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बाबा मणिराम अखाड़ा... एक ऐसा मंदिर जहां मन्नत के लिए चढ़ाई जाती है लंगोट, 700 साल पुराना है इतिहास

बाबा मणिराम अपने साथ लोटा, सोटा और लंगोटा लेकर आए थे. उनका मानना था कि स्वस्थ शरीर और स्वच्छ मन के लिए मल्लयुद्ध और संयम आवश्यक हैं. इसी कारण से लंगोट चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज तक जीवित है.

बाबा मणिराम अखाड़ा... एक ऐसा मंदिर जहां मन्नत के लिए चढ़ाई जाती है लंगोट, 700 साल पुराना है इतिहास
नालंदा:

भारत में अनेक ऐतिहासिक मंदिर हैं, जिनका अपना विशेष धार्मिक महत्व और गौरवशाली इतिहास है. ऐसे ही अनोखे मंदिरों में एक है बिहार के नालंदा जिले में स्थित बाबा मणिराम अखाड़ा... जहां भोग के रूप में लड्डू या पेड़े नहीं, बल्कि लंगोट अर्पित की जाती है. यह परंपरा किसी और मंदिर में नहीं देखी जाती, जिससे यह स्थान देशभर में विशिष्ट और अद्वितीय बन गया है.

बाबा मणिराम... मल्लयुद्ध सम्राट
महान संत बाबा मणिराम के बारे में कहा जाता है कि वे 1248 ईस्वी में हरिद्वार से बिहार आए और बिहार शरीफ के दक्षिणी छोर पर स्थित पिसत्ता घाट (अब बाबा मणिराम अखाड़ा) पर अपना डेरा जमाया. उन्होंने यहां मल्लयुद्ध की परंपरा शुरू की और स्वयं भी एक प्रशिक्षित योद्धा थे. इस मंदिर का इतिहार करीब 700 साल पुराना है.

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बाबा ने 1300 ईस्वी में जीवित समाधि ली थी. अखाड़े में आज भी उनकी जीवित समाधि, उनके प्रिय शिष्यों की समाधियां,  मां तारा मंदिर, सूर्य मंदिर, यज्ञशाला, तालाब और शिवालय सहित अनेक प्राचीन मूर्तियां मौजूद हैं. इस शिवालय की खास बात यह है कि वहां एक ही मंदिर में चार शिवलिंग स्थापित हैं.

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लंगोट अर्पण की अनूठी परंपरा
बाबा मणिराम अपने साथ लोटा, सोटा और लंगोटा लेकर आए थे. उनका मानना था कि स्वस्थ शरीर और स्वच्छ मन के लिए मल्लयुद्ध और संयम आवश्यक हैं. इसी कारण से लंगोट चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज तक जीवित है. यह भारत का एकमात्र धार्मिक स्थल है जहां श्रद्धालु लंगोट अर्पित करते हैं. विशेष बात यह है कि हर वर्ष आयोजित होने वाले "लंगोट अर्पण मेले" की शुरुआत जिला और पुलिस प्रशासन द्वारा लंगोट चढ़ाकर की जाती है. यह मेला पाँच दिनों तक चलता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं.

इस स्थल पर 2012 में अखंड ज्योति स्थापित की गई थी, जो आज भी निरंतर प्रज्वलित है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं. यही कारण है कि आम हो या खास, सभी लोग यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं.

राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की उपस्थिति
पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी. पूर्व गृहमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई अन्य नेता. इन सभी ने यहां आकर लंगोट अर्पण किया और राज्य में अमन-चैन व समृद्धि की कामना की.

सांप्रदायिक सौहार्द और मांगलिक कार्यों का पवित्र स्थल
बाबा मणिराम अखाड़ा को सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है. यहां हर वर्ष सैकड़ों शादियां, मुंडन और अन्य शुभ कार्य संपन्न होते हैं. मान्यता है कि बाबा की कृपा से यहां हर कार्य बिना किसी विघ्न के संपन्न होता है.

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