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बेंगलुरु की बारिश में बह गईं 5000 किताबें, 'द बुकवर्म' की बर्बादी देख रो पड़ा हर पाठक!

बेंगलुरु की धुआंधार बारिश ने सिर्फ सड़कों को समंदर नहीं बनाया, बल्कि किताबों के एक बसे-बसाए संसार को उजाड़ दिया है. चर्च स्ट्रीट की मशहूर दुकान 'द बुकवर्म' में पानी घुसने से हजारों अनमोल किताबें बर्बाद हो गई हैं. अब 'बुकमैन' कृष्णा गौड़ा की इस विरासत को बचाने के लिए पूरा शहर एक साथ खड़ा हो गया है.

बेंगलुरु की बारिश में बह गईं 5000 किताबें, 'द बुकवर्म' की बर्बादी देख रो पड़ा हर पाठक!
5000 किताबों की बर्बादी...बेंगलुरु के चहेते बुकस्टोर पर कुदरत का कहर, अब फैंस करेंगे भरपाई
Image credit: The Bookworm/Instagram

Books Destroyed in Bengaluru Rain: बेंगलुरु की बारिश ने इस बार जरा ज्यादा ही बेरहमी दिखा दी. शहर के चर्च स्ट्रीट पर किताबों का वो कोना, जिसे हम 'द बुकवर्म' के नाम से जानते हैं, आज आंसुओं और पानी में डूबा है. पिछले दो दशकों से जो दुकान किताबों की खुशबू से महकती थी, वहां अब सीलन और बर्बादी का मंजर है. करीब 4,000 से 5,000 नई और पुरानी किताबें बारिश के पानी की भेंट चढ़ गईं. जब इंस्टाग्राम पर दुकान के मालिक कृष्णा गौड़ा (जिन्हें लोग प्यार से 'बुकमैन ऑफ बेंगलुरु' कहते हैं) ने घुटनों तक भरे पानी और तैरती हुई किताबों की तस्वीरें शेयर कीं, तो पढ़ने वालों का कलेजा मुंह को आ गया.

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Photo Credit: thebookworm_blr

किताबों के समंदर में डूबी यादें (Bengaluru Bookstore Flood)

किताबें सिर्फ कागज का ढेर नहीं होतीं, उनमें जज्बात और इल्म (ज्ञान) का खजाना होता है. इस दुकान की हर रैक पर कोई न कोई कहानी सजी थी, लेकिन आसमानी आफत ने सब तहस-नहस कर दिया. कृष्णा गौड़ा ने बड़ी मेहनत से इस स्वतंत्र बुकस्टोर को खड़ा किया था. आज आलम ये है कि जमीन से छत तक सजी किताबों की गड्डियां पानी में फूलकर खराब हो चुकी हैं. मगर कहते हैं न कि जब नीयत साफ हो, तो पूरी कायनात साथ देती है. सोशल मीडिया पर जैसे ही ये खबर फैली, बेंगलुरु के लोग अपने इस 'बुकवर्म' को बचाने के लिए टूट पड़े. कोई कह रहा है कि, 'हम पहले से ज्यादा किताबें खरीदेंगे', तो कोई आर्थिक मदद का हाथ बढ़ा रहा है.

शहर खड़ा हुआ अपने 'बुकमैन' के साथ (Bangalore rain news)

चर्च स्ट्रीट का किराया आसमान छू रहा है, लेकिन गौड़ा 'साहब' ने कभी किताबों का साथ नहीं छोड़ा. अब वही प्यार उन्हें वापस मिल रहा है. लोग पूछ रहे हैं कि वे कैसे इस नुकसान की भरपाई में हिस्सा बन सकते हैं. यह सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि बेंगलुरु की रूह का एक हिस्सा है, जिसे बचाने की जद्दोजहद अब हर पाठक की अपनी बन गई है. ऑरेंज अलर्ट और बारिश के कहर के बीच, यह एकजुटता सुकून देने वाली है.

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उम्मीद है कि 'द बुकवर्म' की अलमारियां फिर से गुलजार होंगी और किताबों के पन्ने फिर से मुस्कुराएंगे. कुदरत के आगे किसी का जोर नहीं चलता, लेकिन इंसानी जज्बा बड़ी से बड़ी तबाही को मात दे सकता है. बेंगलुरु के बुक लवर्स ने दिखा दिया है कि, वे अपनी विरासत को इतनी आसानी से डूबने नहीं देंगे.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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