Viral Video: बेंगलुरु की एंटरप्रेन्योर सिमरिधि मखीजा ने फाइनेंशियल सिक्योरिटी और मेंटल हेल्थ के बीच संबंध पर अपनी राय शेयर करके ऑनलाइन बहस छेड़ दी है. 'द स्पीक फेस्ट' की फाउंडर ने बताया है कि स्टेस्ट फ्री रहने के लिए बैंक अकाउंट में कितने रुपये की सेविंग होनी चाहिए. उनका कहना है कि रेगुलर इनकम और अच्छी-खासी बचत होने से फाइनेंशियल चिंता काफी कम हो सकती है और मुश्किल समय में सुरक्षा का एहसास मिल सकता है.
'लगातार पैसे आने से बेहतर कुछ नहीं'
अपने इंस्टाग्राम अकाउंट (@simridhimakhija) से करीब 1 मिनट की वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कहा, 'आपके नर्वस सिस्टम को शांत करने के लिए लगातार पैसे आते रहने से बेहतर कुछ नहीं है. और इसका कारण ये नहीं है कि आप हर वीकेंड अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट जा सकते हैं, कहीं भी शॉपिंग कर सकते हैं या अपने पसंदीदा पब जा सकते हैं. बिल्कुल नहीं. बल्कि इसलिए, क्योंकि अगर आपके बैंक अकाउंट में 20 से 30 लाख रुपये जमा हैं, तो आपको आगे क्या होगा, इसकी चिंता नहीं करनी पड़ती. चाहे आपकी नौकरी चली जाए, माता-पिता को पैसों की जरूरत हो, कोई हेल्थ से जुड़ी इमरजेंसी हो. कुछ भी हो, आप सुरक्षित महसूस करते हैं क्योंकि आपके बैंक अकाउंट में 20 से 30 लाख रुपये जमा हैं.'
'मुश्किल समय का सहारा है आपकी सेविंग्स'
मखीजा कहती हैं, 'थेरेपी ठीक है, किताबें पढ़ना ठीक है, नर्वस सिस्टम को शांत करने की कोशिश करना भी ठीक है, लेकिन जब तक आप इस बात की जड़ तक नहीं पहुंचते कि आपका नर्वस सिस्टम हर समय ऐसा क्यों रिएक्ट कर रहा है, तब तक आप बेहतर महसूस नहीं करेंगे. क्योंकि तभी आपको लगेगा कि आप दुनिया में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं. एक तो इसलिए, क्योंकि आपने वह पैसा खुद कमाया है, और दूसरा, यह किसी भी मुश्किल हालात में आपके लिए एक सहारे का काम करता है.'
'कैश फ्लो नहीं है तो संघर्ष करना पड़ता है'
आखिर में सिमरिधि ने कहा, 'ऐसे क्रिएटर के तौर पर मुझे काफी आलोचना भी झेलनी पड़ती है जो पैसे के बारे में बहुत ज्यादा बात करती है, लेकिन मैंने बेंगलुरु में देखा है कि जिन फाउंडर्स के पास लगातार कैश फ्लो नहीं होता, उन्हें जिंदगी के हर पहलू में संघर्ष करना पड़ता है, जबकि इसके उलट वे फाउंडर्स जिन्होंने सफलता हासिल कर ली है, वे जिंदगी के बाकी सभी पहलुओं में खुश रहते हैं. मैंने यह सब खुद देखा है और इसीलिए आलोचना के बावजूद मैं जोर-शोर से यह बात कहती रहूंगी.'
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सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन्स
सिमरिधि मखीजा की इन बातों को सुनकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और लोग इस पर अपनी-अपनी राय देने लगे. कुछ लोगों का मानना था कि सेविंग्स होने से आजादी का अहसास होता है और रोजमर्रा की चिंता कम होती है, खासकर तब जब लोगों पर किराया, परिवार के खर्च या इलाज जैसे खर्चों की जिम्मेदारी हो. वहीं, दूसरों का तर्क था कि पैसा आर्थिक तनाव को कम तो कर सकता है, लेकिन इमोशनल सपोर्ट, थेरेपी या मेंटल हेल्थ से जुड़ी अन्य चीजों की जगह नहीं ले सकता.
एक यूजर ने लिखा, 'जब आपकी आमदनी स्थिर होती है, तो आपके दिमाग को लगातार अगली समस्या के लिए तैयार नहीं रहना पड़ता. इस तरह की आर्थिक शांति चुपचाप आपके सोचने, जीने और यहां तक कि जोखिम लेने के तरीके को भी बदल देती है.'
दूसरे यूजर ने कहा, 'शांत नर्वस सिस्टम भी पैसा कमाने में मदद करता है.' तीसरे ने कहा, 'सच कहूं तो, आर्थिक स्थिरता आपको एक ऐसी शांति देती है जो थेरेपी से हमेशा नहीं मिल सकती.'
चौथे यूजर ने अपनी बात जोड़ते हुए कहा, 'असल में बात इसके उलट है. शांत नर्वस सिस्टम ही सही मात्रा में पैसा आकर्षित करने और उसे बनाए रखने की क्षमता पैदा करता है. अभी आपको ₹10–20 लाख आरामदायक लग सकते हैं, लेकिन मैं ऐसे लोगों से मिला हूं जिनके पास लिक्विड एसेट्स के रूप में इससे कहीं ज्यादा पैसा है, फिर भी वे गहरे बेचैन रहते हैं.'
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