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This Article is From Oct 08, 2017

...जब डॉक्टर ने अपना खून देकर बचाई मरीज की जान

उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्साधिकारी ने खुद का खून मरीज को दान कर यह साबित कर दिया है.

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...जब डॉक्टर ने अपना खून देकर बचाई मरीज की जान
प्रतीकात्मक चित्र
बांदा: आपने डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहते सुना होगा, लेकिन किसी मरीज की जान बचाने के लिए खुद रक्तदान करने की बानगी शायद नहीं देखी होगी. उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्साधिकारी ने खुद का खून मरीज को दान कर यह साबित कर दिया है. हमीरपुर जिले का जितेंद्र सिंह (28) अपने जिले में शिक्षा विभाग में अनुदेशक के पद पर तैनात हैं. वह पिछले एक पखवाड़े से पीलिया जनित बीमारी से ग्रसित हैं. शनिवार को उनके शरीर में महज पांच यूनिट खून बचा था. जिला चिकित्सालय बांदा के डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती जितेंद्र के परिजनों को तत्काल 'ए बी निगेटिव' ग्रुप के खून का इंतजाम करने को कहा, लेकिन न तो ब्लड बैंक में ही खून मिला और न ही उसके रिश्तेदारों का ही ग्रुप मेल खाया.

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इत्तेफाक से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कमासिन के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नवीन चक अचानक ब्लड बैंक पहुंचे और उन्होंने अपना खून देकर मरीज की जान बचा ली.

VIDEO : दिल्ली के अस्पतालों में खून का खेल
डॉ. नवीन चक से जब खून देने के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि महज इलाज कर ही मरीज की जान बचाना चिकित्सक का फर्ज नहीं है, खून नहीं, अगर मेरी किडनी की भी मरीज को जरूरत होती, तो वह भी दान कर देता.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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