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This Article is From Oct 06, 2015

प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां बिहार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती

प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां बिहार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो
पटना: पहले भागलपुर और फिर बांका, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां बिहार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं। अब वो पहले दौर में कुछ और रैलियां करना चाहते हैं। इस ख़बर को लेकर एसपीजी और बिहार पुलिस में तनातनी चल रही है।

रैलियों को लेकर एसपीजी और बिहार पुलिस में तनातनी
एनडीटीवी इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक 8 अक्टूबर को मुंगेर, बेगुसराय, समस्तीपुर और नवादा में प्रधानमंत्री की रैलियों की बात है। जबकि नौ अक्टूबर को सासाराम, मखदुमपुर और अरवल में वो रैली करना चाहते हैं। एसपीजी ने इस बात की सूचना राज्य पुलिस को दी है। अब बंदोबस्त को लेकर दोनों में कहासुनी हो रही है। बिहार पुलिस का कहना है कि एसपीजी हमेशा उन्हें अंत में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की खबर देती है या फिर अचानक उनका कार्यक्रम बदल देती है जिसकी वजह से इंतजाम में दिक्कत आती है।

पहले चरण पर अटकी बीजेपी की किस्मत
दरअसल माना जा रहा है कि पहले दौर की 49 सीटें काफी अहम हैं, जो यहां बढ़त हासिल करेगा, उसे आख़िर तक फ़ायदा होगा। जबकि खुद बीजेपी के अंदरूनी सर्वे बता रहे हैं कि पहले चरण में उसके लिए समीकरण सही नहीं बैठ पा रहे हैं। बिहार बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव का कहना है, 'प्रधानमंत्री का कार्यक्रम तय था, उसीके मुताबिक वो रैली कर रहे हैं। अच्‍छा है वो जितना ज्यादा जनता से मिलें।'   

गठबंधन में टकराव
इसके अलावा पहले दौर में कई जगहों पर गठबंधन में टकराव भी है। बीजेपी उम्मीद कर रही है कि प्रधानमंत्री की रैली से उसे मदद मिलेगी। लेकिन अंत में प्रधानमंत्री बिहार में जितनी भी रैली करें लेकिन बात उमीदवार को लेकर और बीजेपी की रणनीति को लेकर अटकती है। ऐसे में जमीनी स्तर पर अगर पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नीति न हो तो प्रधानमंत्री की रैलियां काम नहीं आएंगी।

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