
Google कन्नड़ फिल्मों के सुपरस्टार राजकुमार की 88वीं जयंती पर Doodle के जरिए उन्हें याद कर रहा है.
नई दिल्ली:
दुनिया का सबसे बड़ा सर्च ईंजन Google कन्नड़ फिल्मों के सुपरस्टार राजकुमार की 88वीं जयंती पर Doodle के जरिए उन्हें याद कर रहा है. गूगल के डूडल में राजकुमार को सिनेमा थिएटर के बड़े पर्दे पर दिखाया गया है. जीवंत एक्टिंग के दम पर भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले अभिनेता और गायक राजकुमार का जन्म 24 अप्रैल 1929 को कर्नाटक में हुआ. इनका ऑरिजनल नाम सिंगनल्लुरु पुट्टास्वमैय्या मुथुराजू है, हालांकि फिल्मों में वे राजकुमार के नाम से ही जाने जाते रहे. गूगल ने अपने डूडल में राजकुमार की बनाई पेटिंग को दर्शाया है. कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन ने साल 2000 में कन्नड़ सुपरस्टार राजकुमार को अगवा कर लिया था. तब कर्नाटक और तमिलनाडु सरकार भी राजकुमार को वीरप्पन से मुक्त नहीं करा पाई थी.
सिंगनल्लुरू पुट्टुस्वामाय्या मुथुराजू उर्फ राजकुमार ने आठ साल की उम्र में ही कन्नड़ फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन बतौर मुख्य अभिनेता वर्ष 1954 में उन्होंने फिल्म ‘बेदरा कन्नप्पा’ से अपने करियर का आगाज किया.
200 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता की आखिरी फिल्म वर्ष 2000 में आई ‘शब्दवेधी’ थी.
अपने फिल्मी करियर में राजकुमार को 11 ‘कर्नाटक स्टेट फिल्म अवार्ड’, 10 ‘साउथ फिल्मफेयर अवार्ड’, दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के साथ ही ‘नादयामा’ गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ पाश्र्व गायक के पुरस्कार से भी नवाजा गया.
वर्ष 2002 में उन्हें एनटीआर राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया था. मैसूर विश्वविद्यालय से उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी मिली और पद्म भूषण एवं दादासाहेब फाल्के जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी उनके नाम हैं. राजकुमार ने 76 की उम्र में वर्ष 2006 में आखिरी सांस ली थी.
सिंगनल्लुरू पुट्टुस्वामाय्या मुथुराजू उर्फ राजकुमार ने आठ साल की उम्र में ही कन्नड़ फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन बतौर मुख्य अभिनेता वर्ष 1954 में उन्होंने फिल्म ‘बेदरा कन्नप्पा’ से अपने करियर का आगाज किया.
200 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता की आखिरी फिल्म वर्ष 2000 में आई ‘शब्दवेधी’ थी.
अपने फिल्मी करियर में राजकुमार को 11 ‘कर्नाटक स्टेट फिल्म अवार्ड’, 10 ‘साउथ फिल्मफेयर अवार्ड’, दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के साथ ही ‘नादयामा’ गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ पाश्र्व गायक के पुरस्कार से भी नवाजा गया.
वर्ष 2002 में उन्हें एनटीआर राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया था. मैसूर विश्वविद्यालय से उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी मिली और पद्म भूषण एवं दादासाहेब फाल्के जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी उनके नाम हैं. राजकुमार ने 76 की उम्र में वर्ष 2006 में आखिरी सांस ली थी.
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