भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा इन दिनों टखने की गंभीर चोट के कारण चर्चा में हैं. एंकल लिगामेंट फटने की वजह से उन्होंने एशियन गेम्स 2026 समेत इस साल के बाकी सभी बड़े टूर्नामेंट्स से नाम वापस ले लिया है. आज नीरज का नाम 90.23 मीटर के ऐतिहासिक थ्रो, ओलंपिक गोल्ड और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े रिकॉर्ड्स के साथ लिया जाता है, लेकिन उनके करियर की शुरुआत इतने बड़े आंकड़ों से नहीं हुई थी.
दरअसल, नीरज चोपड़ा ने अपने करियर का पहला राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जून 2012 में लखनऊ में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में जीता था. उस प्रतियोगिता में उन्होंने 68.40 मीटर का थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. आज जब नीरज 90 मीटर की बाधा पार कर इतिहास रच चुके हैं, तब उनके पहले राष्ट्रीय गोल्ड के दौरान दर्ज किया गया 68.40 मीटर का थ्रो कई फैंस को चौंका सकता है.
नीरज चोपड़ा के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
लखनऊ में मिली यह सफलता नीरज के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया और राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गए. हरियाणा के इस खिलाड़ी ने जूनियर स्तर से लेकर सीनियर स्तर तक कई रिकॉर्ड बनाए और भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई. एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय एथलेटिक्स टीम में नीरज चोपड़ा की जगह अब कॉमनवेल्थ गेम्स के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट यशवीर सिंह को रिप्लेसमेंट के तौर पर शामिल किया गया है.
2018... जब नीरज ने दुनिया को अपनी ताकत दिखाई
2018 नीरज के करियर का गोल्डन साल रहा. उन्होंने पहले गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीता. इसके बाद जकार्ता एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया. लगातार दो बड़े खिताब जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि अब वह सिर्फ उभरते खिलाड़ी नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े दावेदार हैं.
जब चोट ने रोक दिया कदम
2019 में उनकी दाईं कोहनी में गंभीर चोट लगी. सर्जरी करानी पड़ी और कई महीने मैदान से दूर रहना पड़ा. हर खिलाड़ी के करियर में ऐसा दौर आता है, जब वापसी आसान नहीं होती. नीरज के लिए भी यह सबसे मुश्किल समय था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. चोट से उबरने के बाद जनवरी 2020 में दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने 87.86 मीटर का थ्रो कर टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल किया.
टोक्यो ओलंपिक 7 अगस्त 2021 की वो तारीख
टोक्यो ओलंपिक के फाइनल में नीरज ने दूसरे प्रयास में 87.58 मीटर का थ्रो किया. यही थ्रो भारत के लिए इतिहास बन गया. एथलेटिक्स में देश का पहला ओलंपिक गोल्ड और व्यक्तिगत स्पर्धा में दूसरा स्वर्ण पदक. उस दिन सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं जीता था, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स की तस्वीर बदल गई थी.
टोक्यो ओलंपिक के बाद भी नीरज का सफर नहीं थमा. उन्होंने 2023 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीता. एशियन गेम्स में फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. पेरिस ओलंपिक 2024 में सिल्वर मेडल जीतकर लगातार दूसरे ओलंपिक में पोडियम पर पहुंचे. इसके बाद दोहा डायमंड लीग 2025 में पहली बार 90 मीटर का आंकड़ा पार करते हुए 90.23 मीटर का थ्रो किया. यह उनके करियर का सबसे लंबा थ्रो भी है.
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