मुम्बई:
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने जिन दो समाचार पत्रों- 'सामना' (मराठी) और 'दोपहर का सामना' (हिन्दी) की शुरुआत की थी, वे रविवार को काले रंग के कवर पृष्ठों के साथ प्रकाशित हुए।
ठाकरे ने 23 जनवरी, 1988 को 'सामना' शुरू किया था। वह इसके संस्थापक और सम्पादक भी थे। इसके रोजमर्रे के काम का निर्धारण हालांकि कुछ चुनिंदा व विश्वसीय कार्यकारी सम्पादक करते थे।
इसके दो मुख्य कवर पृष्ठ रविवार को काले रंग में प्रकाशित हुए। इसके शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। समाचार पत्र के जैकेट कवर में बाल ठाकरे की बड़ी सी मुस्कराती तस्वीर है, जिस पर मराठी में लिखा है 'हमारे बॉस चले गए।' इसके नीचे मराठी में एक कविता भी लिखी है।
समाचार पत्र के मुख्य कवर पर शीर्षक लिखा है, 'ईश्वरीय अवतार स्वर्ग चला गया' और 'बालासाहब के नाम से मशहूर तूफानी बादल शांत हो गया।'
समाचार पत्र 'दोपहर का सामना' आम तौर पर रविवार को बंद रहता है। लेकिन ठाकरे को श्रद्धांजलि देने के लिए इसका विशेष संस्करण निकाला गया। इसका कवर पृष्ठ भी काले रंग से रंगा है। अंदर ठाकरे को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा गया है, 'हिन्दुओं के महादेव का महाप्रायाण।'
इसमें एक छोटी सी कविता भी लिखी गई है, 'जो उठे राम/जो उठे कृष्ण/भारत की मिट्टी रोती है/क्या हुआ हमारे साहब को/ये मूर्ति न जिंदा होती है।'
ठाकरे ने इस समाचार पत्र की शुरुआत महाराष्ट्र में रह रहे उत्तर भारत के लोगों और नई दिल्ली तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए 23 फरवरी, 1993 में की थी।
'दोपहर का सामना' के कार्यकारी सम्पादक प्रेम शुक्ला ने कहा कि देश के मीडिया इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब दो दैनिक समाचार-पत्रों के कवर पृष्ठ काले रंग में प्रकाशित हुए।
दोनों समाचार पत्रों में सम्पादक के नाम के आगे रविवार को भी ठाकरे का नाम ही लिखा हुआ था।
ठाकरे ने 23 जनवरी, 1988 को 'सामना' शुरू किया था। वह इसके संस्थापक और सम्पादक भी थे। इसके रोजमर्रे के काम का निर्धारण हालांकि कुछ चुनिंदा व विश्वसीय कार्यकारी सम्पादक करते थे।
इसके दो मुख्य कवर पृष्ठ रविवार को काले रंग में प्रकाशित हुए। इसके शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। समाचार पत्र के जैकेट कवर में बाल ठाकरे की बड़ी सी मुस्कराती तस्वीर है, जिस पर मराठी में लिखा है 'हमारे बॉस चले गए।' इसके नीचे मराठी में एक कविता भी लिखी है।
समाचार पत्र के मुख्य कवर पर शीर्षक लिखा है, 'ईश्वरीय अवतार स्वर्ग चला गया' और 'बालासाहब के नाम से मशहूर तूफानी बादल शांत हो गया।'
समाचार पत्र 'दोपहर का सामना' आम तौर पर रविवार को बंद रहता है। लेकिन ठाकरे को श्रद्धांजलि देने के लिए इसका विशेष संस्करण निकाला गया। इसका कवर पृष्ठ भी काले रंग से रंगा है। अंदर ठाकरे को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा गया है, 'हिन्दुओं के महादेव का महाप्रायाण।'
इसमें एक छोटी सी कविता भी लिखी गई है, 'जो उठे राम/जो उठे कृष्ण/भारत की मिट्टी रोती है/क्या हुआ हमारे साहब को/ये मूर्ति न जिंदा होती है।'
ठाकरे ने इस समाचार पत्र की शुरुआत महाराष्ट्र में रह रहे उत्तर भारत के लोगों और नई दिल्ली तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए 23 फरवरी, 1993 में की थी।
'दोपहर का सामना' के कार्यकारी सम्पादक प्रेम शुक्ला ने कहा कि देश के मीडिया इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब दो दैनिक समाचार-पत्रों के कवर पृष्ठ काले रंग में प्रकाशित हुए।
दोनों समाचार पत्रों में सम्पादक के नाम के आगे रविवार को भी ठाकरे का नाम ही लिखा हुआ था।
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