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This Article is From Jul 06, 2011

बस एक कॉल, घर बैठे मिलेगी नौकरानी

Kanpur Nagar: खाना पकाना, झाड़ू-पोछा और चौका-बरतन जैसे घरेलू काम के लिए अब आपको नौकरानी ढूंढने में गलियों की खाक नहीं छाननी पड़ेगी। बस एक फोन कॉल से आपके पास नौकरानियों का बायोडाटा पहुंच जाएगा, जिससे आप घर बैठे अपने पसंद की कामवाली चुन सकेंगे। उत्तर प्रदेश के कानपुर में कुछ कामवालियों ने राज्य स्तर पर घरेलू काम करने वाली महिलाओं का यूनियन 'घरेलू महिला कामगार यूनियन' बनाया है। इस यूनियन द्वारा कुछ समय पहले शुरू किए गए हेल्पलाइन नंबर से आपको अपने ही शहर में नौकरानी की सुविधा मिल जाएगी। घरेलू महिला कामगार यूनियन की महासचिव मीनू सूर ने कहा, "प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, सीतापुर, इलाहाबाद, हरदोई, उन्नाव जैसे शहरों में फिलहाल करीब 10,000 महिलाएं इस यूनियन की सदस्य हैं। घरेलू नौकरानी के लिए जरूरतमंद शख्स द्वारा हमारे हेल्पलाइन नंबर 8005185783 पर सम्पर्क करने से उस शहर में नियुक्त हमारा प्रभारी वहां हमारी यूनियन से जुड़ी सभी कामवाली महिलाओं का बायोडाटा लेकर उसके पास पहुंच जाएगा।" सूर के मुताबिक, बायोडाटा में नौकरानी का नाम, उम्र, पता होने के साथ-साथ घरेलू काम के अनुभव की भी जानकारी होगी। बायोडाटा के आधार पर आप जिस नौकरानी को चुनेंगे, वह बाद में आपके घर आकर मेहनताना की बात तय कर काम करना शुरू कर देगी। यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक घरेलू कामों के लिए मेहनताना इलाका, दूरी और परिवार के सदस्यों की संख्या पर निर्भर करेगा। उदाहरण के लिए, खाना पकाने का मेहनताना 900 से 2500 रुपये प्रति माह, झाड़ू-पोछा के लिए 300 से 1500 रुपये और चौका-बर्तन के लिए 300 से 600 रुपये तय है। सूर (52) के अनुसार, यूनियन में पूरी छानबीन के बाद ही किसी महिला को सदस्य बनाया और उसका पंजीकरण किया जाता है। पंजीकरण के बाद हर महिला को फोटो पहचान-पत्र दिया जाता है, जिसमें सारी जानकारी और पंजीकरण संख्या होती है। उन्होंने कहा कि अभी आए दिन नौकरानियों द्वारा घर से सामान चुराकर चम्पत हो जाने की घटनाएं होती हैं। लेकिन यूनियन के जरिए लोगों को भरोसेमंद नौकरानी मिलेगी। यूनियन के पास सम्बंधित नौकरानी की पूरी जानकारी और जवाबदेही भी होगी। कानपुर के गोविंदनगर में रहने वाली सूर ने करीब चार साल पहले अपने आस-पास की कुछ महिलाओं को साथ लेकर एक समूह बनाया था। उस वक्त उन्हें आशा नहीं थी कि उनकी यह शुरुआत इतने बड़े संगठन का रूप ले लेगी। उन्होंने यूनियन का गठन एक साल पहले किया। यह पूछे जाने पर कि उनको यूनियन बनाने का ख्याल कैसे आया? उन्होंने कहा, "आमतौर पर ज्यादातर शहरों में काम करने वाली महिलाएं शोषण का शिकार होती हैं। तय से ज्यादा काम करवाने के बावजूद उन्हें उचित मेहनताना नहीं दिया जाता। इसे देखते हुए मुझे लगा कि एक संगठन बनाया जाए, ताकि उन्हें शोषण से बचाया जा सके।" घरेलू काम करने वाली महिलाओं को यूनियन में पंजीकरण कराने के लिए पहली बार 13 रुपये शुल्क देना होगा। उसके बाद 12 रुपये प्रतिवर्ष शुल्क देने होंगे। यूनियन बालश्रम के खिलाफ है और इसलिए इसमें नाबालिग बच्चियों का पंजीकरण नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि मालिक द्वारा तय मेहनताना नहीं देने और शोषण की शिकायत मिलने पर यूनियन के सदस्य महिला कामगारों की पूरी मदद करेंगे। उनके मुताबिक, राज्य के वाराणसी, गोरखपुर, फैजाबाद, मेरठ, आगरा, बरेली और अलीगढ़ में यूनियन की सदस्य बनाने का अभियान तेजी से जारी है। यूनियन से जुड़ी एक सदस्य कुसुम रानी का भी कहना है कि यूनियन के जरिए जब वह काम करने जाती हैं तो शोषण से बचने के साथ-साथ तय मेहनताना मिलने में भी दिक्कतें नहीं आतीं।

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नौकरानी, संगठन, फोन कॉल