दुनिया के सबसे बड़े ऑटो बाजार चीन में 43 लाख गाड़ियों के बड़े रिकॉल ने एक अहम सेफ्टी सवाल खड़ा कर दिया है. Tesla, Xiaomi समेत दूसरे ब्रांड्स की गाड़ियों को भी चीन में रिकॉल कर लिया गया है. ऐसे में आम आदमी के मन में यही सवाल आता है कि अगर किसी गंभीर क्रैश के दौरान कार की पूरी इलेक्ट्रिकल पावर चली जाए तो इन हाईटेक डोर का क्या होगा? तो चलिए समझते हैं, इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक कैसे काम करते हैं और पावर फेल होने की स्थिति में क्या होगा.
साल 2027 से नया नियम

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अगस्त में चीन के मार्केट रेगुलेशन ने देश के इतिहास में सबसे बड़े ऑटोमोबाइल रिकॉल की घोषणा की. Tesla, Xiaomi, Geely, XPeng और Leapmotor समेत नौ ऑटो कंपनियों ने 43 लाख से ज्यादा गाड़ियों को रिकॉल किया है. इन गाड़ियों में डोर हैंडल और इमरजेंसी डोर खोलने वाली व्यवस्था से जुड़े सेफ्टी सवाल सामने आए हैं.
कंपनियों को मैनुअल डोर खोलने वाली जगह के पास साफ वार्निंग लेबल और क्रैश के दौरान खिड़कियां अपने आप नीचे करने के लिए ओवर-द-एयर सॉफ्टवेयर अपडेट देने के लिए कहा गया है. नए नियम के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से नई गाड़ियों में अंदर और बाहर दोनों तरफ मैकेनिकल इमरजेंसी डोर रिलीज जरूरी होगी.
दरअसल इस रिकॉल का फैसला तब लिया गया जब स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर मार्केट रेगुलेशन (SAMR) ने कहा कि ऐसे बाहरी इलेक्ट्रॉनिक डोर हैंडल पर रोक लगाई जाए, जिनमें ट्रेडिशनल मैकेनिकल तरीके से डोर खोलने की व्यवस्था नहीं है.
पावर जाने पर EV के डोर क्यों हो सकते हैं फेल?
किसी इलेक्ट्रिक कार का डोर क्रैश के बाद क्यों नहीं खुल सकता, इसे समझने के लिए कार में मौजूद हाई-वोल्टेज और लो-वोल्टेज सिस्टम को अलग-अलग समझना जरूरी है.
हाई-वोल्टेज बैटरी: आमतौर पर 300V से 800V तक की ट्रैक्शन बैटरी इलेक्ट्रिक मोटर और गाड़ी को चलाने वाले मेन सिस्टम को पावर देती है. क्रैश में इसके डैमेज होने पर हाई-वोल्टेज करंट का खतरा रहता है.
लो-वोल्टेज सिस्टम: 12V या 48V का सिस्टम कार के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट, टचस्क्रीन, लाइट और इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक जैसे सिस्टम को पावर देता है.
इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक कैसे काम करता है?

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पुरानी कारों में आउटर डोर हैंडल या अंदर का लीवर एक मैकेनिकल केबल के जरिए सीधे डोर लॉक से जुड़ा होता था. लेकिन कई मॉडर्न EV में इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक इस्तेमाल होते हैं. जब ड्राइवर डोर खोलने वाला बटन दबाता है या इलेक्ट्रॉनिक डोर हैंडल को छूता है, तो इलेक्ट्रिकल सिग्नल एक एक्ट्यूएटर तक जाता है. यह एक्ट्यूएटर 12V या 48V लो-वोल्टेज बैटरी से पावर लेता है और डोर ओपन करता है. लेकिन, गंभीर क्रैश के दौरान इस सिस्टम के कई हिस्से खराब हो सकते हैं.
- 12V बैटरी का कनेक्शन टूटना: कार के अगले हिस्से या फ्रंक को नुकसान पहुंचने से 12V बैटरी का कनेक्शन टूट सकता है.
- हाई-वोल्टेज बैटरी का सुरक्षा सिस्टम एक्टिव होना: क्रैश के बाद कार का सुरक्षा सिस्टम प्राइमरी बैटरी को तुरंत अलग कर सकता है ताकि करंट से किसी को खतरा न हो. इसका असर लो-वोल्टेज सिस्टम पर भी पड़ सकता है.
- कंट्रोल यूनिट खराब होना: पानी, जोरदार टक्कर या आग की वजह से डोर खोलने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट खराब हो सकते हैं.
छिपे हुए मैनुअल डोर रिलीज की दिक्कत
इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक में पावर जाने का खतरा होने के कारण कंपनियों को मैनुअल मैकेनिकल रिलीज देना पड़ता है. लेकिन Tesla जैसी कंपनियों से शुरू हुआ साफ-सुथरा और मिनिमल डिजाइन अब कई EV में दिखाई देता है. इसी वजह से मैनुअल डोर रिलीज अक्सर ऐसी जगह छिपा होता है जहां उसे इमरजेंसी में ढूंढना आसान नहीं होता है.

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आगे की सीटों में यह फ्लोर के पास, डोर स्टोरेज पॉकेट के अंदर या ऐसे लीवर के रूप में हो सकता है जो देखने में किसी दूसरे कंट्रोल जैसा लगता है.
पीछे की सीटों पर कुछ गाड़ियों में इमरजेंसी रिलीज तक पहुंचने के लिए छोटे प्लास्टिक कवर हटाने पड़ सकते हैं या सीट के नीचे छिपी केबल को खींचना पड़ सकता है. अंधेरे, धुएं और घबराहट की स्थिति में बच्चों, बुजुर्गों या यात्रियों के लिए ऐसा करना बेहद मुश्किल हो सकता है. चीन के इस कदम के पीछे कई गंभीर हादसे और अलग-अलग देशों में सामने आए कानूनी मामले भी हैं, जिनमें डोर हैंडल और डोर खोलने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे.
Xiaomi SU7 को लेकर भी हो चुका है विवाद
2025 में चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी Xiaomi की पहली इलेक्ट्रिक कार SU7 से जुड़े कुछ गंभीर हादसों के बाद कंपनी को आलोचना का सामना करना पड़ा. टोंगलिंग शहर में हाईवे पर हुए एक हादसे में कार के दुर्घटनाग्रस्त होने और आग लगने के बाद तीन लोगों की मौत हो गई थी. बाहर मौजूद लोगों और मृतकों के परिजनों ने कहा कि इलेक्ट्रिकल सिस्टम बंद होने के बाद कार के बाहर लगे फ्लश डोर हैंडल अंदर ही रह गए और बाहर से डोर खोलना मुश्किल हो गया. Xiaomi ने बताया था कि कार के अंदर मैनुअल डोर रिलीज मौजूद थे. हालांकि, इस घटना ने ये सवाल जरूर खड़ा किया कि पावर पूरी तरह खत्म होने पर बाहर से बचाव करना कितना मुश्किल हो सकता है.
Tesla पर मुकदमे और NHTSA की जांच
Tesla को भी पश्चिमी देशों में इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. 2024 में हुए एक गंभीर Cybertruck हादसे में बचने वाले एक व्यक्ति ने Tesla के खिलाफ मुकदमा दायर किया. इसमें आरोप लगाया गया कि टक्कर के बाद इलेक्ट्रॉनिक डोर बटन ने काम नहीं किया और यात्रियों को जलती हुई कार के अंदर फंसने की स्थिति का सामना करना पड़ा. अमेरिका में Model 3 गाड़ियों में इमरजेंसी डोर रिलीज को लेकर जांच की मांग वाली शिकायतें पहुंची हैं. कुछ माता-पिता ने 12V बैटरी अचानक खत्म होने के बाद बच्चों तक पहुंचने में परेशानी की बात कही.
राहत और बचाव दल के सामने भी बड़ी परेशानी
आमतौर पर कार में फंसे लोगों की सुरक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है. लेकिन फायर सेफ्टी एक्सपर्ट्स और राहत-बचाव दल के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक और छिपे हुए डोर हैंडल बाहर से बचाव करने वालों के लिए भी बड़ी परेशानी बन सकते हैं. जब किसी जलती हुई EV के हादसे की जगह पर राहत और बचाव दल पहुंचता है, तो हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है. लिथियम-आयन बैटरी में आग तेजी से फैल सकती है और तापमान बहुत ज्यादा बढ़ सकता है.

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अगर डोर हैंडल को बाहर आने के लिए लो-वोल्टेज पावर चाहिए और पावर कट हो जाए, तो वह कार की बॉडी में ही अंदर रह सकता है. ऐसे में बचाव दल के लिए उसे पकड़कर डोर खोलना मुश्किल हो जाता है. अगर डोर केवल टच या अंदर के इलेक्ट्रॉनिक बटन से खुलता है, तो बाहर से बचाव करने वालों के पास डोर खोलने का आसान तरीका नहीं रहता. ऐसे में उन्हें हैवी हाइड्रोलिक डिवाइस का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. डैमेज EV बैटरी को राहत दल हाई-वोल्टेज खतरे के रूप में देखते हैं. इसके साथ जहरीली गैस और बैटरी में तेजी से आग फैलने का खतरा भी रहता है. मॉडर्न EV में आवाज कम करने के लिए कई बार साइड विंडो में लेमिनेटेड ग्लास का इस्तेमाल होता है. यह रेगुलर टेम्पर्ड ग्लास की तरह आसानी से छोटे टुकड़ों में नहीं टूटता. इस वजह से इमरजेंसी में खिड़की तोड़कर अंदर पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है.
हमेशा डिजाइन के ऊपर सेफ्टी
EV के डोर हैंडल को लेकर चल रही बहस आधुनिक कार डिजाइन के एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है. कारों को ज्यादा एयरोडायनामिक और मिनिमल बनाने के चक्कर में कई जगह ट्रेडिशनल मैकेनिकल सेफ्टी व्यवस्था को हाईटेक सिस्टम से बदला गया है. लेकिन, इमरजेंसी में बाहर निकलने का तरीका आसान और भरोसेमंद होना चाहिए ताकि किसी भी हादसे में ज्यादा नुकसान हो.
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