- नेपाल में भीषण बाढ़ से 26 अगस्त 2026 तक करीब 94 लोगों की मौत हुई है और उत्तर प्रदेश के नदी-नाले उफान पर हैं
- कौड़ियाला नदी के तेज बहाव में बहता हुआ हाथियों का एक कुनबा यूपी के बहराइच में गिरजा बैराज तक पहुंचा था
- वन विभाग की टीम ने तीन वयस्क और दो छोटे हाथियों को सिंचाई विभाग के सहयोग से सुरक्षित बचाया गया था
नेपाल इस वक्त जल प्रलय की चपेट में है. भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से हुई तबाही के कारण 26 अगस्त 2026 की शाम तक करीब 94 लोगों की मौत की खबर है. नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के इलाकों में भी नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे आमजन के साथ-साथ वन्यजीवों की जान भी जोखिम में पड़ गई है. (मोहम्मद सलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट)
कौड़ियाला नदी के तेज बहाव में बहा हाथियों का कुनबा
इसी बीच यूपी के बहराइच से खबर सामने आई है, जहां नेपाल की ओर से हाथियों का एक कुनबा कौड़ियाला नदी के तेज बहाव में बहता हुआ गिरजा बैराज तक जा पहुंचा. पानी के इस प्रचंड बहाव से वन विभाग की टीमों ने 3 वयस्क और 2 छोटे हाथियों को सुरक्षित बचा लिया.
जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह कुनबा नदी के तेज बहाव में बहते हुए यूपी के चौधरी चरण सिंह गिरजापुरी बैराज के पास पहुंच गया था. संभवतः हाथियों का यह झुंड जंगल में विचरण कर रहा था, तभी अचानक नदी का जलस्तर बढ़ गया और तेज बहाव में पूरा कुनबा बहने लगा. काफी देर तक हाथी अपनी जान बचाने के लिए तेज बहाव से संघर्ष करते रहे.
नेपाल से नदी में बहकर आए पांच जंगली हाथियों के एक कुनबे को बहराइच के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में सुरक्षित बचा लिया गया। pic.twitter.com/mq5LAYQAeI
— Ajit Singh Rathi (@AjitSinghRathi) August 26, 2026
वन विभाग और सिंचाई विभाग का त्वरित एक्शन
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची. प्रभागीय वनाधिकारी ने बिना देरी किए सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा. सूचना मिलते ही सिंचाई अभियंता ने बैराज के गेट बंद कर दिए, जिसकी वजह से पानी का बहाव काफी कम हो गया.
कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों को सुरक्षित जंगल में छोड़ा
वन कर्मी लगातार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे. नदी में पानी का बहाव कम होते ही हाथी धीरे-धीरे किनारे की तरफ बढ़ते गए और कम बहाव वाली जगह पर पहुंचकर वयस्क हाथियों ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया.
बैराज गेट के पास पहुंचे हाथियों के झुंड को वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद हांका लगाकर सुरक्षित जंगल की ओर मोड़ दिया. वन कर्मियों की इस सूझबूझ और तत्परता से हाथियों के कुनबे की जान बच सकी. अगर समय रहते टीम मौके पर नहीं पहुँचती, तो बड़ा हादसा हो सकता था.
डीएफओ बहराइच का बयान
फिलहाल सभी 5 हाथी पूरी तरह सुरक्षित हैं और जंगल में वापस लौट गए हैं. घटना के बाद वन विभाग ने नदी किनारे गश्त बढ़ा दी है. बहराइच के डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि हाथियों के बहने की खबर मिलते ही सिंचाई विभाग से संपर्क किया गया था. बैराज के गेट बंद होने से पानी का बहाव कम हुआ, जिसकी वजह से सभी हाथियों को सुरक्षित बचाया जा सका.
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