिए ही लगभग 16 वर्ष पहले उन्हें पेंट पर करीब 10,000 रुपये खर्च करने पड़े थे. जिसमें श्रम लागत शामिल नहीं थी.

उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA), स्कूलों और स्थानीय समुदायों को प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए,  उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्री सेंसस एक बार होने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि निरंतर निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया होनी चाहिए.

दिल्ली ट्री सेंसस कमेटी के सदस्य बोले- अभी कई चीजें तय होनी बाकी

दिल्ली सरकार की ट्री सेंसस विशेषज्ञ समिति में शामिल पर्यावरणविद् प्रदीप कृष्णन ने कहा कि अभी कई तकनीकी मुद्दे अनसुलझे हैं. उन्होंने कहा, "सेंसस की पद्धति को लेकर भी अभी चर्चा जारी है. सर्वे कैसे किया जाएगा, कौन-सी तकनीकें इस्तेमाल होंगी और इसकी कार्यप्रणाली क्या होगी, इन सब पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.” उन्होंने यह भी संदेह जताया कि क्या यह सेंसस खतरनाक पेड़ों की उपयोगी पहचान कर पाएगा.

मेरा मानना है कि दिल्ली का पहला शहरव्यापी ट्री सेंसस शुरू होने से पहले कई तकनीकी मुद्दों का समाधान होना बाकी है. FRI को यह जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन दिल्ली वन विभाग ने अभी तक जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण करने पर सहमति नहीं दी है.

प्रदीप कृष्णन

पर्यावरणविद् और दिल्ली ट्री सेंसस विशेषज्ञ समिति के सदस्य



यह भी पढ़ें - विहान के बहाने सवाल: बारिश होते ही 'साइलेंट किलर' क्यों बन जाते हैं पेड़ ? मुंबई में 10 साल में हुईं 45 मौतें

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Delhi Tree, Delhi Tree Census, Delhi Tree Felling, Tree Collapse, Tree Collapse In Mumbai
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com