अहमदाबाद:
आरएसएस से जुड़े भारतीय शिक्षा मंडल का शिक्षा व्यवस्था के भारतीयकरण का विचार आमलोगों को लुभा नहीं पा रहा। इसके लिए गुजरात का शिक्षा विभाग खुद आगे बढ़कर सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों को सैकड़ों चिट्ठियां लिख चुका है पर लोग शामिल नहीं हो रहे। मंगलवार को भारतीय शिक्षा मंडल के कार्यक्रम में मुश्किल से आधा दर्जन लोग ही आ पाये। अपनी चिट्ठियों पर शिक्षा विभाग चुप है लेकिन आयोजकों को इसमें कुछ गलत नहीं लग रहा।
भारतीय शिक्षा मंडल के सहसंगठन मंत्री मुकुल कानितकर का कहना है कि डीइओ ने हमारी मदद की, उनका काम उन्होंने किया, उनका कर्तव्य उन्होंने किया, उन्होंने किसी को कम्पल्सरी नहीं किया, किसी पर दबाव नहीं डाला, लेकिन सूचना लोगों तक पहुंचाने का काम किया... इंग्लीश स्पीकींग की क्लास चलती है उसकी भी सूचना वो पहुंचाते हैं।
पढ़ाए जाने वाले विषय भी चौंकानेवाले
यहां जो पढ़ाया गया वो भी चौंकानेवाला है। जैसे कि भीष्म पितामह महान थे लेकिन उन्होंने पांडवों का साथ न देकर कौरवों का साथ दिया इसलिए वो आदर के पात्र नहीं हैं। राजा भरत महान थे, लेकिन कैकेयी ने राम को वनवास भेजा तो भरत कैकेयी से नाराज़ हुए। किसी बेटे को अपनी मां से नाराज़ होने का अधिकार नहीं होना चाहिए। लेकिन आरएसएस की विचारधारा से जुड़ी संस्था के लिए सरकारी विभाग के चिट्ठी लिखने पर विवाद छिड़ गया है और सरकार पर शिक्षा के भगवाकरण के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप, नागपुर एजेंडा थोप रही बीजेपी सरकार
कांग्रेस का आरोप है कि राज्य की भाजपा सरकार आपनी सोची समझी साजिश के मुताबिक अपना नागपुर एजेंडा - शिक्षा में भगवाकरण का एजेंडा थोप रही है। कई शिक्षाविद भी इसके खिलाफ हैं। उनका कहना है कि कोई स्वतंत्र संगठन इस तरह का कार्यक्रम करे तो कोई बात नहीं लेकिन जब सरकार के विभाग इसमें जुड़ते हैं तो इसे एक धमकी की तरह देखा जाना चाहिए कि अगर आप इन कार्यक्रमों में शिरकत नहीं करेंगे तो आपको परेशानी हो सकती है। सरकारी विभाग को इन सबसे दूर रहना चाहिए।
भारतीय शिक्षा मंडल के सहसंगठन मंत्री मुकुल कानितकर का कहना है कि डीइओ ने हमारी मदद की, उनका काम उन्होंने किया, उनका कर्तव्य उन्होंने किया, उन्होंने किसी को कम्पल्सरी नहीं किया, किसी पर दबाव नहीं डाला, लेकिन सूचना लोगों तक पहुंचाने का काम किया... इंग्लीश स्पीकींग की क्लास चलती है उसकी भी सूचना वो पहुंचाते हैं।
पढ़ाए जाने वाले विषय भी चौंकानेवाले
यहां जो पढ़ाया गया वो भी चौंकानेवाला है। जैसे कि भीष्म पितामह महान थे लेकिन उन्होंने पांडवों का साथ न देकर कौरवों का साथ दिया इसलिए वो आदर के पात्र नहीं हैं। राजा भरत महान थे, लेकिन कैकेयी ने राम को वनवास भेजा तो भरत कैकेयी से नाराज़ हुए। किसी बेटे को अपनी मां से नाराज़ होने का अधिकार नहीं होना चाहिए। लेकिन आरएसएस की विचारधारा से जुड़ी संस्था के लिए सरकारी विभाग के चिट्ठी लिखने पर विवाद छिड़ गया है और सरकार पर शिक्षा के भगवाकरण के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप, नागपुर एजेंडा थोप रही बीजेपी सरकार
कांग्रेस का आरोप है कि राज्य की भाजपा सरकार आपनी सोची समझी साजिश के मुताबिक अपना नागपुर एजेंडा - शिक्षा में भगवाकरण का एजेंडा थोप रही है। कई शिक्षाविद भी इसके खिलाफ हैं। उनका कहना है कि कोई स्वतंत्र संगठन इस तरह का कार्यक्रम करे तो कोई बात नहीं लेकिन जब सरकार के विभाग इसमें जुड़ते हैं तो इसे एक धमकी की तरह देखा जाना चाहिए कि अगर आप इन कार्यक्रमों में शिरकत नहीं करेंगे तो आपको परेशानी हो सकती है। सरकारी विभाग को इन सबसे दूर रहना चाहिए।
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