विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नई गाइडलाइन्स को लेकर देशभर में सवर्ण समाज ने जमकर विरोध किया. अब सरकार के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) एक नया बवाल बनकर सामने आ रहा है. देशभर के टीचर्स TET के मामले में लामबंद होकर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं. आज दिल्ली में देशभर के टीचर्स इकट्ठे होकर विरोध करने जा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है. इस जुलूस के जरिए टीचर्स अपना विरोध जताने वाले हैं. आखिर ये पूरा मामला क्या है और क्यों देश के टीचर्स विरोध कर रहे हैं, आइए जानते हैं विस्तार से...
टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टैट) का नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर साल 2011 में लागू हुआ था. इस आदेश में कहा गया था कि प्राइमरी और जूनियर स्कूल्स में पढ़ाने के लिए टीचर्स को ये एलिजिबिलिटी टेस्ट पास करना जरूरी है. साल 2011 के बाद टीचर भर्ती में टैट पास करने को अनिवार्य कर दिया गया. अब नए आदेश में टैट की अनिवार्यता उन टीचर्स पर भी लागू कर दी गई है जिनकी जॉइनिंग साल 2011 से पहले हुई थी.
- शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता को लेकर आज दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा.
- ये विरोध प्रदर्शन दिल्ली के रामलीला मैदान में किया जाएगा.
- कई राज्यों के प्राइमरी टीचर टैट अनिवार्यता को लेकर नाराज हैं.
- इस नए नियम से पूरे देश के 20 लाख शिक्षक प्रभावित होने वाले हैं.
- 13 राज्यों के शिक्षक 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान पर विरोध प्रदर्शन करेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में क्या-क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश में कहा गया है कि देश भर में जितने भी टीचर्स प्राइमरी और जूनियर स्कूल्स में पढ़ा रहे हैं, उनको टैट पास करना अनिवार्य होगा. साल 2011 के बाद वाले तो पहले ही ये परीक्षा पास कर चुके हैं. ऐसे में ये परीक्षा अब 2011 से पहले वालों पर लागू कर दी गई है. इसमें कहा गया है कि जो टीचर्स 57 साल के हो गए हैं और उनका रिटायरमेंट 5 साल बचा है, उन्हें ये टेस्ट पास करने की जरूरत तभी पड़ेगी, जब उन्हें प्रमोशन लेना हो.
फेल होने पर क्या होगा?
टैट पास करने को लेकर नए आदेश में कहा गया है कि 2011 से पहले जॉइनिंग करने वाले टीचर्स दो साल के भीतर ये परीक्षा पास करें. अगर ऐसा नहीं किया तो उन्हें कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया जाएगा. ऐसे में 15 साल टीचिंग कर चुके टीचर्स को अब टैट की तैयारी कर परीक्षा देनी होगी. पास हुए तो नौकरी चलती रहेगी, लेकिन अगर फेल हो गए तो उनको नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा. टीचर्स इसी का विरोध कर रहे हैं.
20 से 25 लाख शिक्षकों को पड़ेगा असर
नए नियम से टीचर्स खासा नाराज हैं. उनका कहना है कि 15 साल नौकरी करने के बाद अब उन्हें परीक्षा पास करने को कहा जा रहा है. उनका तर्क है कि जैसे नीट, यूपीएससी या जूडिशीएरी की परीक्षा पास करके 15 साल की नौकरी के बाद दोबारा कोई नीट, यूपीएससी या ज्यूडिशियरी की पास कर पायेगा? ऐसे ही 15 साल या उससे अधिक समय तक नौकरी करने के बाद उनके लिए परीक्षा पास करना मुश्किल है. टीचर्स का दावा है कि इस नए नियम से कम से कम 20-25 लाख टीचर्स प्रभावित होंगे.
दिल्ली में होगा बड़ा प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में प्राथमिक शिक्षक अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन करेंगे. जिले के करीब 1500 शिक्षक दिल्ली आकर प्रदर्शन में भाग लेने वाले है.
टैट की परीक्षा की अनिवार्यता का नियम भले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागू किया गया हो लेकिन टीचर्स सरकार पर दबाव बना रहे हैं. शिक्षक संसाधनों का आरोप है कि सरकार की तरफ से कोर्ट में इसके विरोध में मजबूत पैरवी नहीं की गई. साथ ही 20 से 25 लाख टीचर्स के विरोध का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है. अगर कंपलसरी रिटायरमेंट किया गया तो ये विरोध और बड़ा रूप लेकर यूजीसी की नई गाइडलाइन जैसा बवाल करा सकता है.
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