जातिगत जनगणना पर बिहार BJP ने सब कुछ केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ा

बिहार भाजपा के सरकार में शामिल मंत्री कहने लगे हैं कि जो भी करेगा वो उनका केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा. लेकिन इस बात का जवाब नहीं दिया कि वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में प्रधानमंत्री से मिलने जायेंगे या नहीं.

जातिगत जनगणना पर बिहार BJP ने सब कुछ केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ा

पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह. (फाइल फोटो)

पटना:

बिहार भाजपा (Bihar BJP) के लिए जातिगत जनगणना के मुद्दे पर अपने सहयोगी नीतीश कुमार और तमाम विपक्षी दलों ने राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. अब तो बिहार भाजपा के सरकार में शामिल मंत्री कहने लगे हैं कि जो भी करेगा वो उनका केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा. लेकिन इस बात का जवाब नहीं दिया कि वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में प्रधानमंत्री से मिलने जायेंगे या नहीं. मंगलवार को नीतीश कुमार मंत्रिमंडल के भाजपा के दो वरिष्ठ मंत्री भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संपर्क अभियान के लिए पहुंचे. और जब उनसे जातिगत जनगणना के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब गोलमटोल था.

उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा, ‘बिहार विधान सभा ने उसे पारित किया है. केंद्र सरकार को निर्णय लेना हैं. 2011 में भी तो सामाजिक और आर्थिक सर्वे हुआ था. उसमें कई प्रकार की विसंगतियां आयी थीं. केंद्र सरकार इन चीजों को देख रही है कि अगर कोई निर्णय लेंगे तो उसका क्या दूरगामी असर पड़ेगा.

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वहीं भाजपा के अन्य मंत्री ने इस मुद्दे पर साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री से मिलने जाने के लिए प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनेंगे या नहीं वो सब निर्णय पार्टी हाईकमांड करेगा.

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा, ‘ये राष्ट्रीय विषय हैं. इस संदर्भ में हमारी केंद्र की सरकार ने अपने बातें कहीं हैं और पार्टी के द्वारा भी जो निर्णय लेने हैं पार्टी ने इस विषय पर अपने विचार रखे हैं तो मूल रूप से हमारी केंद्र की सरकार और केंद्रीय पार्टी का विषय हैं.

हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को इस मुद्दे पर भाजपा के नेताओं को बार-बार याद दिलाया था.

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, 'आज अब कोई कह रहे हैं भाई तो वो जाने वो स्पष्ट करे. ये बात अगर सच ही होती कि ऐसा करने से समाज में डिस्टर्बन्स आता तो आप पूरे के पूरे सब लोग कैसे सपोर्ट करते. आप ही बताइए. हम सब से आग्रह करेंगे कि एकजुट रहिए. करना या ना करना केंद्र सरकार के ऊपर हैं. अपनी बात रखने में क्या दिक्कत हैं.'

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