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मुंबई की इस सोसायटी में रहने के पैसे नहीं देने पड़ते, उल्टा रहने वालों को लाखों रुपए मिलते हैं हर साल

मुंबई की जॉली मेकर 1 सोसायटी में रहने वाले मेंटेनेंस नहीं देते, बल्कि हर साल लाखों रुपए कमाते हैं. जानिए कैसे एक पुराने निवेश ने रेज़िडेंट्स को बनाया अमीर.

मुंबई की इस सोसायटी में रहने के पैसे नहीं देने पड़ते, उल्टा रहने वालों को लाखों रुपए मिलते हैं हर साल
मुंबई की यह सोसायटी बना रही है रेज़िडेंट्स को अमीर

महानगरों में ऊंची-ऊंची सोसायटियों में फ्लैट खरीदना हर किसी का सपना होता है. बिल्डर शुरुआत में शानदार सुविधाओं और लग्ज़री लाइफ का वादा करते हैं, लेकिन घर मिलने के बाद असली सच्चाई सामने आती है, हर महीने भारी भरकम मेंटेनेंस बिल. आमतौर पर भारत में सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्क 2 से 25 रुपए प्रति वर्ग फुट तक होता है. लेकिन मुंबई में एक ऐसी सोसायटी है, जहां रहने वाले मेंटेनेंस नहीं देते, बल्कि हर साल लाखों रुपए कमाते हैं.

1970 के दशक में बनी, आज भी अनोखी

मुंबई के कफ परेड इलाके में स्थित जॉली मेकर 1 सोसायटी का निर्माण 1970 के दशक में जॉली ग्रुप ने किया था. रियल एस्टेट ब्लॉगर विशाल भार्गव के मुताबिक, यह सोसायटी अपने हर रेज़िडेंट को सालाना करीब 2.5 लाख रुपए तक का डिविडेंड देती है. टाइम्स ऑफ इंडिया की 2003 की रिपोर्ट के अनुसार, इस सोसायटी में दो 25 मंज़िला रेज़िडेंशियल टावर, कुल 180 फ्लैट और 10 बंगलों शामिल हैं. यह मुंबई की सबसे आलीशान और कैश-रिच सोसायटियों में गिनी जाती है.

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मेंटेनेंस नहीं, उल्टा कमाई

इस सोसायटी की सबसे खास बात यह है कि यहां रहने वाले किसी भी तरह का मासिक मेंटेनेंस नहीं देते. बिजली, पानी, टैक्स जैसे सभी खर्च सोसायटी खुद उठाती है. रेज़िडेंट्स से सिर्फ नाममात्र का एक पैसा प्रति वर्ग फुट प्रति माह लिया जाता है, जबकि आसपास की सोसायटियों में यह दर कई गुना ज्यादा है. इसका कारण है सोसायटी के पास मौजूद 25 से 30 करोड़ रुपए का रिज़र्व और सिंकिंग फंड.

इस कमाल की योजना के पीछे एक दूरदर्शी निवेश छिपा है. जॉली मेकर 1 में फ्लैट खरीदने वालों को नरीमन पॉइंट की एक कमर्शियल बिल्डिंग में भी हिस्सेदारी दी गई थी. उस समय खरीदारों ने करीब 40 प्रतिशत प्रीमियम चुकाया था. आज उसी कमर्शियल इमारत से करीब 50 लाख रुपए महीना किराया आता है. इसी किराये से जॉली मेकर 1 की पूरी मेंटेनेंस होती है और रेज़िडेंट्स को सालाना डिविडेंड दिया जाता है.

डिविडेंड कैसे बढ़ता गया

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2003 में सोसायटी हर फ्लैट मालिक को 100 रुपए प्रति वर्ग फुट सालाना डिविडेंड देती थी. 2012 तक यह रकम बढ़कर 300 रुपए प्रति वर्ग फुट हो गई. यानि 2500 वर्ग फुट के फ्लैट में रहने वाला व्यक्ति सालाना 7.5 लाख रुपए तक कमा रहा था. हाल के वर्षों में डिविडेंड बढ़ा या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है. 2012 में यहां एक फ्लैट 1.11 लाख रुपए प्रति वर्ग फुट में बिका था, जिसकी कुल कीमत करीब 29 करोड़ रुपए रही. आज भी यहां की प्रॉपर्टी की कीमतें 75,000 रुपए प्रति वर्ग फुट से ऊपर बताई जाती हैं.

निवेश जिसने ज़िंदगी भर फायदा दिया

जॉली मेकर 1 इस बात का उदाहरण है कि सही समय पर किया गया समझदारी भरा निवेश कैसे एक पूरी पीढ़ी के लिए मुफ्त मेंटेनेंस और स्थायी आय का ज़रिया बन सकता है. यही वजह है कि यह सोसायटी आज भी मुंबई की सबसे अनोखी और चर्चित रेज़िडेंशियल इमारतों में शामिल है.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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