अक्सर सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को लेकर नकारात्मक धारणाएं देखने को मिलती हैं. लेकिन जब कोई विदेशी नागरिक खुद भारत आकर अपनी ज़मीनी हकीकत बताता है, तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है. अमेरिका में जन्मी 22 साल एक लड़की ने भारत आने के बाद अपने अनुभव शेयर किए, जिसने ऑनलाइन बहस छेड़ दी है. उसका कहना है कि भारत वैसा बिल्कुल नहीं है, जैसा उसे बताया गया था.
भारत आने के नाम पर लगता था डर
इस लड़की ने बताया कि जब उसकी मां ने अमेरिका से भारत शिफ्ट होने की बात कही, तो वह भावुक हो गई थी. उसने स्वीकार किया कि भारत को लेकर उसने सिर्फ नकारात्मक बातें सुनी थीं और वह पहले कभी यहां आई भी नहीं थी. उसके मुताबिक, भारत आने के शुरुआती दिन बेहद असहज रहे. उसे हर चीज़ अजीब लग रही थी और बार-बार उसे यही ख्याल आता था कि शायद वह कभी यहां घुल-मिल नहीं पाएगी.
Moving to India wasn't what I expected
byu/Successful-Okra6409 inindia
रिश्तों की गर्मजोशी ने बदली सोच
कुछ समय बीतने के बाद लड़की का नजरिया बदलने लगा. उसने लिखा कि धीरे-धीरे भारत उसे जाना-पहचाना सा लगने लगा. उसने बताया कि वह और उसकी 16 वर्षीय बहन को यहां रिश्तेदारों से जिस तरह अपनापन और स्नेह मिला, उससे हैरान रह गईं. जिन रिश्तेदारों से पहले ज्यादा संपर्क नहीं था, उन्होंने भी परिवार की तरह व्यवहार किया. लड़की ने यह भी बताया कि कुछ रिश्तेदार महिलाएं निजी सवाल पूछती थीं, जो शुरुआत में अटपटे लगे. लेकिन बाद में उसे समझ आया कि यह जजमेंट नहीं बल्कि चिंता और अपनापन था. बार-बार घर बुलाना, हालचाल पूछना और साथ समय बिताने की रिक्वेस्ट, इन सबने उसे अकेलापन महसूस नहीं होने दिया.
भारत परफेक्ट नहीं, लेकिन उम्मीद से बेहतर
उसने बताया कि उसका अनुभव यह कहने के लिए नहीं है कि भारत एकदम परफेक्ट है. उसके अनुसार, सांस्कृतिक झटका वास्तविक है और कई बार वह खुद को असहज और थका हुआ भी महसूस करती है. लेकिन इसके बावजूद, भारत उसकी कल्पना से बिल्कुल अलग निकला. लड़की ने लिखा कि उसकी छोटी बहन अभी भी इस बदलाव को अपनाने की कोशिश कर रही है. लेकिन अपनी मां को लंबे समय बाद खुश देखकर उसे यह बदलाव सही लगने लगा. उसका कहना है कि अगर परिवार खुश है, तो एडजस्ट करना आसान हो जाता है.
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई. कई यूज़र्स ने बताया कि वे भी विदेश में पले-बढ़े थे और भारत आकर यहां के लोगों, संस्कृति और रिश्तों से जुड़ गए. कुछ ने कहा, कि खुले दिल से किसी देश को अपनाया जाए, तो अनुभव बेहतर हो सकता है. वहीं, कुछ लोगों ने भारत में रहकर निराशा जताई और व्यवस्था, भरोसे और रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर नाराजगी जाहिर की.
कुछ यूज़र्स ने कहा, कि भारत न तो उतना बुरा है जितना ऑनलाइन दिखाया जाता है और न ही इतना शानदार. यहां का अनुभव इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहां रहते हैं, आपकी जीवनशैली और आर्थिक स्थिति क्या है.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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