
नई दिल्ली:
गणतंत्र दिवस समारोह में हर साल की तरह इस बार भी अलग-अलग झांकियों ने लोगों को खूब आकर्षित किया। इन झांकियों में कहीं लोगों को स्वामी विवेकानंद का दर्शन नजर आया, तो कहीं विज्ञान के चमत्कार की कहानी बयां करती 'नूरी' का दीदार हुआ।
देश के कई राज्यों की झांकी इस बार राजपथ पर दिखीं। इनमें पश्चिम बंगाल की झांकी खासी अहम थी, क्योंकि यह भारतीय अध्यात्म का झंडा पूरी दुनिया में बुलंद करने वाले स्वामी विवेकानंद पर केंद्रित थी। देश भर में इस साल विवेकानंद की 150वीं जयंती मनाई जा रही है।
शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन के माध्यम से भारतीयों में स्वाभिमान और आत्म गौरव का संचार करने वाले विवेकानंद को इस झांकी में अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के साथ दिखाया गया। भारत परिक्रमा के दौरान, कन्याकुमारी में एक भ्रमणशील साधु के रूप में स्वामीजी के पास जो समान था... मसलन एक कंबल, भिक्षा पात्र, दो पुस्तकें, भगवद्गीता और ईसा मसीह की अनुकृतियां, उन्हीं की एक झलक इस झांकी में दिखाई गई।
उपनिषदों और वेदों की पुन: व्याख्या में विवेकानंद ने हमें एहसास कराया कि सत्य एक ही है, लेकिन बुद्धिमान लोग उसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पश्चिम बंगाल से ही हैं और उन्होंने इस साल पहली बार परेड की सलामी ली।
आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की झांकी ब्रज की होली पर केंद्रित थी। ब्रज की होली के कई मनमोहक दृश्यों को पेश करने का बेहतरीन प्रयास था। बिहार ने इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित परेड में 'सिक्की तृण' यानी घास से बनी कलाकृतियां दर्शाने वाली झांकी पेश की। बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के परिवार वालों के जीवन यापन के लिए यह एक बड़ा साधन है।
जम्मू-कश्मीर की झांकी समृद्धि संस्कृति और विज्ञान दोनों पर केंद्रित थी। इसमें मशहूर पशमीना शाल को दिखाया गया तो दूसरी ओर राज्य के 'शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय' की ओर से पशमीना भेड़ का तैयार क्लोन 'नूरी' का भी चित्रण था। कर्नाटक की झांकी में किन्नाल हस्तशिल्प कला का मनमोहक चित्रण किया गया। राज्य की यह कला किन्नाल गांव से जुड़ी है। झारखंड राज्य की झांकी में सुप्रसिद्ध डोकरा कला का प्रदर्शन किया गया।
हिमाचल प्रदेश की झांकी किन्नौर के आदिवासियों के हस्तशिल्प, वास्तुकला और लोक जीवन पर आधारित रही। किन्नौर की संस्कृति का उल्लेख पौराणिक साहित्य में किया गया है। अपने सुंदर प्राकृतिक दृश्यों के लिए मशहूर केरल की झांकी 'केट्टुवल्लम' हाउसबोट पर केंद्रित रही। छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी में सांस्कृतिक समृद्धि, वास्तुशिल्पि और धार्मिक सौहार्द केंद्र सिरपुर के प्राचीनतम इतिहास का चित्रण किया गया। राजस्थान की झांकी बूंदी की चित्रशाला और ओडिशा की झांकी में भगवान जगन्नाथ की चंदन यात्रा को प्रस्तुत किया गया।
देश के कई राज्यों की झांकी इस बार राजपथ पर दिखीं। इनमें पश्चिम बंगाल की झांकी खासी अहम थी, क्योंकि यह भारतीय अध्यात्म का झंडा पूरी दुनिया में बुलंद करने वाले स्वामी विवेकानंद पर केंद्रित थी। देश भर में इस साल विवेकानंद की 150वीं जयंती मनाई जा रही है।
शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन के माध्यम से भारतीयों में स्वाभिमान और आत्म गौरव का संचार करने वाले विवेकानंद को इस झांकी में अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के साथ दिखाया गया। भारत परिक्रमा के दौरान, कन्याकुमारी में एक भ्रमणशील साधु के रूप में स्वामीजी के पास जो समान था... मसलन एक कंबल, भिक्षा पात्र, दो पुस्तकें, भगवद्गीता और ईसा मसीह की अनुकृतियां, उन्हीं की एक झलक इस झांकी में दिखाई गई।
उपनिषदों और वेदों की पुन: व्याख्या में विवेकानंद ने हमें एहसास कराया कि सत्य एक ही है, लेकिन बुद्धिमान लोग उसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पश्चिम बंगाल से ही हैं और उन्होंने इस साल पहली बार परेड की सलामी ली।
आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की झांकी ब्रज की होली पर केंद्रित थी। ब्रज की होली के कई मनमोहक दृश्यों को पेश करने का बेहतरीन प्रयास था। बिहार ने इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित परेड में 'सिक्की तृण' यानी घास से बनी कलाकृतियां दर्शाने वाली झांकी पेश की। बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के परिवार वालों के जीवन यापन के लिए यह एक बड़ा साधन है।
जम्मू-कश्मीर की झांकी समृद्धि संस्कृति और विज्ञान दोनों पर केंद्रित थी। इसमें मशहूर पशमीना शाल को दिखाया गया तो दूसरी ओर राज्य के 'शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय' की ओर से पशमीना भेड़ का तैयार क्लोन 'नूरी' का भी चित्रण था। कर्नाटक की झांकी में किन्नाल हस्तशिल्प कला का मनमोहक चित्रण किया गया। राज्य की यह कला किन्नाल गांव से जुड़ी है। झारखंड राज्य की झांकी में सुप्रसिद्ध डोकरा कला का प्रदर्शन किया गया।
हिमाचल प्रदेश की झांकी किन्नौर के आदिवासियों के हस्तशिल्प, वास्तुकला और लोक जीवन पर आधारित रही। किन्नौर की संस्कृति का उल्लेख पौराणिक साहित्य में किया गया है। अपने सुंदर प्राकृतिक दृश्यों के लिए मशहूर केरल की झांकी 'केट्टुवल्लम' हाउसबोट पर केंद्रित रही। छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी में सांस्कृतिक समृद्धि, वास्तुशिल्पि और धार्मिक सौहार्द केंद्र सिरपुर के प्राचीनतम इतिहास का चित्रण किया गया। राजस्थान की झांकी बूंदी की चित्रशाला और ओडिशा की झांकी में भगवान जगन्नाथ की चंदन यात्रा को प्रस्तुत किया गया।
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