NASA ने कैमरे में कैद किया टूटते तारे का Video, देखकर आप भी कहेंगे - OMG

नासा (NASA) ने एक विस्फोट करने वाले तारे (Exploding Star) का एक आश्चर्यजनक टाइम लेप्स वीडियो (Time Lapse Video) शेयर किया है, जिसे हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) द्वारा कैप्चर किया गया है. यह वीडियो काफी वायरल (Viral Video) हो रहा है.

NASA ने कैमरे में कैद किया टूटते तारे का Video, देखकर आप भी कहेंगे - OMG

NASA ने कैद किया टूटते तारे का Stunning Video, बार-बार देखा जा रहा है यह वीडियो

नासा (NASA) ने एक विस्फोट करने वाले तारे (Exploding Star) का एक आश्चर्यजनक टाइम लेप्स वीडियो (Time Lapse Video) शेयर किया है, जिसे हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) द्वारा कैप्चर किया गया है. 30 सेकंड की इस क्लिप में 70 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित आकाशगंगा में एक लुप्त होते सुपरनोवा (Supernova) को दिखाया गया है. स्पेस एजेंसी ने स्टेटमेंट में कहा, 'नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने सुपरनोवा के लुप्त होने वाला वीडियो कैप्चर किया.' सोशल मीडिया (Social Media) पर यह वीडियो काफी वायरल (Viral Video) हो रहा है.

सुपरनोवा एक तारे का विस्फोट है - जो अंतरिक्ष में होने वाला सबसे बड़ा विस्फोट है. तस्वीर में ब्लास्ट होते तारे को दर्शाया गया है. तस्वीरें सुपरनोवा 2018 जीवी के लुप्त होती रोशनी को दिखाती हैं.

हबल ने सुपरनोवा 2018 जीवी के शुरुआती विस्फोट को रिकॉर्ड नहीं किया था, इसने लगभग एक वर्ष तक लुप्त होती स्टार की लगातार तस्वीरें लीं. 2018 से 2019 के बीच ली गई तस्वीरों को एक टाइम लेप्स सीक्वेंस में सेट किया गया, जिसे इस महीने नासा ने शेयर किया है. विस्फोट करने वाला तारा 5 बिलियन सूर्य के समान चमकीला था. 

सीक्वेंस में, सुपरनोवा विस्मरण में लुप्त होने से पहले आकाशगंगा के बाहरी किनारे में एक धधकते सितारे के रूप में दिखाई देता है.

देखें टाइम लेप्स वीडियो:


इस वीडियो को नासा ने यूट्यूब पर 1 अक्टूबर को शेयर किया था, जिसके अब तक 4.2 लाख व्यूज हो चुके हैं. कई लोगों ने इस वीडियो को शानदार बताया है. एक यूजर ने लिखा, 'यह सोचना अच्छा है कि एक तारा अब मर सकता है लेकिन हम इसे केवल एक मिलियन वर्षों में देखेंगे.'

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


नासा के अनुसार, हबल ने फरवरी 2018 में एसएन 2018 जीवी का अवलोकन करना शुरू कर दिया, क्योंकि सुपरनोवा को पहली बार शौकिया खगोल विज्ञानी कोइची इतागाकी द्वारा कुछ सप्ताह पहले पता चला था.