आईटी सेक्टर में सरकारी परीक्षाओं के लिए नौकरी छोड़ना कई बार उल्टा भी पड़ सकता है. ऐसा ही अनुभव एक ऐसे टेक प्रोफेशनल ने शेयर किया है, जिनके पास जावा बैकएंड डेवलपमेंट में 6.5 साल का अनुभव है. उन्होंने बैंकिंग, ईपीएफओ और पीजीटी कंप्यूटर साइंस जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपनी स्थिर आईटी नौकरी छोड़ दी थी. स्प्रिंग बूट और माइक्रोसर्विसेज जैसे स्किल्स रखने वाले इस डेवलपर ने एक राज्य स्तरीय लिखित परीक्षा भी पास कर ली थी. लेकिन 2024 के अंत में नियमों में अचानक बदलाव हो गया. अब पात्रता के लिए एमटेक और बीएड अनिवार्य कर दिए गए, यानी बिना किसी नौकरी की गारंटी के 3–4 साल और पढ़ाई.
ढाई साल का गैप बना सबसे बड़ा रोड़ा
नियम बदलने तक डेवलपर 2.5 साल से आईटी से बाहर हो चुके थे. दिसंबर 2024 में उन्होंने दोबारा आईटी की तैयारी शुरू की और अप्रैल 2025 से गंभीरता से नौकरियों के लिए आवेदन करना शुरू किया. लेकिन यहीं उन्हें असली झटका लगा. डेवलपर के मुताबिक, जैसे ही वे इंटरव्यू में अपने गैप का जिक्र करते, कई रिक्रूटर्स दो मिनट में ही कॉल खत्म कर देते. 6.5 साल का अनुभव होते हुए भी प्रोफाइल को नजरअंदाज किया जाने लगा.
Back in Java Backend after a 2.5-year gap (6.5 YOE). 40+ interviews later, here is the reality of the Indian market.
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आखिरी दौर में रिजेक्शन
अगस्त से दिसंबर 2025 के बीच उन्होंने 30 से 40 इंटरव्यू दिए. टेक्निकल राउंड वे आसानी से क्लियर कर लेते थे, लेकिन मैनेजर या क्लाइंट राउंड में गैप सामने आते ही परेशानी बढ़ जाती. इंटरव्यू लेने वालों को लगता कि प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस अब 'ताज़ा' नहीं है. डेवलपर ने लिखा, कि लंबा गैप सिर्फ स्किल्स पर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सैलरी ग्रोथ पर भी सीधा असर डालता है.
जनवरी 2026 में बदली किस्मत
करीब ढाई साल की जद्दोजहद के बाद जनवरी 2026 में हालात बदले. रिक्रूटर्स ने दोबारा कॉल करना शुरू किया और फाइनल राउंड क्लियर होने लगे. आखिरकार, उन्हें लगातार दो जॉब ऑफर मिले. इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने अपनी-अपनी परेशानियां साझा कीं. एक यूजर ने लिखा, कि लेऑफ के बाद दो महीने का गैप हो गया है और कोई कॉल बैक नहीं मिल रहा. वहीं दूसरे यूजर ने बताया, कि वह 2019 पासआउट है और तब से बेरोजगार है. कई लोगों ने माना कि आखिरी राउंड में बार-बार रिजेक्ट होना सबसे ज्यादा तोड़ देता है.
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