VIRAL VIDEO: पहाड़ों के बीच बसे भूटान का पारो इंटरनेशनल एयरपोर्ट (PBH) दुनिया के सबसे डेंजरस हवाई अड्डों में से एक माना जाता है. खुद विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग भी इसे दुनिया के सबसे रिस्की एयरपोर्ट्स की लिस्ट में रखती है. यहां की लोकेशन और टेक्निकल लिमिट्स इतनी चैलेंजिंग हैं कि दुनिया के गिने-चुने और बेहद एक्सपीरियंस्ड पायलटों को ही यहां विमान लैंड करने की परमिशन मिली हुई है. पायलटों के लिए पारो एयरपोर्ट पर लैंडिंग किसी परीक्षा से कम नहीं है. यह एयरपोर्ट समुद्र तल से करीब 7,332 फीट की ऊंचाई पर हिमालय की एक तंग घाटी में है. इसके चारों तरफ 18 हजार फीट ऊंचे पहाड़ हैं, जिनके बीच से विमान को मोड़ते हुए नीचे लाना पड़ता है. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां विमानों को गाइड करने के लिए कोई रडार या इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) नहीं है. पायलटों को पूरी तरह अपनी आंखों से देखकर, यानी मैन्युअल मोड में ही विमान लैंड कराना होता है.
आखिरी सेकंड तक गायब रहता है रनवे
इतना ही नहीं, रनवे के ठीक सामने एक बड़ा पहाड़ है, जिसके कारण आखिरी पलों तक रनवे दिखाई नहीं देता. पायलट को पहाड़ी से बचने के लिए विमान को तेजी से जिग-जैग मोड़ना पड़ता है और टचडाउन से ठीक कुछ सेकंड पहले ही रनवे नजर आता है. यहां का रनवे भी महज 1,964 मीटर लंबा है, जो बड़े कमर्शियल फ्लाइट को रोकने के लिए काफी छोटा माना जाता है. घाटी में चलने वाली तेज हवाएं और पल-पल बदलता मौसम इस काम को और मुश्किल बना देते हैं. इसी वजह से यहां सिर्फ दिन के उजाले और साफ मौसम में ही फ्लाइट ऑपरेशन्स की परमिशन है.
दुनिया में सिर्फ 50 से भी कम पायलट हैं जिन्हें यहाँ प्लेन उतारने की इजाज़त है और वजह देखकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे! ये है भूटान का पारो एयरपोर्ट न कोई ऑटोपायलट न राडार गाइडेंस रनवे तब तक नहीं दिखता जब तक विमान 18,000 फीट ऊंचे पहाड़ों के बिल्कुल करीब न आ जाए। एक सेकंड की चूक और खेल खत्म! बताइए क्या आप कभी इस एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरना चाहेंगे?
— Jamal | Viral Desk (@jamalviraldesk) October 30, 2026
दुनिया के 50 से भी कम पायलटों को पास है स्पेशल लाइसेंस
इस एयरपोर्ट की मुश्किलों का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि दुनिया भर में फिलहाल 50 से भी कम कमर्शियल पायलटों के पास यहां विमान उतारने का स्पेशल लाइसेंस है. कुछ रिपोर्ट्स तो यह संख्या केवल 25 के आसपास ही बताती हैं. यहां विमान उतारने के लिए सिर्फ नॉर्मल लाइसेंस होना काफी नहीं है. इसके लिए पायलट के पास कम से कम 1,500 घंटे उड़ान का एक्सपीरियंस और उसमें से 500 घंटे पहाड़ों में उड़ान भरने का तजुर्बा होना जरूरी है.
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मुश्किल ट्रेनिंग और 30 बार प्रैक्टिस की शर्त
इसके बाद उन्हें एक बेहद कठिन सिम्युलेटर ट्रेनिंग पूरी करनी पड़ती है और एक सीनियर ट्रेनर की देखरेख में पारो एयरपोर्ट पर कम से कम 30 बार टेक-ऑफ और लैंडिंग की प्रैक्टिस करनी होती है. इस एयरपोर्ट पर केवल भूटान की दो डोमेस्टिक एयरलाइंस ड्रुक एयर और भूटान एयरलाइंस को ही कमर्शियल उड़ानें चलाने की परमिशन है. यहां लैंडिंग के आखिरी दो मिनट में विमान को पहाड़ों के बेहद करीब से निकालते हुए 45-डिग्री के शार्प टर्न पर घुमाना पड़ता है. यही वजह है कि इस खतरनाक रनवे पर विमान उतारना केवल दुनिया के इन मुट्ठी भर बेहतरीन पायलटों के ही बस की बात है.
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