Fuel Additives Reality: देशभर के पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल युक्त E20 पेट्रोल की सप्लाई के साथ ही माइलेज कम होने की शिकायतें लगातार आ रही है. इसके साथ ही बाजार में माइलेज बढ़ाने के ना पर फ्यूल ऐडऑन (Fuel Additives) बेचने वाली कंपनियां सक्रिय हो गई है. ये कंपनियां ये दावा कर रही है कि इसके इस्तेमाल से माइलेज की कमी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि क्या वाकई कोई लिक्विड आपकी गाड़ी का माइलेज बढ़ा सकता है?
दरअसल, भारत में पेट्रोल में 20% इथेनॉल वाले E20 Fuel तेल की सप्लाई के बाद से गाड़ियों के माइलेज में 3% से 5% तक की गिरावट देखने में आ रही है. इसी वजह से ऐसे प्रोडक्ट्स की मांग और उनके चमत्कारी दावों की अचानक बाढ़ आ गई है. सोशल मीडिया और बाजार में कई ऐसे फ्यूल ऐडऑन (Fuel Additives) के विज्ञापन देखने को मिल रहे हैं, जो दावा करते हैं कि इन्हें ईंधन टैंक में मिलाने से माइलेज की कमी पूरी तरह खत्म हो जाएगी, लेकिन वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से देखा जाए, तो किसी भी ऐडऑन को मिलाने से माइलेज में कोई चमत्कारी बदलाव नहीं होता. ऑटो एक्सपर्ट विक्रम गौड़ का भी यही मानना है. आइए जानते हैं इन फ्यूल ऐडऑन का असली सच और वैज्ञानिक हकीकत क्या है.
ऐडऑन का असली सच
- कोई भी लिक्विड या एडिटिव आपकी गाड़ी के इंजन की मूल क्षमता (Factorydesigned efficiency) को नहीं बदल सकता. अगर आपकी गाड़ी की अधिकतम क्षमता ही 15 किमी/लीटर की है, तो कोई भी ऐडऑन उसे 20 या 25 किमी/लीटर नहीं बना सकता.
- जब गाड़ी पुरानी होती है, तो इंजन में कार्बन जमने से उसका माइलेज घटने लगता है. ऐडऑन डालने पर जब वह कार्बन साफ हो जाता है, तो गाड़ी का घटा हुआ माइलेज वापस अपने पुराने स्तर पर आ जाता है. लोग इसी को 'माइलेज का बढ़ना' समझ लेते हैं.
- आधुनिक और भरोसेमंद एडिटिव्स इंजन के नाजुक हिस्सों को इथेनॉल से होने वाले जंग और नमी से बचाते हैं, जो E20 पेट्रोल के दौर में इंजन की लंबी उम्र के लिए काफी फायदेमंद है.
कंपनियों के दावे और ज़मीनी हकीकत
बाजार में बिकने वाले कई प्रोडक्ट्स ग्राहकों को लुभाने के लिए बड़ेबड़े दावे करते हैं, जिनकी हकीकत कुछ और ही होती है. इसी तरह का खेल फ्यूल ऐडऑन के मामले में भी देखा जा रहा है. फ्यूल ऐडऑन बेचने वाल का दावा है कि इससे माइलेज 20% से 40% तक तुरंत बढ़ जाएगा, लेकिन हकीकत ये है कि केवल 3% से 5% का मामूली सुधार संभव है, वह भी तब, जब इंजन अंदर से बहुत गंदा हो.
इसके अलावा कंपनिया दावा कर रही है कि इसे डालते ही पहली बार में ही असर दिखेगा. हालांकि, इसका असर तुरंत नहीं दिखता है, बल्कि 23 बार फुल टैंक फ्यूल इस्तेमाल करने के बाद धीरेधीरे दिखता है.
इसके अलावा यह भी दावा किया जा रहा है कि यह हर गाड़ी और हर सफर के लिए यह बेहद ज़रूरी है, लेकिन सच्चाई ये है कि नई गाड़ियों या प्रीमियम पेट्रोल जैसे XP95 इस्तेमाल करने वालों को इसकी कोई जरूरत नहीं होती है.
ऐडऑन का इस्तेमाल कब करना चाहिए?
अगर आप फ्यूल एडिटिव का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो ये हमेशा उपयोगी साबित नहीं हो सकता है. अगर आपकी गाड़ी काफी पुरानी है, या 30,000 से 40,000 किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी है. गाड़ी चलाते समय अचानक झटके महसूस हो रहे हों या पिकअप में कमी आ गई हो, तब इसका इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है. बिना सोचे समझे फ्यूल ऐडऑन मिले से कई नुकसान भी हो सकता है. लोकल ब्रांड्स के चमत्कारी दावा करने वाले लिक्विड्स का अस्तेमाल भूलकर भी न करें, क्योंकि इनमें अक्सर एसीटोन (Acetone) जैसे हानिकारक केमिकल होते हैं, जो इंजन के रबर पार्ट्स और पाइपलाइन को पूरी तरह गला सकते हैं. हमेशा आधिकारिक पेट्रोल पंपों या प्रमाणित डीलर्स से ही भरोसेमंद एडिटिव्स खरीदें.
ऑटो एक्सपर्ट का मानना है कि बाजार में उपलब्ध कोई भी फ्यूल एडिटिव माइलेज में होने वाली भारी कमी को रातोंरात जादू से ठीक नहीं कर सकता. यदि इंजन के वाल्व और इंजेक्टर बहुत गंदे हैं, तो यह सफाई करके परफॉर्मेंस को थोड़ा बेहतर जरूर बना सकता है, लेकिन इसे माइलेज बढ़ाने का कोई स्थायी या चमत्कारी शॉर्टकट नहीं माना जा सकता.
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