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टाइटैनिक डूबने की तारीख बनी डरावनी याद! उसी दिन म्यूज़ियम में घुसा पानी, ये संयोग है या कोई डरावना संकेत?

टाइटैनिक हादसे की बरसी पर अमेरिका के वोलो म्यूज़ियम में अचानक बाढ़ आ गई. इस अजीब संयोग को म्यूज़ियम स्टाफ ने पैरानॉर्मल बताया. जानिए पूरी रहस्यमयी कहानी और टाइटैनिक से जुड़ी खास बातें.

टाइटैनिक डूबने की तारीख बनी डरावनी याद! उसी दिन म्यूज़ियम में घुसा पानी, ये संयोग है या कोई डरावना संकेत?
110 साल पुराने हादसे की तारीख पर फिर हुआ कुछ अनहोना, टाइटैनिक एग्ज़िबिट में बाढ़!

इतिहास के सबसे बड़े समुद्री हादसों में से एक आरएमएस टाइटैनिक का डूबना आज भी लोगों के दिलों में डर और रहस्य दोनों जगाता है. लेकिन, जब उसी हादसे की सालगिरह पर उससे जुड़ा म्यूज़ियम ही पानी में डूब जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है, क्या यह महज़ इत्तेफाक है या कुछ और?

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के Volo Museum में एक अजीब घटना सामने आई है. 14 अप्रैल की रात आए तूफान और बारिश के बाद म्यूज़ियम में पानी भर गया. चौंकाने वाली बात यह है कि यही तारीख उस दिन की सालगिरह भी है, जब RMS Titanic अटलांटिक महासागर में डूब गया था.

म्यूज़ियम के अधिकारियों के अनुसार, पिछले 40 सालों में यह सिर्फ दूसरी बार है जब यहां बाढ़ आई है. इससे पहले भी बाढ़ उसी साल आई थी, जब टाइटैनिक एग्ज़िबिट शुरू हुआ था. म्यूज़ियम के मार्केट डायरेक्टर Jim Wojdyla ने इस घटना को लगभग अलौकिक बताया. उन्होंने कहा, कि इस तरह का संयोग रोंगटे खड़े कर देता है और समझ से परे है.

करोड़ों की ऐतिहासिक चीजें बचाई गईं

म्यूज़ियम में टाइटैनिक से जुड़ी कई कीमती चीजें रखी गई हैं, जिनमें उस दौर के कपड़े, आर्ट और करीब 6 मिलियन डॉलर की गाड़ियां शामिल हैं. ये गाड़ियां उन मशहूर यात्रियों की थीं जैसे जॉन जैकब एस्टोर चतुर्थ, बेंजामिन गुगेनहाइम, लूसी डफ-गॉर्डन. हालांकि स्टाफ ने समय रहते इन चीजों को सुरक्षित कर लिया.

देखें Video:

क्या म्यूज़ियम में है ‘भूतिया' इतिहास?

दिलचस्प बात यह है कि वोलो संग्रहालय पहले से ही अपनी हॉन्टेड छवि के लिए जाना जाता है. यहां काम करने वाले लोगों और आने वाले विजिटर्स ने कई बार अजीब घटनाओं और पैरानॉर्मल एक्टिविटी का दावा किया है.

टाइटैनिक: इतिहास का सबसे दर्दनाक हादसा

आरएमएस टाइटैनिक ने 10 अप्रैल 1912 को इंग्लैंड के साउथैम्पटन से न्यूयॉर्क के लिए अपनी पहली यात्रा शुरू की थी. करीब 2,200 लोगों के साथ सफर कर रहा यह जहाज़ 4 दिन बाद एक हिमखंड से टकरा गया और डूब गया. इस हादसे में 1,500 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. आज भी इसका मलबा समुद्र की गहराई में करीब 3,800 मीटर नीचे मौजूद है और यह मानव अहंकार और त्रासदी का प्रतीक बना हुआ है.

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