लखनऊ:
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का नया सत्र शुरू होने वाला है। शिक्षा सत्र शुरू होने के पूर्व ही स्टेशनरी की दुकानों पर अभिभावकों की भीड़ लगनी शुरू हो गई है। खरीदारी के दौरान अभिभावकों को झटका लग रहा है। वजह स्टेशनरी के दामों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है।
इस वर्ष सीबीएसई सहित अन्य किताबें पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी महंगी हो गई है। महंगाई का बोझ अभिभावकों पर पड़ा है। प्राइवेट स्कूल बच्चों को रेफरेंस किताबें भी देते हैं, जिनमें से किसी भी किताब की कीमत दो सौ से कम नहीं है। इस वर्ष कुछ प्राइवेट स्कूल फीस के साथ-साथ अन्य मदों में भी बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी से अभिभावक परेशान थे ही कि स्टेशनरी के दाम बढ़ने से उन पर दोहरी मार पड़ रही है।
बच्चों के पेंसिल बाक्स की कीमत दो से तीन सौ रुपये हो गई है। वहीं स्कूल बैग दो सौ से एक हजार के बीच हो गया है। वाटर बोतल व लंच बॉक्स के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। क्लास की संपूर्ण कॉपी किताब तीन हजार से पांच हजार के बीच हो रही है।
स्टेशनरी विक्रेता आलोक भाटिया का कहना है कि किताबों के साथ-साथ स्टेशनरी के दामों में भी 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बढ़ती हुई इस महंगाई से अभिभावक की हालत खराब है।
अभिभावक दिनेश कुमार ने कहा कि हर चीजों के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। एक बच्चे की स्टेशनरी खरीदने में ही एक महीने का बजट बिगड़ जा रहा है। वहीं, नीतू तिवारी का कहना है कि स्कूलों में बच्चों पर नया सत्र जेब पर भारी पड़ रहा है। हर वर्ष स्टेशनरी के दामों में बढ़ोतरी हो जाने से बच्चों के शिक्षा के लिए सत्र शुरू होने के वक्त दूसरे खर्चों में कटौती कर स्टेशनरी के खर्च को पूरा कर रही हूं।
इस वर्ष सीबीएसई सहित अन्य किताबें पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी महंगी हो गई है। महंगाई का बोझ अभिभावकों पर पड़ा है। प्राइवेट स्कूल बच्चों को रेफरेंस किताबें भी देते हैं, जिनमें से किसी भी किताब की कीमत दो सौ से कम नहीं है। इस वर्ष कुछ प्राइवेट स्कूल फीस के साथ-साथ अन्य मदों में भी बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी से अभिभावक परेशान थे ही कि स्टेशनरी के दाम बढ़ने से उन पर दोहरी मार पड़ रही है।
बच्चों के पेंसिल बाक्स की कीमत दो से तीन सौ रुपये हो गई है। वहीं स्कूल बैग दो सौ से एक हजार के बीच हो गया है। वाटर बोतल व लंच बॉक्स के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। क्लास की संपूर्ण कॉपी किताब तीन हजार से पांच हजार के बीच हो रही है।
स्टेशनरी विक्रेता आलोक भाटिया का कहना है कि किताबों के साथ-साथ स्टेशनरी के दामों में भी 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बढ़ती हुई इस महंगाई से अभिभावक की हालत खराब है।
अभिभावक दिनेश कुमार ने कहा कि हर चीजों के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। एक बच्चे की स्टेशनरी खरीदने में ही एक महीने का बजट बिगड़ जा रहा है। वहीं, नीतू तिवारी का कहना है कि स्कूलों में बच्चों पर नया सत्र जेब पर भारी पड़ रहा है। हर वर्ष स्टेशनरी के दामों में बढ़ोतरी हो जाने से बच्चों के शिक्षा के लिए सत्र शुरू होने के वक्त दूसरे खर्चों में कटौती कर स्टेशनरी के खर्च को पूरा कर रही हूं।
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