Aaj Ka Panchang 4 July 2026: हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है. कोई भी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग का अध्ययन किया जाता है. पंचांग हिंदू कालगणना पद्धति पर आधारित होता है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थितियों का विश्लेषण किया जाता है.
तिथि और संकष्टी चतुर्थी का महत्व
4 जुलाई 2026 (शनिवार) को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 12:40 बजे तक रहेगी. इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी. इस दिन संकष्टी चतुर्थी व्रत का समापन भी दोपहर 12:40 बजे होगा. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल
शनिवार को अमृत काल नहीं रहेगा. वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:13 बजे से 5:01 बजे तक रहेगा. यह समय पूजा, ध्यान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:49 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा. चंद्रोदय रात 10:20 बजे होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन सुबह 10:13 बजे रहेगा.
नक्षत्र और ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार 4 जुलाई 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेंगे, जिसके स्वामी राहु हैं. वहीं चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में संचरण करेंगे.
योग का प्रभाव
इस दिन हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा. प्रीति योग शाम 5:02 बजे तक रहेगा. ज्योतिष में प्रीति योग को शुभ कार्यों और सकारात्मक परिणामों के लिए अनुकूल माना जाता है.
अभिजित मुहूर्त का समय
शनिवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा. इसे दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है. इस अवधि में बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापारिक गतिविधियों की शुरुआत की जा सकती है.
राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
राहुकाल सुबह 9:00 बजे से 10:30 बजे तक रहेगा. गुलिक काल सुबह 5:49 बजे से 7:30 बजे तक रहेगा. वहीं यमगंड दोपहर 2:10 बजे से 3:55 बजे तक रहेगा. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए.
राशियों में सूर्य और चंद्रमा का गोचर
4 जुलाई 2026 को सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में गोचर करेंगे. इन ग्रह स्थितियों का विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है.
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी
4 जुलाई 2026 (शनिवार) को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए. यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो शुभ उपाय अपनाकर यात्रा प्रारंभ करना लाभकारी माना जाता है.
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