- जन धन खाते खुलवाना, इनकम डिस्क्लोजर स्कीम इस फैसले से पहले की तैयारी थी
- पीएम ने वड़ोदरा में कार्यक्रम के दौरान भनक दी थी कि वो कुछ बड़ा करेंगे
- 'RBI गवर्नर, गिने-चुने अफसर और कुछ नेताओं को ही मामूली जानकारी थी'
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अहमदाबाद:
मंगलवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश के सामने घोषणा की कि 500 और 1000 रुपये के नोटों को बाजार से हटा लिया जाएगा, तब सभी को अचानक झटका लगा. लेकिन इसकी तैयारी पीएम मोदी मोदी महीनों से कर रहे थे. प्रधानमंत्री के करीबियों का कहना है कि जन धन योजना में खाते खुलवाना और इनकम डिस्क्लोजर स्कीम में खुलासे करवाना इस योजना से पहले की तैयारी थी.
इस फैसले में आरबीआई गवर्नर के अलावा गिने-चुने अफसर और नेता ही कुछ जानकारी रखते थे. पीएम मोदी ने कुछ वक्त पहले ऐसे किसी फैसले का इशारा भी किया था. उन्होंने हाल ही में वड़ोदरा के अपने कार्यक्रम के दौरान इसकी भनक भी दी थी कि वो कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा था कि जन धन खाते खुलवाकर करीब 35 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार रोका गया और काले धन में से लाए 65,000 करोड़ मिलाकर देखें तो यह एक लाख करोड़ रुपये बनता है... ये एक लाख करोड़ तो हम बिना किसी आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक के ही ले आए, जब सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे, तब देखिएगा कि क्या-क्या निकलता है. उनका इशारा साफ था.
बहरहाल पीएम मोदी के इस फैसले को काले धन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई एसआईटी के अध्यक्ष जस्टिस एमबी शाह ने साहसिक कदम बताया. उन्होंने अंदाजा जताते हुए कहा कि काला धन देश में समानांतर अर्थव्यवस्था बन चुकी थी और जितना सफेद धन था, उतना ही काला धन भी था (करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा).
उन्होंने आगे के लिए कुछ कदम भी सुझाए हैं, ताकि 2000 रुपये के नोट अर्थव्यवस्था में आने के बाद भी काला धन जमा न किया जा सके. जस्टिस शाह ने सरकार से सिफारिश की है कि 3 लाख से ज्यादा का लेनदेन सिर्फ चेक से ही होना चाहिए और किसी को 15 लाख से ज्यादा कैश रखने की इजाजत नहीं होनी चाहिए.
लोग इस कदम को भ्रष्टाचार के खिलाफ पीएम मोदी का बड़ा कदम मान रहे हैं, लेकिन साथ ही ये भी एहसास है कि आम जनता को भी कुछ समय परेशानी उठानी पड़ सकती है.
इस फैसले में आरबीआई गवर्नर के अलावा गिने-चुने अफसर और नेता ही कुछ जानकारी रखते थे. पीएम मोदी ने कुछ वक्त पहले ऐसे किसी फैसले का इशारा भी किया था. उन्होंने हाल ही में वड़ोदरा के अपने कार्यक्रम के दौरान इसकी भनक भी दी थी कि वो कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा था कि जन धन खाते खुलवाकर करीब 35 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार रोका गया और काले धन में से लाए 65,000 करोड़ मिलाकर देखें तो यह एक लाख करोड़ रुपये बनता है... ये एक लाख करोड़ तो हम बिना किसी आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक के ही ले आए, जब सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे, तब देखिएगा कि क्या-क्या निकलता है. उनका इशारा साफ था.
बहरहाल पीएम मोदी के इस फैसले को काले धन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई एसआईटी के अध्यक्ष जस्टिस एमबी शाह ने साहसिक कदम बताया. उन्होंने अंदाजा जताते हुए कहा कि काला धन देश में समानांतर अर्थव्यवस्था बन चुकी थी और जितना सफेद धन था, उतना ही काला धन भी था (करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा).
उन्होंने आगे के लिए कुछ कदम भी सुझाए हैं, ताकि 2000 रुपये के नोट अर्थव्यवस्था में आने के बाद भी काला धन जमा न किया जा सके. जस्टिस शाह ने सरकार से सिफारिश की है कि 3 लाख से ज्यादा का लेनदेन सिर्फ चेक से ही होना चाहिए और किसी को 15 लाख से ज्यादा कैश रखने की इजाजत नहीं होनी चाहिए.
लोग इस कदम को भ्रष्टाचार के खिलाफ पीएम मोदी का बड़ा कदम मान रहे हैं, लेकिन साथ ही ये भी एहसास है कि आम जनता को भी कुछ समय परेशानी उठानी पड़ सकती है.
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