- बिहार भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के पद संभालने के बाद संगठन में व्यापक फेरबदल की संभावना है
- संगठन को मजबूत करने के लिए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण प्राथमिकता में शामिल है
- पार्टी युवाओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाकर संगठन के जनाधार को विस्तार देने का प्रयास कर रही है
बिहार में भारतीय जनता पार्टी के संगठन में अब जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. नए प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के पद संभालने के बाद पार्टी के अंदर संगठनात्मक हलचल तेज हो गई है. संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में प्रदेश से लेकर जिला और मंडल स्तर तक कई नई नियुक्तियां और फेरबदल होंगे. पार्टी नेतृत्व इस बदलाव को आने वाले चुनावी दौर की तैयारी के तौर पर देख रहा है.
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संगठन को और मज़बूत करने पर जोर
संजय सरावगी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद और नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बीजेपी संगठन में नई ऊर्जा दिखने लगी है. पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि अब संगठन को जमीनी स्तर पर और मज़बूत किया जाएगा. लंबे समय से कुछ जिलों में संगठन की सक्रियता को लेकर सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को फिर से धार देना और कार्यकर्ताओं में जोश भरना है.
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, संजय सरावगी सबसे पहले अपनी टीम बनाने पर फोकस कर रहे हैं. प्रदेश पदाधिकारियों की नई सूची, जिलाध्यक्षों की नियुक्ति और संगठन में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण उनकी प्राथमिकता में शामिल है. पार्टी यह मानती है कि चुनाव से पहले संगठन का ढांचा जितना मजबूत होगा, उतना ही फायदा मैदान में मिलेगा. इसी वजह से कमजोर जिलों की पहचान कर वहां नए और सक्रिय चेहरों को मौका देने की तैयारी है.
जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाने पर फोकस
इस संभावित बदलाव में युवा नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाने पर खास जोर दिया जा सकता है. बीजेपी का मानना है कि लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने से संगठन में विश्वास बढ़ेगा. साथ ही ऐसे चेहरों को भी मौका मिल सकता है, जिनकी पकड़ अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत मानी जाती है. इससे पार्टी का जनाधार और विस्तार होने की उम्मीद है.
संगठनात्मक बदलाव के पीछे एक और अहम वजह सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन है. बिहार की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण हमेशा अहम रहे हैं. पार्टी नेतृत्व चाहता है कि संगठन में सभी वर्गों और इलाकों का प्रतिनिधित्व दिखाई दे. इसी रणनीति के तहत उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार, सीमांचल और मगध क्षेत्र, हर जगह संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है.
बिहार बीजेपी संगठन में फेरबदल की सुगबुगाहट
बीजेपी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि नए प्रदेश अध्यक्ष संगठन को सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि मैदानी स्तर पर सक्रिय देखना चाहते हैं. बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, नियमित बैठकें, कार्यकर्ता संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम उनकी योजना का हिस्सा है. पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ मैनेजमेंट के बिना किसी भी चुनाव में सफलता मुश्किल है. इस बदलाव का असर सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहेगा. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका सीधा असर सरकार और गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ेगा.
मजबूत संगठन के जरिए बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश करेगी. साथ ही विपक्ष को घेरने के लिए भी संगठनात्मक ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा. हालांकि, संगठनात्मक बदलाव आसान नहीं होता. हर फेरबदल में कुछ नेता खुश होते हैं तो कुछ नाराज़ भी. पार्टी नेतृत्व के सामने यह चुनौती होगी कि बदलाव के दौरान नाराज़गी को कैसे संभाला जाए. संजय सरावगी के सामने संतुलन बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है, अनुभव और नएपन के बीच, पुराने नेताओं और उभरते चेहरों के बीच.
बदलाव सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से होगा
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह बदलाव किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संगठन को समय के मुताबिक ढालने के लिए है. पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि जो भी ज़िम्मेदारी मिलेगी, वह काम और प्रदर्शन के आधार पर होगी, इससे संगठन में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ेगी. आने वाले दिनों में पटना में लगातार बैठकों और मंथन का दौर तेज होने की संभावना है.
केंद्रीय नेतृत्व भी बिहार संगठन पर करीबी नजर बनाए हुए है. माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष के प्रस्तावों पर केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद ही अंतिम सूची जारी होगी. इससे साफ है कि बदलाव सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. कुल मिलाकर, बिहार बीजेपी संगठन में होने वाला यह बदलाव पार्टी के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है. नए प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के नेतृत्व में संगठन को नई दिशा देने की कोशिश होगी.
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