भारत और यूके के बीच CETA समझौता 15 जुलाई को आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है. हालांकि इस डील में आने-वाले प्रोडक्ट्स को लेकर चर्चा हो रही है. जहां एक ओर गाड़ी, व्हिस्की, वाइन, ब्यूटी प्रोडक्टस को इस डील के दायरे में लाया गया है. वहीं किसान और पशुपालकों के प्रोडक्ट्स को भारत-यूके ट्रेड डील से बाहर रखा गया है. ऐसा करने से लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गरम हो गया है. हालांकि इस बारे में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने खुलकर बात की और उन्होंने बताया कि इस ट्रेड डील से किसान और पशुपालकों को कैसे ज्यादा फायदे में रखा गया है.
किसानों और पशुपालकों को क्या हुआ फायदा
राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत ने संवेदनशील सेक्टर में कोई छूट नहीं दी है. उन्होंने कहा, हमने डेयरी सेक्टर, Cereals, कई तरह की सब्जियां और Edible Oils को इस समझौते में शामिल नहीं किया है, इन पर कोई छूट नहीं दी गई है. ऐसा इसलिए की यह किसानों और पशुपालकों के हित में है. यह उनकी सुरक्षा के लिए किया गया है. क्योंकि इससे किसानों और पशुपालकों के सामने किसी तरह की बाहरी प्रतिस्पर्धा नहीं रहेगी. जबकि भारतीय किसानों के प्रोडक्ट्स ब्रिटिश बाजार में आसानी से पहुंच सकेगी.
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यूके से समझौते के बाद भारत से निर्यात होने वाली 99 प्रतिशत सामानों पर ड्यूटी को खत्म कर दिया गया है. इससे किसानों को ब्रिटेन के बड़े कृषि आयात बाजार तक सीधी पहुंच मिल गई है.
भारत के मुख्य मसालों के साथ चाय-कॉफी, समुद्री उत्पाद और बासमती चावल को ब्रिटिश बाजार में बिना टैक्स की एंट्री मिलेगी. यानी भारतीय किसानों को अपनी उपज की वैश्वक स्तर पर प्रीमियम कीमत मिल सकेगी. इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग मजबूत होगी.
डील में पशुपालकों के लिए सुरक्षा कवच
यूके डील में भारत के पशुपालकों और छोटे किसानों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह से सुरक्षित रखा है. ब्रिटेन से आने वाले डेयरी प्रोडक्ट को भारत में टैक्स रियायत नहीं दी गई है. ऐसा इसलिए की अगर ब्रिटेन के डेयरी भारत में बिना टैक्स के आते तो देश के छोटे करोड़ों छोटे पशुपालकों को भारी नुकसान हो सकता था. उनके लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती. वहीं इसी तरह भेड़ के मांस को छोड़कर सभी प्रकार के मीट और पोल्ट्री प्रोडक्ट्स को भी संरक्षण दिया गया है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें न गिरे.
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