Bride brings portable toilet in wedding: शादी के नाम पर दुनिया में क्या-क्या नहीं होता. कहीं जूते चुराए जाते हैं, कहीं दुल्हन रोती है, तो कहीं विदाई में अजीबोगरीब रस्में निभाई जाती हैं. मगर एक रिवाज ऐसा भी है, जहां दुल्हन अपने साथ गहने या कपड़ों से पहले एक ऐसी चीज लेकर जाती है, जिसे आमतौर पर कोई शादी से जोड़कर सोचता तक नहीं. सुनने में भले अटपटा लगे, लेकिन इसके पीछे दुआ, बरकत और आने वाली नस्लों से जुड़ा गहरा यकीन छिपा होता है. यही वजह है कि ये रस्म आज भी लोगों को हैरान कर देती है.
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शादी का रिवाज जो हैरान कर दे (China wedding traditions explained)
दुनियाभर में शादी को लेकर हर समाज की अपनी रस्में होती हैं. कुछ रस्में दिल छू जाती हैं, तो कुछ ऐसी भी होती हैं जिन पर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल लगता है. चीन के वुहान के ग्रामीण इलाकों में निभाई जाने वाली एक पुरानी हान चीनी परंपरा भी कुछ ऐसी ही है. यहां शादी के दौरान दुल्हन को अपना पोर्टेबल टॉयलेट या चैंबर पॉट साथ लाना जरूरी माना जाता है.

Photo Credit: ifeng
गंदगी नहीं, उर्वरता की निशानी (Wuhan marriage ritual)
आज के समय में टॉयलेट का नाम सुनते ही लोग मुंह बना लेते हैं, लेकिन पुराने चीन में इसका मतलब बिल्कुल अलग था. ग्रामीण इलाकों में महिलाएं रात के वक्त पोर्टेबल टॉयलेट का इस्तेमाल करती थीं. इसमें जमा मानव और पशु मल को बाद में खेतों में खाद की तरह इस्तेमाल किया जाता था. इसी वजह से चैंबर पॉट को पुनर्जनन, जीवन शक्ति और नई संतान के प्रतीक के तौर पर देखा जाने लगा.
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लाल अंडे, खजूर और वंश का दुआ (Red Eggs and Blessings for Heirs)
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, शादी के वक्त इस चैंबर पॉट को लाल अंडों, लाल खजूर, मूंगफली और शुभ चीजों से भरा जाता है. जियांग्सू, झेजियांग और शंघाई के आसपास के इलाकों में ये दुल्हन के दहेज का अहम हिस्सा रहा है. वुहान के गांवों में इसके अंदर चॉपस्टिक की जोड़ी रखी जाती है, जो बेटे के जन्म की दुआ मानी जाती है.

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वक्त के साथ बदली रस्में (portable toilet bride)
1980 के दशक के बाद जैसे जैसे आधुनिक फ्लश टॉयलेट आम हुए, वैसे-वैसे ये परंपरा शहरों से गायब होने लगी, लेकिन आज भी चीन के कुछ ग्रामीण इलाकों में इसे बड़े अदब और आस्था के साथ निभाया जाता है. ये रस्म याद दिलाती है कि परंपराएं सिर्फ अजीब नहीं, बल्कि अपने वक्त और जरूरतों की कहानी भी कहती हैं. ये खबर इसलिए अहम है क्योंकि ये दिखाती है कि शादी जैसे मौके पर भी संस्कृति, खेती और जीवन के बीच कैसा गहरा रिश्ता रहा है. जो चीज आज अटपटी लगती है, कभी वही खुशहाली की निशानी थी.
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