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अब रात में भी मिलेगी सूरज की रोशनी! अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे 50,000 शीशे, रात को दिन बनाने की चल रही तैयारी

अमेरिकी कंपनी Reflect Orbital अंतरिक्ष में 50,000 मिरर भेजकर रात में सूरज की रोशनी देने की योजना बना रही है. जानिए इसकी कीमत, फायदे और विवाद.

अब रात में भी मिलेगी सूरज की रोशनी! अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे 50,000 शीशे, रात को दिन बनाने की चल रही तैयारी
अब रात में भी मिलेगी सूरज की रोशनी!

क्या रात में भी दिन जैसी रोशनी मिल सकती है? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन अब इसे हकीकत बनाने की तैयारी हो रही है. अमेरिका की एक कंपनी अंतरिक्ष में हजारों बड़े-बड़े शीशे भेजकर पृथ्वी पर रात के समय भी सूरज की रोशनी पहुंचाने की योजना बना रही है.

क्या है पूरा प्लान

अमेरिका की कंपनी Reflect Orbital इस अनोखे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. कंपनी का लक्ष्य है कि पृथ्वी के चारों ओर करीब 50,000 बड़े मिरर (शीशे) लगाए जाएं, जो सूरज की रोशनी को रात में धरती पर रिफ्लेक्ट करेंगे. शुरुआत में कंपनी एक छोटा प्रोटोटाइप लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसमें लगभग 60 फीट चौड़ा मिरर होगा. यह मिरर करीब 3 मील के इलाके को रोशन कर सकेगा. जमीन से देखने पर यह किसी चमकते तारे या फुल मून जैसा दिखाई देगा.

कितनी होगी कीमत

इस अनोखी 'रात की धूप' की कीमत भी कम नहीं है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी एक मिरर की रोशनी के लिए करीब 4.6 लाख रुपये (लगभग $5,000) प्रति घंटे चार्ज कर सकती है, वो भी तब जब ग्राहक सालभर के लिए लंबा कॉन्ट्रैक्ट करे.

क्या है कंपनी का मकसद

कंपनी के सीईओ बेन नोवाक का कहना है कि उनका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है जो भविष्य में ऊर्जा के नए विकल्प दे सके और फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करे. कंपनी को अब तक निवेशकों से करीब 28 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिल चुकी है. अगर पहला प्रयोग सफल रहा, तो अगले कुछ सालों में हजारों सैटेलाइट लॉन्च किए जा सकते हैं.

2030 तक बड़ा प्लान

कंपनी का लक्ष्य है कि: 2028 तक करीब 1,000 सैटेलाइट लॉन्च किए जाएं और 2030 तक यह संख्या बढ़ाकर 5,000 कर दी जाए. भविष्य में बड़े मिरर करीब 180 फीट चौड़े होंगे और एक साथ मिलकर 100 फुल मून जितनी रोशनी पैदा कर सकते हैं.

कहां इस्तेमाल हो सकती है यह रोशनी

इस तकनीक का इस्तेमाल कई जगहों पर किया जा सकता है:
- आपातकालीन स्थितियों में
- बड़े इवेंट्स में
- सोलर फार्म्स को अतिरिक्त रोशनी देने के लिए

हालांकि, इसके लिए कई सैटेलाइट्स को एक साथ काम करना होगा, जिससे लागत और जटिलता बढ़ सकती है.

उठ रहे हैं कई सवाल

इस प्रोजेक्ट को लेकर कई वैज्ञानिक और विशेषज्ञ चिंता भी जता रहे हैं. उनका कहना है कि:
- यह रोशनी हवाई जहाज के पायलट्स को प्रभावित कर सकती है
- खगोल विज्ञान (Astronomy) पर असर पड़ सकता है
- इंसानों और जानवरों की जैविक घड़ी (Body Clock) बिगड़ सकती है
- जानवरों के व्यवहार, प्रजनन और माइग्रेशन पर असर पड़ सकता है

सरकार की क्या भूमिका होगी

इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए अमेरिका की संघीय संचार आयोग से मंजूरी जरूरी होगी. हालांकि, यह एजेंसी मुख्य रूप से रेडियो सिग्नल में रुकावट और सैटेलाइट की सुरक्षा जैसे तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देती है, न कि पर्यावरणीय प्रभावों पर.

दुनिया में चल रहे ऐसे और प्रयोग

ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए दुनिया भर में कई प्रयोग चल रहे हैं. उदाहरण के तौर पर, ब्रिटेन की उन्नत अनुसंधान और आविष्कार एजेंसी एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसमें सूरज की रोशनी को कम करके पृथ्वी का तापमान घटाने की कोशिश की जा रही है. इन प्रयोगों में समुद्र के ऊपर नमक के कण फैलाना और वायुमंडल में छोटे कण छोड़ना शामिल है.

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