अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव शुरू हो गया.
- गुजरात में एक सप्ताह के महोत्सव में शिरकत कर रहे देश-विदेश के पतंगबाज
- कौतूहल पैदा कर रहीं विभिन्न किस्मों की पतंगें
- दिव्यांग भी पतंगों के जरिए आकाश में उड़ान भर रहे
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अहमदाबाद:
गुजरात में एक सप्ताह चलने वाला अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव शुरू हो गया है. पतंगों से आसमान रंगीन होने लगा है. देश के कई राज्यों और रूस, इंडोनेशिया, कनाडा, बेल्जियम सहित करीब दो दर्जन देशों के पतंगबाज इस उत्सव में शिरकत कर रहे हैं.
पतंगबाजी महोत्सव में जहां एक ओर पतंगबाज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं वहीं पतंगें भी विभिन्न किस्मों की हैं.
किसी की मेंढक के आकार की पतंग है तो कोई चक्करदार पतंग उड़ा रहा है. अजब-गजब पतंगें लोगों में कौतूहल पैदा कर रही हैं. जब हवा तेज होत है तो पतंगें उड़ती हैं और जब हवा की गति कम होती है तो पानी के गुब्बारे बनाकर उत्सव को रंगीन किया जा रहा है. हजारों लोग इस उत्सव का आनंद उठा रहे हैं.
बेल्जियम से आए रोजर स्टीवंस ने कहा कि वे दूसरी बार यहां आए हैं क्योंकि यहां के लोग बहुत अच्छे हैं. बेहद खूबसूरत वातावरण है और ऐसा देश है कि आने में मज़ा आता है. 
कनाडा से आए फ्रेड टेलर ने कहा कि वैसे उन्हें यहां की संस्कृति बहुत भाती है लेकिन यहां पतंगें उड़ाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहता है, क्योंकि हवा ज्यादा नहीं रहती. उन्होंने कहा कि ''लेकिन हम अलग-अलग तरह की पतंगें लाते हैं ताकि आसमान में कम हवा में भी कुछ उड़ाया जा सके.'' वे आज पानी के गुब्बारे भी बना रहे थे ताकि लोगों का मनोरंजन हो सके.
सिर्फ विदेशों से आए लोगों ने ही आज पतंगबाजी नहीं की बल्कि यहां आम लोगों की तरह दिव्यांगों ने भी पतंगों के जरिए आकाश में उड़ान भरी. उन्हें पांव न होने की कमी नहीं खली और उनके अंदर आनंद पतंगों के साथ हिलोरें लेता रहा. कुछ लोग व्हीलचेयर पर पतंगों की डोर लिए बैठे दिव्यांगों की व्हीलचेयर खींचकर दौड़ रहे थे ताकि उन्हें हवा मिले और उनकी पतंगें भी आसमान छू सकें.
दिव्यांग सोनल वसोया ने कहा कि - ''मैं बिलीव नहीं कर सकती थी पहले कि काइट्स हाथ में लेकर हवा में उड़ा पाऊंगी. लेकिन अभी मैं जब ग्राउंड में आती हूं तो मुझे कॉन्फिडेंस आ जाता है और मैं भूल भी जाती हूं कि मैं डिसेबल हूं. 
देश-विदेश से आए पतंगबाजों ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का जमकर मजा लिया. यह आनंद 14 जनवरी को अपने चरम पर पहुंचेगा जब इन पतंगबाजों के साथ पूरा अहमदाबाद अपनी छतों पर पतंग उड़ाएगा.
पतंगबाजी महोत्सव में जहां एक ओर पतंगबाज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं वहीं पतंगें भी विभिन्न किस्मों की हैं.
किसी की मेंढक के आकार की पतंग है तो कोई चक्करदार पतंग उड़ा रहा है. अजब-गजब पतंगें लोगों में कौतूहल पैदा कर रही हैं. जब हवा तेज होत है तो पतंगें उड़ती हैं और जब हवा की गति कम होती है तो पानी के गुब्बारे बनाकर उत्सव को रंगीन किया जा रहा है. हजारों लोग इस उत्सव का आनंद उठा रहे हैं.
बेल्जियम से आए रोजर स्टीवंस ने कहा कि वे दूसरी बार यहां आए हैं क्योंकि यहां के लोग बहुत अच्छे हैं. बेहद खूबसूरत वातावरण है और ऐसा देश है कि आने में मज़ा आता है.

कनाडा से आए फ्रेड टेलर ने कहा कि वैसे उन्हें यहां की संस्कृति बहुत भाती है लेकिन यहां पतंगें उड़ाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहता है, क्योंकि हवा ज्यादा नहीं रहती. उन्होंने कहा कि ''लेकिन हम अलग-अलग तरह की पतंगें लाते हैं ताकि आसमान में कम हवा में भी कुछ उड़ाया जा सके.'' वे आज पानी के गुब्बारे भी बना रहे थे ताकि लोगों का मनोरंजन हो सके.
सिर्फ विदेशों से आए लोगों ने ही आज पतंगबाजी नहीं की बल्कि यहां आम लोगों की तरह दिव्यांगों ने भी पतंगों के जरिए आकाश में उड़ान भरी. उन्हें पांव न होने की कमी नहीं खली और उनके अंदर आनंद पतंगों के साथ हिलोरें लेता रहा. कुछ लोग व्हीलचेयर पर पतंगों की डोर लिए बैठे दिव्यांगों की व्हीलचेयर खींचकर दौड़ रहे थे ताकि उन्हें हवा मिले और उनकी पतंगें भी आसमान छू सकें.
दिव्यांग सोनल वसोया ने कहा कि - ''मैं बिलीव नहीं कर सकती थी पहले कि काइट्स हाथ में लेकर हवा में उड़ा पाऊंगी. लेकिन अभी मैं जब ग्राउंड में आती हूं तो मुझे कॉन्फिडेंस आ जाता है और मैं भूल भी जाती हूं कि मैं डिसेबल हूं.

देश-विदेश से आए पतंगबाजों ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का जमकर मजा लिया. यह आनंद 14 जनवरी को अपने चरम पर पहुंचेगा जब इन पतंगबाजों के साथ पूरा अहमदाबाद अपनी छतों पर पतंग उड़ाएगा.
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