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This Article is From Aug 02, 2025

टीचर ने पूछा- हमें फोन क्यों नहीं देखना चाहिए? बच्चों ने दिए ऐसे-ऐसे जवाब, जो आप कभी सोच भी नहीं सकते

इस वीडियो पर एक यूजर ने लिखा है, फोन दिखाकर  ही बच्चो की आदत मां-बाप बिगाड़ते है और फिर बाद में परेशान होते है'.  दूसरा लिखता है, कितना ही पढ़ा लो इन बच्चो को फिर भी घर जाकर मोबाइल ही देखेंगे'.

टीचर ने पूछा- हमें फोन क्यों नहीं देखना चाहिए? बच्चों ने दिए ऐसे-ऐसे जवाब, जो आप कभी सोच भी नहीं सकते
मैडम के फोन देखने वाले सवाल पर बच्चों ने दिया उम्मीदों से उलट जवाब, दंग रह गए लोग

इस वक्त पेरेंट्स की सबसे बड़ी समस्या है बच्चों का घंटे-घंटे मोबाइल देखना है. बच्चे स्कूल से छूटने के बाद मोबाइल पकड़ लेते है और जब तक बिस्तर पर नही जाते है तब तक नहीं छोड़ते. बच्चे घर पर हर काम मोबाइल देखकर कर रहे है, चाहे इसमे खाना हो या फिर खेलना. लेकिन इसमें बच्चों से ज्यादा पेरेटस की गलती है कि क्योंकि बच्चों को फोन देखने की आदत वो ही डालते हैं. पेरेटस रोते हुए बेबी को चुप कराने की बजाय उसके सामने फोन रख देते है, जिससे बच्चा बचपन से ही फोन का आदी हो जाता है. यहा तक कि पेरेंट्स अपना क्वालिटी टाइम बिताने के लिए भी बच्चों को फोन देकर दूसरे कमरे मे भेज देते हैं, जो बच्चों के लिए बहुत खतरनाक है. अब स्कूल से आए इस वीडियो को देखे जिसमे, एक अध्पापिका पूछ रही है कि हमे फोन क्यो नही देखना चाहिए. इस पर बच्चों का क्या कहना है आइए जानते हैं.

फोन पर बच्चो को पढ़ाया पाठ (Teacher and Kids Phone Screening Video)

बच्चों में फोन की लत को खत्म करने के लिए स्कूल मे इस तरह के अभियान चलाए जा रहे है. शिक्षिका के इस सवाल पर बच्चे बारी-बारी से बता रहे है कि हमें फोन क्यो नही देखना चाहिए. इस एक बच्चे ने कहा, आख खराब हो जाती है, दूसरे ने कहा दूसरी आंख खराब हो जाती है, तीसरे ने कहा, आंख से खून आता है, चौथे ने कहा, चश्मा लग जाता है, पांचवे ने कहा , फोन देखने पर मां-बाप डांटते है, एक बच्चे ने कहा ज्यादा फोन देखोगे तो डॉक्टर आंख निकाल लेंगे. अब बच्चे इस सवाल पर अपने-अपने जवाब दर्ज करा रहे है. इस वीडियो पर लोगो का क्या रिएक्शन आइए पढ़ते हैं.

देखें Video:
 

लोगों ने कहा पेरेंट्स को समझाओ (Kids Phone Screening Video)

इस वीडियो पर एक यूजर ने लिखा है, फोन दिखाकर  ही बच्चो की आदत मां-बाप बिगाड़ते है और फिर बाद में परेशान होते है'.  दूसरा लिखता है, कितना ही पढ़ा लो इन बच्चो को फिर भी घर जाकर मोबाइल ही देखेंगे'. तीसरा यूजर लिखता है, बच्चे जैसा देखते है वैसा करते है, पहले पेरेंट्स को उनके सामने फोन देखना छोड़ना होगा'.  चौथा लिखता है, आज पेरेंट्स बच्चे के जरा सा रोने पर मिनट मिनट पर फोन पकड़ा देते है. पाचवां लिखता है, इन्हे समझाने से कुछ नहीं होगा इनके पेरेंट्स को समझाओ. कुल मिलाकर यूजर्स बच्चे नहीं बल्कि फोन स्क्रीनिंग के लिए उनके पेरेंट्स को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

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