कर्नाटक में कंबला पर प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया.
- राजभवन की तरफ जाने की कोशिश कर रहे आंदोलनकारी गिरफ्तार
- तटीय ग्रामीण इलाकों में भैंसों की दौड़ सदियों से लोकप्रिय
- मामले में 30 जनवरी को कर्नाटक हाई कोर्ट में होगी सुनवाई
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कर्नाटक में जानवरों के खेल 'कंबला' पर प्रतिबंध समाप्त करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. बुधवार को राजभवन की तरफ जाने की कोशिश कर रहे कन्नड़ संगठनों के नेता वाटल नागराज सहित तकरीबन एक दर्जन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी इसके पक्ष में रैली निकाली.
कर्नाटक के तटीय ग्रामीण इलाकों में खासकर मंगलौर उडिपी में भैंसों की दौड़ सदियों से लोकप्रिय रही है. इसे 'कंबला' कहते हैं. जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद 2014 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कंबला पर भी पाबंदी लगा दी थी. पशु संरक्षण करने वाले संगठनों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया था. 
कंबला में ताकतवर भैंसों को सजा-संवारकर दौड़ाया जाता है. यह खेल दिसंबर से मार्च-अप्रैल तक चलता है. इसका विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि बैलों को तेज भगाने के लिए चाबुक मारी जाती है जो कि जानवरों पर अत्याचार है. 
इस मामले में 30 जनवरी को कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई है. ऐसा माना जा रहा है कि इस पर फैसला भी आ सकता है. इस सुनवाई को देखते हुए राज्य के कानून मंत्री टीबी जयचंद्रा ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि वे कंबला का समर्थन करते हैं और यह होगा. 
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक अगर राज्य सरकार तमिलनाडु की ही तरह अध्यदेश लाए या बिल तैयार करे तो केंद्र सरकार इसका समर्थन करेगी क्योंकि सरकार परंपराओं की हिफाजत की हमेशा पक्षधर रही है.
कर्नाटक के तटीय ग्रामीण इलाकों में खासकर मंगलौर उडिपी में भैंसों की दौड़ सदियों से लोकप्रिय रही है. इसे 'कंबला' कहते हैं. जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद 2014 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कंबला पर भी पाबंदी लगा दी थी. पशु संरक्षण करने वाले संगठनों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया था.

कंबला में ताकतवर भैंसों को सजा-संवारकर दौड़ाया जाता है. यह खेल दिसंबर से मार्च-अप्रैल तक चलता है. इसका विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि बैलों को तेज भगाने के लिए चाबुक मारी जाती है जो कि जानवरों पर अत्याचार है.

इस मामले में 30 जनवरी को कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई है. ऐसा माना जा रहा है कि इस पर फैसला भी आ सकता है. इस सुनवाई को देखते हुए राज्य के कानून मंत्री टीबी जयचंद्रा ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि वे कंबला का समर्थन करते हैं और यह होगा.

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक अगर राज्य सरकार तमिलनाडु की ही तरह अध्यदेश लाए या बिल तैयार करे तो केंद्र सरकार इसका समर्थन करेगी क्योंकि सरकार परंपराओं की हिफाजत की हमेशा पक्षधर रही है.
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