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'बच्चे कमा रहे 2-3 लाख', वीरेंद्र सहवाग ने अपने Gen Z बेटों को दिया गुरुमंत्र- भूलकर भी दिखावा मत करना

पूर्व दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने अपने दोनों क्रिकेटर बेटों को दिखावे की दुनिया से दूर रहने और पैसे की असली कीमत समझने की कड़ी नसीहत दी है. इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को अपने नाम के भारी दबाव और लोगों की आलोचनाओं से पूरी तरह बेअसर रहने का व्यावहारिक सबक भी सिखाया है.

'बच्चे कमा रहे 2-3 लाख', वीरेंद्र सहवाग ने अपने Gen Z बेटों को दिया गुरुमंत्र- भूलकर भी दिखावा मत करना
जन्मदिन पर वीरेंद्र सहवाग ने अपने दोनों बेटों को दिए जिंदगी के कड़े सबक.
instagram@nehabedi2

VIRAL VIDEO: टीम इंडिया के पूर्व धाकड़ बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग 48 साल के हो गए हैं. मैदान पर अपनी बेखौफ बल्लेबाजी से गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले सहवाग निजी जिंदगी में भी उतने ही सीधे और बेबाक हैं. अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित सहवाग के लिए अपनी तमाम भूमिकाओं में सबसे खास है एक पिता का फर्ज. उनके दो बेटे हैं— आर्यवीर और वेदांत. दोनों बेटे पिता की राह पर चलते हुए क्रिकेटर बनने की तैयारी में हैं. आर्यवीर अंडर-19 और वेदांत अंडर-16 क्रिकेट खेल रहे हैं. सहवाग के जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं कि वे आज की 'जेन-जी' (Gen Z) पीढ़ी के अपने बेटों को पैसे और शोहरत को लेकर क्या सिखाते हैं.

जब जेब से ढीले हुए पैसे, तब समझ आई कीमत

हाल ही में 'द द लाइफ सेवर्स शो' में नेहा बेदी से बात करते हुए सहवाग ने दिल खोलकर बात की. उन्होंने बताया कि आज के बच्चे बहुत जल्दी भौतिकवादी (materialistic) चीजों की तरफ आकर्षित हो जाते हैं. ऐसे में माता-पिता का यह फर्ज है कि वे उन्हें पैसे की असली कीमत सिखाएं. सहवाग ने एक मजेदार किस्सा साझा करते हुए बताया, "मेरे दोनों बेटों ने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया है. दोनों करीब दो-तीन लाख रुपये कमा रहे हैं. एक बार मेरे एक बेटे ने गाड़ी में पेट्रोल भरवाया और उसका बिल आया सात हजार रुपए."

सहवाग बताते हैं कि सात हजार का बिल देखकर उनके बेटे के होश उड़ गए. जब तक पापा पैसे दे रहे थे, तब तक सब आसान था. लेकिन जब खुद की जेब से पैसे कटे, तब समझ आया कि पैसा कितनी मेहनत से आता.

"दिखावे की दुनिया से दूर रहो"

सहवाग मानते हैं कि बच्चों को बड़ी गाड़ियों और महंगी घड़ियों का शौक होना आम बात है. उनके बेटे भी अक्सर उनकी महंगी घड़ियां मांगकर पहनते हैं. लेकिन सहवाग उन्हें समझाते हैं, "यह सब सिर्फ दिखावा है. एक वक्त ऐसा आएगा जब तुम्हें समझ आएगा कि इन चीजों का जिंदगी में कोई मोल नहीं है." वे अपने बेटों को हमेशा एक मकसद के साथ जीने की सलाह देते हैं. उनका सीधा कहना है, "दिखावे की नकली जिंदगी मत जियो. असली जिंदगी वह है जहां तुम खुद अपने दम पर कुछ ऐसा करो कि दुनिया तुम्हारी तारीफ करे."

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"हाथी चले बाजार..." वाली सीख

सहवाग के बेटों के साथ उनका बड़ा नाम और विरासत भी जुड़ी है. सहवाग जानते हैं कि उनके बेटों के लिए यह राह आसान नहीं होगी और उनकी तुलना हमेशा अपने पिता से की जाएगी. उन्होंने बचपन से ही अपने बच्चों को इसके लिए तैयार किया है. सहवाग ने उनसे कहा, "तुम्हारी तुलना हमेशा मुझसे होगी. लोग आलोचना भी करेंगे और प्यार भी देंगे. जब तुम बड़े स्तर पर खेलोगे, तो दबाव और बढ़ेगा. लेकिन तुम्हें इन सब से बेअसर रहना है."

उन्होंने बेटों को भारतीय समाज का एक मशहूर मुहावरा याद दिलाते हुए समझाया कि जैसे हाथी अपनी मस्त चाल में चलता रहता है और भौंकने वाले कुत्तों की परवाह नहीं करता, वैसे ही तुम्हें भी लोगों की बातों को खुद पर हावी नहीं होने देना है.

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