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This Article is From Feb 25, 2026

16 साल की उम्र में पता चला ‘कभी मां नहीं बनेगी’, बिना गर्भाशय के जन्मी महिला ने दिया ‘मिरेकल बेबी’ को जन्म

ब्रिटेन में मृत डोनर के गर्भाशय ट्रांसप्लांट के बाद बिना गर्भाशय के जन्मी महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है. यह मेडिकल क्षेत्र की ऐतिहासिक और प्रेरणादायक सफलता मानी जा रही है.

16 साल की उम्र में पता चला ‘कभी मां नहीं बनेगी’, बिना गर्भाशय के जन्मी महिला ने दिया ‘मिरेकल बेबी’ को जन्म
बिना गर्भाशय के जन्मी महिला बनी मां

ब्रिटेन में चिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है, जहां एक महिला ने मृत डोनर से गर्भाशय ट्रांसप्लांट के बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है. ग्रेस बेल नाम की इस महिला ने दिसंबर में अपने बेटे ह्यूगो पॉवेल को जन्म दिया, जिसे वह अपना 'चमत्कारी बच्चा' बता रही हैं. लंदन के क्वीन शार्लोट्स एंड चेल्सी हॉस्पिटल में हुए इस प्रसव के दौरान उनके साथ उनके पार्टनर स्टीव पॉवेल भी मौजूद थे. बच्चे का वजन 3.09 किलोग्राम बताया गया है.

16 साल की उम्र में मिली थी बुरी खबर

ग्रेस बेल का जन्म मेयर-रोकिटांस्की-कुस्टर-हौसर सिंड्रोम (Mayer-Rokitansky-Kuster-Hauser) के साथ हुआ था. यह एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें महिला का गर्भाशय विकसित नहीं होता या पूरी तरह अनुपस्थित होता है. किशोरावस्था में ही डॉक्टरों ने उन्हें बता दिया था कि वह कभी गर्भधारण नहीं कर पाएंगी. ग्रेस ने कहा, मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह संभव होगा. 16 साल की उम्र से मुझे लगता था कि मैं कभी मां नहीं बन पाऊंगी. यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी और एक चमत्कार है. उन्होंने गर्भाशय दान करने वाली महिला और उसके परिवार के प्रति आभार जताते हुए इसे जीवन का सबसे बड़ा उपहार बताया है.

10 घंटे चली सर्जरी, फिर शुरू हुआ नया सफर

ग्रेस का गर्भाशय प्रत्यारोपण जून 2024 में ऑक्सफोर्ड के चर्चिल हॉस्पिटल में हुआ था, जो करीब 10 घंटे तक चला. इसके कुछ महीनों बाद उन्होंने लंदन के लिस्टर फर्टिलिटी क्लिनिक में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट कराया, जिसके बाद यह सफल गर्भधारण संभव हो सका. दंपति ने अपने बेटे का मिडिल नेम ‘रिचर्ड' रखा है, जो गर्भाशय प्रत्यारोपण यूके (Womb Transplant UK) के क्लिनिकल लीड प्रोफेसर रिचर्ड स्मिथ के सम्मान में है. डॉक्टरों ने इस पूरी प्रक्रिया को हैरान करने वाली यात्रा बताया.

अंगदान ने बदली कई जिंदगियां

डोनर की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जानकारी के अनुसार उनके अन्य 5 अंग भी चार अलग-अलग लोगों में प्रत्यारोपित किए गए, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी. द गार्जियन की खबर के मुताबिक, डोनर के माता-पिता ने कहा कि बेटी को खोना उनके लिए बेहद दुखद था, लेकिन अंगदान के जरिए उसने कई परिवारों को उम्मीद, जीवन और खुशी दी है. उन्होंने इसे करुणा और प्रेम की विरासत बताया. यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा विज्ञान की बड़ी सफलता है, बल्कि उन महिलाओं के लिए भी उम्मीद की नई किरण है, जो किसी कारणवश मां नहीं बन पातीं.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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