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बिहार में औद्योगिक क्रांति की तैयारी, बनेंगे 11 मेगा पार्क, 38 फूड पार्क और 50 हजार एकड़ का लैंड बैंक

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं और निर्देश जारी किए हैं.

बिहार में औद्योगिक क्रांति की तैयारी, बनेंगे 11 मेगा पार्क, 38 फूड पार्क और 50 हजार एकड़ का लैंड बैंक
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए
@samrat4bjp

बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा विजन सामने रखा है. उन्होंने राज्य में 11 मेगा इंडस्ट्रियल पार्क और सभी 38 जिलों में फूड पार्क विकसित करने का निर्देश दिया है. साथ ही उद्योगों के लिए 50 हजार एकड़ का लैंड बैंक तैयार करने और बिहार को निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने पर जोर दिया है. मुख्यमंत्री ने मंगलवार, 2 जून को पटना स्थित संकल्प सभागार में उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि औद्योगिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. उन्होंने कहा कि उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से प्रगति करके ही बिहार की तस्वीर बदली जा सकती है. बैठक में उद्योग विभाग की ओर से राज्य में चल रही औद्योगिक योजनाओं, निवेश प्रस्तावों और रोजगार सृजन से जुड़े कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई. मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि बिहार में संसाधनों की कोई कमी नहीं है और निवेशकों को बेहतर माहौल और सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है ताकि वे राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए आगे आएं.

38 जिलों में फूड पार्क से बढ़ेगा कृषि आधारित उद्योग

मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में फूड पार्क स्थापित करने का निर्देश देते हुए कहा कि इससे कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) को बढ़ावा मिलेगा. बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहां फल, सब्जी तथा अन्य कृषि उत्पादों की भरपूर उपलब्धता है. फूड पार्क बनने से किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

50 हजार एकड़ का लैंड बैंक तैयार होगा

उद्योगों की सबसे बड़ी जरूरत भूमि होती है. इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 50 हजार एकड़ का लैंड बैंक तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि सभी जिलों के जिलाधिकारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करें और जमीन मालिकों को उचित मुआवजा देकर सहमति के आधार पर भूमि उपलब्ध कराएं. सरकार का मानना है कि पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने से बड़े निवेशकों को उद्योग लगाने में आसानी होगी और राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास होगा.

एमएसएमई, टेक्सटाइल और स्टार्टअप पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं. इन क्षेत्रों में तेजी से काम करने की जरूरत है.

उन्होंने अधिकारियों को बिहार में टेक्सटाइल इंडस्ट्रियल सेंटर स्थापित करने की दिशा में ठोस पहल करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत कर युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया गया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों तक उद्यमिता और स्वरोजगार की पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए. स्थानीय युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि रोजगार के लिए पलायन कम हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बने.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में बिहार को बनाना है अग्रणी राज्य

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उद्योगों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि उद्योग लगाने के लिए जरूरी सभी अनुमतियां और सुविधाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि निवेशकों का विश्वास बढ़े. इसके अलावा नई औद्योगिक इकाइयों को सरकार की ओर से मिलने वाले प्रोत्साहन (इंसेंटिव) भी समय पर देने का निर्देश दिया गया.

सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आने से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. 11 मेगा पार्क, 38 फूड पार्क, लैंड बैंक और स्टार्टअप को बढ़ावा देने जैसी योजनाएं बिहार की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं.

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