Nicole Kerr Death experience: हौसले और कुदरत के करिश्मे की ये कहानी निकोल केर की है. 19 साल की उम्र में जब दुनिया हसीन लगती है, तब एक भयानक कार एक्सीडेंट ने निकोल की धड़कनें रोक दीं. वह एयरफोर्स की ट्रेनिंग कर रही थीं, लेकिन किस्मत ने उन्हें कुछ और ही दिखाने का फैसला कर लिया था. गाड़ी पत्थर से टकराई और निकोल सीधे 'यमराज' के दरवाजे पर जा पहुंचीं. डॉक्टरों ने उन्हें मरा हुआ मानकर सफेद चादर भी डाल दी थी, लेकिन निकोल के लिए ये 'The End' नहीं बल्कि 'To be continued' वाली फिल्म थी.
रोंगटे खड़े करने वाली आपबीती (Nicole Kerr Afterlife message)
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निकोल बताती हैं कि जब उनका शरीर बेजान पड़ा था, उनकी रूह आजाद हो चुकी थी. उन्हें कोई दर्द नहीं था, बस एक सुकून देने वाली ठंडक और चमकती हुई सफेद रोशनी थी. निकोल ने देखा कि उनके दिवंगत दादाजी वहां एक फरिश्ते की तरह खड़े हैं. उन्हें अहसास हुआ कि अब तक वो जो जिंदगी जी रही थीं, वो दूसरों को खुश करने के लिए थी, खुद के लिए नहीं. वहां उन्हें एक ऐसी शांति मिली, जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन है.

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वापस लौटने की जिद और वो 'अधूरा काम' (Nicole Kerr weird story)
कहते हैं कि जब तक ऊपरवाले का बुलावा पक्का न हो, कोई जा नहीं सकता. निकोल के मुताबिक, उन्हें वहां साफ कह दिया गया,'अभी तेरा वक्त नहीं आया है.' हालांकि, निकोल उस जन्नत जैसी शांति को छोड़कर अपने जख्मी शरीर में वापस नहीं आना चाहती थीं, लेकिन रूह को जबरन नीचे भेज दिया गया. जैसे ही मेडिकल टीम ने उनकी छाती पर दबाव बनाया, निकोल की सांसें लौट आईं. इसे देखकर डॉक्टरों की भी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई थी.
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बार-बार मौत से मुलाकात और जिंदगी का सबक (13 minutes dead)
चमत्कार एक बार नहीं हुआ. अस्पताल में इलाज के दौरान सेप्सिस और गैंग्रीन ने उन्हें फिर घेरा. उनका दिल दोबारा रुका और वो फिर उसी रोशनी वाली दुनिया में पहुंच गईं. हर बार उन्हें यही मैसेज मिला कि दुनिया को ये बताना है कि मौत से डरने की जरूरत नहीं है. निकोल का कहना है कि हम सिर्फ मिट्टी का पुतला नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी ऊर्जा हैं, जो कभी खत्म नहीं होती. आज वो दुनिया को सिखा रही हैं कि अपनी शर्तों पर जियो, क्योंकि मौत अंत नहीं, सिर्फ एक बदलाव है. निकोल केर की ये दास्तां बताती है कि जिंदगी की अहमियत को तब समझें जब हम जिंदा हैं.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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